जवाहरलाल नेहरू

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फोटो: रॉयटर्स)

क्या सरदार पटेल का सपना वही था, जो भाजपा बता रही है?

‘गांधी के रामराज्य के बारे में तुम क्या जानते हो? गांधी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? वैसे तुलसी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? सावरकर हो या गोलवलकर, उनके हिंदू राष्ट्र का हमारे रामराज्य से क्या लेना-देना?’

जवाहरलाल नेहरू. (फोटो साभार: IISG/Flickr (CC BY-SA 2.0)

कश्मीर और 370 से लेकर विभाजन तक नेहरू के प्रति भाजपा की नफ़रत झूठ की बुनियाद पर टिकी है

गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त में दिए एक भाषण में कहा था कि अगर नेहरू न होते, तो पाक अधिकृत कश्मीर भारत के कब्ज़े में होता. सच तो यह है कि अगर आज कश्मीर भारत का हिस्सा है तो यह केवल नेहरू के चलते ही है.

फोटो साभार: thierry ehrmann/Flickr CC BY 2.0

बापू के नाम: आज आप जैसा कोई नहीं, जो भरोसा दिला सके कि सब ठीक हो जाएगा

जयंती विशेष: जिस दौर में गांधी को ‘चतुर बनिया’ की उपाधि से नवाज़ा जाए, उस दौर में ये लाज़िम हो जाता है कि उनकी कही बातों को फिर समझने की कोशिश की जाए और उससे जो हासिल हो, वो सबके साथ बांटा जाए.

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अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

गुजरात के दांडी में महात्मा गांधी की प्रतिमा. (फोटो साभार: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

मैं मोहनदास करमचंद गांधी अब राष्ट्रपिता नहीं कहलाना चाहता…

आज राष्ट्र को वास्तविक पिता की ज़रूरत है, मेरे जैसे सिर्फ नाम के पिता से काम नहीं चलने वाला है. आज बड़े-बड़े फ़ैसले हो रहे हैं. छप्पन इंच की छाती दिखानी पड़ रही है. ऐसा पिता जो पब्लिक को कभी थप्पड़ दिखाए तो कभी लॉलीपॉप, पर अपने तय किए रास्ते पर ही राष्ट्र को ठेलता जाए. मैं ऐसे राष्ट्रपिता की ज़रूरत कैसे पूरी कर सकता हूं?

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

A deserted road in Srinagar on Monday. Restrictions were in force across Kashmir and in several parts of Jammu. (REUTERS/Danish Ismail)

मोदी सरकार के सौ दिनों की सबसे बड़ी ‘उपलब्धि’ भारतीय संघीय ढांचे को कमज़ोर करना रहा है

भारतीय संविधान में स्पष्ट तौर पर भारत को राज्यों का संघ कहा गया है यानी एक संघ के रूप में सामने आने से पहले भी ये राज्य अस्तित्व में थे. इनमें से एक जम्मू कश्मीर का यह दर्जा ख़त्म करते हुए मोदी सरकार ने संघ की अवधारणा को ही चुनौती दी है.

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कश्मीर मसले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाएगा पाकिस्तान

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि सभी क़ानूनी पहलुओं पर विचार किए जाने के बाद सैद्धांतिक रूप से कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत में ले जाने का फैसला किया गया है जहां मानवाधिकार उल्लंघन को केंद्र में रखकर उठाया जाएगा.

An Indian police officer stands behind the concertina wire during restrictions on Eid-al-Adha after the scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 12, 2019. REUTERS/Danish Ismail

सरकार अब संवाद से परे हो चुकी है…

एक तरफ कहा जाता है कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है, उस लिहाज़ से कश्मीरी भी अभिन्न होने चाहिए थे. तो फिर इस बदलाव की प्रक्रिया में उनसे बात क्यों नहीं की गई? उनकी राय क्यों नहीं पूछी गई?

Indian policemen stand guard in a deserted street during restrictions in Jammu on August 6.	Photo : Reuters

कश्मीर का मन मरघट बन गया है…

कहा जा रहा है कि लोकतंत्र बहुमत से ही चलता है और बहुमत है, लेकिन ‘बहुमत’ मतलब बहु-मत हों, विभिन्न मत, लेकिन संसद में क्या मतों का आदान-प्रदान हुआ? एक आदमी चीख रहा था, तीन सौ से ज्यादा लोग मेजें पीट रहे थे. यह बहुमत नहीं, बहुसंख्या है. आपके पास मत नहीं, गिनने वाले सिर हैं.

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कश्मीर के छात्रों ने केंद्र के अधिकारी का ईद निमंत्रण ठुकराया, कहा- ये जले पर नमक छिड़कना है

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने निमंत्रण के जवाब में एक बयान जारी कर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य में संचार के माध्यमों पर रोक लगाने को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया.

पी. चिदंबरम. (फोटो: रॉयटर्स)

मुस्लिम बहुल होने के कारण जम्मू कश्मीर से हटा अनुच्छेद 370: चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि भाजपा ने अपनी ताकत से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया है और यदि जम्मू कश्मीर हिंदू बहुल राज्य होता तो भाजपा कभी भी ऐसा नहीं करती.

