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जम्मू कश्मीर: विभाजन के बाद पहली बार केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, परिसीमन पर चर्चा की संभावना

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने सहित राजनीतिक प्रक्रियाओं को मज़बूत करने की केंद्र की पहल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जून को वहां के सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं. यह बैठक केंद्र द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन करने की घोषणा के बाद से इस तरह की पहली कवायद होगी.

New Delhi: Telecom Minister Manoj Sinha addresses a press conference regarding the achievements of his ministry in the four years of NDA government, in New Delhi on Tuesday, June 12, 2018. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI6_12_2018_000053B)

अमित शाह और मनोज सिन्हा की मुलाकात के बाद जम्मू कश्मीर में बड़े बदलाव की अटकलें

केंद्रशासित जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते छह जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक बैठक में शामिल हुए थे. इसके बाद से एक तरफ़ जहां जम्मू को अलग राज्य बनाने की अफ़वाह गर्म है, दूसरी ओर ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने पर विचार कर सकती है.

भारत: साल 2021 में अब तक सरकारों द्वारा कम से कम 10 बार इंटरनेट पर पाबंदी लगाई गई

सिर्फ 2019 और 2020 में ही भारत में 13,000 घंटे से अधिक समय तक इंटरनेट बंद रहा. किसी भी चुनी गई सरकार द्वारा सबसे लंबे समय यानी 552 दिनों के लिए 4जी इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध जम्मू कश्मीर में लगाया गया था. इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है.

अगस्त 2019 के बाद पहली बार पूरे जम्मू कश्मीर में बहाल होगी 4जी इंटरनेट सेवा

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी, जब जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर, और लद्दाख में बांट दिया गया था. मार्च, 2020 में 2जी इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान भी उच्च गति की मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध जारी था.

शोपियां मुठभेड़: सेना के कैप्टन और दो अन्य आरोपियों ने साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश की

जम्मू कश्मीर के शोपियां के अमशीपुरा इलाके में पिछले साल 18 जुलाई को तीन मज़दूरों को आतंकी बताकर मुठभेड़ में सेना द्वारा मार दिया गया था. एसआईटी ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि सेना के कैप्टन सहित तीनों आरोपी पुरस्कार के 20 लाख रुपये पाने के लिए ग़लत सूचनाएं देते रहे. हालांकि सेना ने पुरस्कार दिए जाने की बात से इनकार किया है.

जम्मू के साथ भेदभाव के आरोप के बाद केंद्रशासित राज्य प्रशासन ने नौकरी का विज्ञापन रद्द किया

जम्मू कश्मीर सर्विस सेलेक्शन बोर्ड ने एक जनवरी को कृषि विभाग में भर्ती के लिए आवेदन मंगाया था. कश्मीर में 136 और जम्मू में 20 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. कृषि स्नातकों ने केंद्र शासित राज्य प्रशासन पर जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों में पदों की संख्या को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया था.

जम्मू कश्मीर पुलिस का दावा- मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकी, परिवारों ने कहा- आम नागरिक थे

बीते जुलाई महीने में भी सेना ने शोपियां ज़िले में तीन आतंकियों को मार गिराने के दावा किया था. तब भी तीनों के परिजनों ने उन्हें आम नागरिक बताया था. मामले की जांच के बाद सेना ने स्वीकार किया कि तीनों युवक राजौरी के रहने वाले थे और मुठभेड़ के दौरान सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के तहत मिलीं शक्तियों का उल्लंघन हुआ था.

शोपियां मुठभेड़: जम्मू कश्मीर पुलिस ने सेना के अधिकारी समेत तीन के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की

जम्मू कश्मीर के शोपियां में इस साल जुलाई में तीन मज़दूरों को आतंकी बताकर एक मुठभेड़ में मार दिया गया था. प्रशासन द्वारा यह स्वीकार किए जाने के बाद कि तीनों युवक राजौरी के निवासी थे, सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग जांच के आदेश दिए थे.

शोपियां मुठभेड़ः तीन मज़दूरों की हत्या के मामले में जवानों के ख़िलाफ़ साक्ष्य जुटाने का काम पूरा

जम्मू कश्मीर के शोपियां के अमशीपुरा इलाके में इस साल 18 जुलाई को तीन मज़दूरों को आतंकी बताकर मुठभेड़ में मार दिया गया था. जांच के बाद 18 सितंबर को सेना ने स्वीकार किया कि तीनों युवक राजौरी के रहने वाले थे और मुठभेड़ के दौरान आफस्पा के तहत मिलीं शक्तियों का उल्लंघन हुआ था. दोषियों के ख़िलाफ़ हो सकती है कोर्ट मार्शल की कार्रवाई.

गृह सचिव ने बताया, सुरक्षा कारणों से जम्मू कश्मीर में इंटरनेट पाबंदी का ब्योरा नहीं दे सकते

गृह सचिव अजय भल्ला ने लोकसभा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार सुरक्षा के आधार पर कोई भी दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से इनकार कर सकती है. कांग्रेस नेता शशि थरूर की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने टेलीकॉम सेवाएं/इंटरनेट पर पाबंदी को लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारियों से देने को कहा था.

शोपियां फ़र्ज़ी मुठभेड़: राजौरी के तीन युवकों के शव कब्र से निकालकर परिवार को सौंपे गए

सेना ने जम्मू कश्मीर के शोपियां इलाके में बीते 18 जुलाई को तीन आतंकियों के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया था. हालांकि, 18 सितंबर को सेना ने स्वीकार किया कि तीनों युवक राजौरी के रहने वाले थे और ऑपरेशन के दौरान आफस्पा, 1990 के तहत मिलीं शक्तियों का उल्लंघन हुआ था.

डीएनए टेस्ट में पुष्टि, सेना द्वारा कथित शोपियां मुठभेड़ में मारे गए तीन युवक राजौरी के थे

सेना ने जम्मू कश्मीर के शोपियां इलाके में बीते 18 जुलाई को तीन आतंकियों के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया था. अब डीएनए टेस्ट से राजौरी के तीन परिवारों के उन दावों की पुष्टि हो गई है, जिसमें उनका कहना था कि मुठभेड़ में मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि मज़दूर थे.

शोपियां कथित मुठभेड़: सेना ने आफस्पा का उल्लंघन स्वीकार किया, कहा- मारे गए लोग राजौरी से थे

सेना ने जम्मू कश्मीर के शोपियां इलाके में बीते 18 जुलाई को तीन आतंकियों के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया था. वहीं राजौरी के तीन परिवारों का कहना था कि मुठभेड़ में मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि मज़दूर थे.

जम्मू कश्मीर में दो के अलावा बाकी ज़िलों में 4जी इंटरनेट सेवा नहीं होगी बहाल

जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि स्थितियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है. आदेश में कहा गया है कि इस बात की पक्की सूचना मिली है कि आतंकी गिरोह भोले-भाले युवकों की भावनाएं भड़काने और उन्हें बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में शामिल करने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं.

संसद की स्थायी समिति के एजेंडे से जम्मू कश्मीर में इंटरनेट का मसला हटाया गया: रिपोर्ट

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा संसदीय समितियों की बैठकों में अदालत में विचाराधीन मामलों को नहीं लेने का सुझाव दिया गया था. इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि जम्मू कश्मीर में इंटरनेट का मसला अब अदालत में लंबित नहीं है.