छत्तीसगढ़

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

आदिवासियों और परंपरागत वनवासियों को सामुदायिक वन अधिकार दिए गए: छत्तीसगढ़ सरकार

सामुदायिक वन अधिकारों में लघु वनोपज का मालिक़ाना हक़, मछली और जल निकायों के उत्पादों के प्रयोग, कमज़ोर आदिवासी समूहों के निवास स्थान जैसे अधिकार शामिल हैं. राज्य सरकार का कहना है कि अब तक चार लाख से अधिक व्यक्तिगत और 46 हज़ार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी किए गए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: कथित अफेयर को लेकर युवक और चचेरी बहन की हत्या

मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले का है. पुलिस ने बताया कि युवक और युवती की ज़हर देकर हत्या करने के बाद शव परिजनों ने जला दिया था. पुलिस ने आंशिक रूप से जले शवों को क़ब्ज़े में लिया है. इस संबंध में युवक के चाचा और युवती के भाई को गिरफ़्तार किया गया है.

Kondagaon

छत्तीसगढ़ः कथित गैंगरेप के बाद युवती ने कर ली थी ख़ुदकुशी, पुलिस ने तीन महीने बाद दर्ज किया केस

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव ज़िले में 18 जुलाई को कथित तौर पर सात लोगों ने एक लड़की के साथ गैंगरेप किया था. अगले दिन उसने आत्महत्या कर ली थी. घटना के तीन महीने बाद पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ़्तार किया है. थाना प्रभारी को सस्पेंड कर उनके ख़िलाफ़ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

(फोटो सभार: भारतीय रेलवे वेबसाइट)

छत्तीसगढ़: फ़सल ख़राब होने से परेशान किसान ने फ़ांसी लगाकर आत्महत्या की

मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले का है. अधिकारियों ने बताया कि 35 वर्षीय किसान ने चार एकड़ ज़मीन लीज पर लेकर धान की फसल लगाई थी, लेकिन वह किसी बीमारी के कारण पूरी तरह ख़राब हो गई.

आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी. (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियोग्रैब)

कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद एनआईए ने सोनी सोरी से 80 किमी दूर अपने ऑफिस बुलाकर पूछताछ की

आरोप है कि जिस स्वास्थ्य अधिकारी ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि की थी, उसी ने पूछताछ के लिए उन्हें फिट बताया था. इसके बाद पूछताछ में शामिल होने के लिए यात्रा करने को क्वारंटीन नियमों का उल्लंघन बताते हुए सोरी के ख़िलाफ़ उसी स्वास्थ्य अधिकारी ने केस भी दर्ज करा​ दिया.

बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा. (फाइल फोटो साभार: छत्तीसगढ़ टूरिज्म)

क्यों बस्तर के प्रसिद्ध दशहरे के रथ के लिए आदिवासी लकड़ी देने से इनकार कर रहे हैं

बस्तर में हर साल दशहरे के पर्व पर एक आठ पहियों का रथ निकलता है, जिसे ककालगुर गांव की लकड़ी से तैयार किया जाता है. इस बार यहां के ग्रामीणों ने सदियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन करने से इनकार कर दिया है.

झारखंड के गुमला जिले के डुमरी ब्लॉक गांव में बने एक अंग्रेजी-कुरुख स्कूल के छात्र. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था आदिवासियों को उनका अस्तित्व बचा पाने के रास्ते क्यों नहीं दिखा पाती

आधुनिक शिक्षा का पूरा ढांचा वर्चस्ववादी संस्कृति और मानसिकता से खड़ा किया गया है, जिसमें आदिवासी समाज कहीं फिट नहीं बैठता. उसकी पूरी जीवन शैली, जीवन दर्शन और दुनिया अलग है, जिसे वर्चस्ववादी नज़रिये से नहीं समझा जा सकता.