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शिव प्रसाद गुप्त: गांधी ने जिन्हें राष्ट्ररत्न कहा था, लोगों ने उन्हें भुला दिया

वाराणसी के समाजसेवी शिवप्रसाद गुप्त को आज उनके शहर के बाहर कोई जयंती या पुण्यतिथि पर भी याद नहीं करता, लेकिन कभी देश की आज़ादी की लड़ाई के साथ समाज के उत्थान में उनके योगदान के चलते महात्मा गांधी उन्हें राष्ट्ररत्न कहा करते थे.

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उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक भाजपा कांग्रेस की दिखाई राह पर चल रही है

भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार हो या केंद्र की मोदी सरकार, अपने फ़ैसलों में दोनों कदम-दर-कदम पुराने दिनों वाली कांग्रेसी सरकार के निर्णयों की ही पुनरावृत्ति करती दिखाई दे रही हैं. योगी सरकार ने ट्वीट के लिए गिरफ़्तारी करवाई है, वहीं इसी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के जीबी पंत ने गीतकार शैलेंद्र की एक कविता पर प्रतिबंध लगाया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

कांग्रेस की मौत की कामना करना कितना उचित है?

पिछले पांच साल से देश को कांग्रेसमुक्त करने का आह्वान भाजपा नेताओं के द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन न सिर्फ यह कि वह अप्रासंगिक नहीं हुई, बल्कि इस चुनाव में भी भाजपा के लिए वही संदर्भ बिंदु बनी रही. जनतंत्र की सबसे अधिक दुहाई देनेवाले समाजवादियों को जनसंघ या भाजपा के साथ कभी वैचारिक या नैतिक संकट हुआ हो, इसका प्रमाण नहीं मिलता.

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

‘यह गांधी कौन था?’ ‘वही, जिसे गोडसे ने मारा था’

जब गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि उस वीर ने गांधी को मार डाला था. गांधी गोडसे के बहाने याद किए जाएंगे. अभी तक गोडसे को गांधी के बहाने याद किया जाता था. एक महान पुरुष के हाथों मरने का कितना फायदा मिलेगा गांधी को.

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आंबेडकर को जितना अस्वीकार वर्तमान राजनीति ने किया है, उतना किसी और ने नहीं किया

जब कोई फल पक जाता है, तब उसे तोड़ने के लिए सभी लपक पड़ते हैं. उसी तरह आज राजनीति में आंबेडकर चहेते हो गए हैं, लेकिन आंबेडकर दिखने में चाहे जितने आकर्षक हों, अपनाने में उतने ही कठिन हैं. वर्तमान राजनीतिक दल इस बात को जानते हैं इसीलिए वे 14 अप्रैल और 6 दिसंबर पर उनका नाम तो लेते हैं लेकिन उनकी वैचारिक तेजस्विता से डरते हैं.

पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ दिलीप कुमार, देवआनंद और राजकपूर. (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

जब दिलीप कुमार ने नेहरू के रक्षा मंत्री को हारता हुआ चुनाव जिताया

चुनावी बातें: 1980 के चुनाव में वामपंथियों के नारे- ‘चलेगा मजदूर उड़ेगी धूल, न बचेगा हाथ, न रहेगा फूल’ के जवाब में कांग्रेस ने ‘न जात पर, न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मुहर लगेगी हाथ पर’ का नारा दिया था.

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास: गांधी हत्या या गांधी वध?

आज की मास्टर क्लास में अपूर्वानंद उन लोगों के बारे में चर्चा कर रहे हैं जिन्हें गांधी हत्या को गांधी वध कहने में संकोच नहीं होता.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

सप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली

अगला आदेश तीन जजों की एक उपयुक्त पीठ द्वारा पारित किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की समयबद्ध सुनवाई की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी.

Ayodhya Sheetala Singh Book

अयोध्या विवाद न दो धर्मों का है और न मंदिर-मस्जिद का

फैज़ाबाद से निकलने वाले हिन्दी दैनिक जनमोर्चा के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह की किताब ‘अयोध्या- रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद का सच’ बताती है कि अयोध्या विवाद में सारी पेचीदगियां राजनीति द्वारा अपनी स्वार्थ साधना के लिए इस मुद्दे के बेजा इस्तेमाल से पैदा हुई हैं.

Datia: Congress President Rahul Gandhi offers prayers at Pitambara Peeth in Datia, Monday, Oct 15, 2018. MP Congress chief Kamal Nath and party leader Jyotiraditya Scindia are also seen. (PTI Photo) (PTI10_15_2018_000042B)

क्या इस देश में अब बहस सिर्फ़ अच्छे हिंदू और बुरे हिंदू के बीच रह गई है?

कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता का नाम लेना छोड़ दिया है. वह विचार जो उस पार्टी का विशेष योगदान था, भारत को ही नहीं, पूरी दुनिया को, उसमें उसे इतना विश्वास नहीं रह गया है कि चुनाव के वक़्त उसका उच्चारण भी किया जा सके.

