चोरी

Women Reuters

क्यों हम दूसरे की पीड़ा महसूस नहीं कर पाते

वर्तमान समाज को सहानुभूति की नहीं, समानुभूति की ज़रूरत है. आज नीति बनाने वालों में ही ‘समानुभूति’ का तत्व खत्म हो चुका है. नीति बनाते समय उन्हें आंकड़े चाहिए होते हैं, एहसास नहीं.

(इलस्ट्रेशन: एलिज़ा बख़्त)

साल 2016 में दिल्ली में हर रोज 11 महिलाओं का अपहरण हुआ

राजधानी में पिछले साल दर्ज अपहरण के 6,707 मामलों में से 75 फीसदी से ज्यादा महिलाओं से जुड़े थे, हर रोज औसतन दो बच्चों का यौन उत्पीड़न हुआ.