स्वामी अग्निवेश. (फोटो साभार: फेसबुक/@swamiagnivesh)

स्वामी अग्निवेश: आधुनिक आध्यात्मिकता का खोजी

स्वामी अग्निवेश गांधी की परंपरा के हिंदू थे, जो मुसलमान, सिख, ईसाई या आदिवासी को अपने रंग में ढालना नहीं चाहता और उनके लिए अपना खून बहाने को तत्पर खड़ा मिलता है. वे मुसलमानों और ईसाइयों के सच्चे मित्र थे और इसीलिए खरे हिंदू थे.

वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

भीमा कोरेगांव: सुधा भारद्वाज की बेटी ने कहा, जेल में हुए तनाव से मां को हुई दिल की बीमारी

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक सुधा भारद्वाज की बेटी ने बताया है कि जेल से मिली उनकी मां की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें हृदय संबंधी बीमारी से ग्रस्त बताया गया है, जो जेल जाने से पहले उन्हें नहीं थी. सुधा भारद्वाज के परिवार और सहयोगियों ने उनकी रिहाई पर जल्द सुनवाई की मांग की है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फोटो संभार: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में मारे गए 32 आदिवा​सियों के परिवारों के लिए 14 साल बाद मुआवज़े का ऐलान

साल 2006 में नक्सल विरोधी समूह सलवा जुडूम और नक्सलियों के बीच लड़ाई के दौरान नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के एर्राबोर में हमला कर 32 आदिवासियों की हत्या कर दी थी, मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. (फोटो साभार: फेसबुक/@BhupeshBaghelCG)

सुकमा हमले के समय पास में ही थी सीआरपीएफ, लेकिन कार्रवाई नहीं की: भूपेश बघेल

मार्च महीने में छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए एक माओवादी हमले में 17 पुलिसकर्मी मारे गए थे. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया है कि तब सीआरपीएफ की टीम घटनास्थल के पास ही थी लेकिन आदेश न मिलने के कारण उन्होंने कार्रवाई नहीं की.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

2013 दरभा हत्याकांड: राज्य की एफ़आईआर ट्रांसफर करने की एनआईए की याचिका ख़ारिज

दरभा हत्याकांड को लेकर छत्तीसगढ़ की एजेंसियों और एनआईए के बीच केस फाइलों और रिकॉर्ड को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. साल 2013 में सुकमा की दरभा घाटी में माओवादियों के हमले में छत्तीसगढ़ में लगभग पूरे कांग्रेस नेतृत्व का सफाया हो गया था. इस हमले में महेंद्र कर्मा, नंद किशोर पटेल और विद्या चरण शुक्ल की मौत हो गई थी.

नंदिनी सुंदर. (फोटो: Special arrangement)

झूठे आरोपों की मानसिक प्रताड़ना के लिए कार्यकर्ताओं को मुआवज़ा दे छत्तीसगढ़ सरकार: एनएचआरसी

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुकमा ज़िले के एक शख़्स की हत्या के आरोप में नवंबर 2016 में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नामजद किया था. फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने मामले की जांच की और हत्या में कार्यकर्ताओं की भूमिका न पाए जाने पर आरोप वापस लेते हुए एफआईआर से नाम हटा लिए.

Balrampur

छत्तीसगढ़ः परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर लगाया बीमार महिला को अस्पताल ले जाने से रोकने का आरोप, मौत

मामला बलरामपुर ज़िले का है. बीमार महिला को उनके पति किराये की गाड़ी से अंबिकापुर के सरकारी अस्पताल ले जा रहे थे. आरोप है कि रास्ते में सूरजपुर ज़िले की सीमा पर उन्हें पुलिसकर्मियों ने बिना ई-पास के आगे नहीं जाने दिया, वापस लौटने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया.

(फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: कमरे में बंद 43 गायों की दम घुटने से मौत, सरपंच सहित कई अन्य पर मामला दर्ज

मामला बिलासपुर ज़िले का है. ज़िला कलेक्टर ने बताया कि गांव के पुराने पंचायत भवन में लगभग 60 गायों को बंद करके रखा गया था. दुर्गंध फैलने पर जब कमरा खोला गया, तब 43 गायों की मौत हो चुकी थी.