Gandhi Ki Mrityu Photo Rajkamal-001

‘गांधी की मृत्यु’ को गांधी के जन्म के उत्सवों के बीच पढ़ा जाना चाहिए

नेमेथ लास्लो की अचूक नैतिकता गांधी के संदेश के मर्म को पकड़ लेती है, ‘सत्याग्रह-सत्य में निष्ठा-का अर्थ है राजनीति का संचालन स्वार्थ या हित साधन से नहीं, बल्कि सत्य से प्रेम के द्वारा हो.’

New Delhi : A view of Parliament House in New Delhi on Wednesday. PTI Photo by Atul Yadav (PTI12_19_2012_000056A)

क्या देश की राजनीति हमेशा ऐसी ही मूल्यहीनता और लूट-खसोट की पर्याय रही है?

देश में अरबपतियों की तेज़ी से बढ़ती संख्या के बीच आप रोते रहिए कि राजनीति का पतन हो गया है और अब वह समाजसेवा या देशसेवा का ज़रिया नहीं रही, इन बहुमतवालों को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उन्होंने इस स्थिति को सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यता भी दिला दी है.

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प्रेमचंद का ‘सूरदास’ आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है

1925 में आए प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि में किसान सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ खड़े हो जाते हैं. जो बात रंगभूमि में सूरदास ने कहने की कोशिश की थी, वही आज जब कोई किसान कह रहा है तो उसे निशाना साधकर गोली मारी जा रही है.

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सरकार चाहती है देश का युवा समझे कि प्रतिरोध करना राष्ट्रद्रोह और ग़ैर-लोकतांत्रिक है

हमारी राष्ट्रीय राजनीति और भाजपा कांग्रेस विरोधी आंदोलन यानी प्रतिरोध का ही नतीजा हैं, लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता. ख़ुद भाजपा भी नहीं. वे चाहते हैं कि हम इमरजेंसी के बारे में जानें लेकिन उतना, जितने से उन्हें नुकसान न पहुंचे.

(फोटो: रॉयटर्स/विकिपीडिया)

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई कांग्रेसी जेल में क्रांतिकारियों से नहीं मिला, पर सच ये नहीं है

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे नरेंद्र मोदी का कांग्रेस के किसी नेता के भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से जेल में न मिलने के बारे में किया गया दावा बिल्कुल ग़लत है.

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बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’: कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए

जीवन भर आर्थिक चुनौतियों से जूझने के बावजूद बालकृष्ण शर्मा के मन में इसे लेकर कोई ग्रंथि नहीं थी. कोई उनसे भविष्य के लिए कुछ बचाकर रखने की बात करता तो कहते, मेरा शरीर भिक्षा के अन्न से पोषित है इसलिए मुझे संग्रह करने का कोई अधिकार नहीं है.

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उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान: भारतीय संगीत का संत कबीर

पुण्यतिथि विशेष: उस्ताद ऐसे बनारसी थे जो गंगा में वज़ू करके नमाज़ पढ़ते थे और सरस्वती को याद कर शहनाई की तान छेड़ते थे. इस्लाम में संगीत के हराम होने के सवाल पर हंसकर कहते थे, ‘क्या हुआ इस्लाम में संगीत की मनाही है, क़ुरान की शुरुआत तो ‘बिस्मिल्लाह’ से ही होती है.’

Subhash-Chandra-Bose-Jawahar-Lal-Nehru-Wiki

क्या नेताजी के ज़िंदा होने की ख़बर नेहरू को घेरने के लिए फैलाई गई थी?

लोगों को यक़ीन दिलाया गया कि नेताजी इसलिए भूमिगत रहे क्योंकि नेहरू ने ब्रिटिश सरकार से गुपचुप समझौता किया था कि अगर नेताजी कभी जीवित मिलते हैं तो उन्हें एक युद्ध अपराधी के रूप में तत्काल ब्रिटेन को सौंप दिया जाएगा.

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सरदार पटेल ने ‘हिंदू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था

मोदी अगर सरदार पटेल को अपना नेता मानते हैं तो फिर उन्हें पटेल की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता पर अमल करते हुए हिंदू राष्ट्र के लिए हथियार उठाने का आह्वान करने वाले सिरफिरे पर कार्रवाई करनी चाहिए.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने अपने अहंकार में लोकतंत्र पर काली छाया डाल दी है: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मोदी सरकार संसद सत्र में पैदा कर रही व्यवधान, आधुनिक भारत का इतिहास बदलने के प्रयास का आरोप लगाया.

सम्राट अशोक का चित्र, बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, चन्द्रगुप्त मौर्या की मूर्ति बिहार

सम्राट अशोक नहीं, चंद्रगुप्त मौर्य महान थे: भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी

लखनऊ साहित्य महोत्सव में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, त्रिवेदी ने आगे कहा, ‘अशोक के तलवार छोड़ने के बाद से ही भारत में विदेशी आक्रमण शुरू हुआ, तो अशोक महान कैसे?’

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.