जस्टिस अरुण मिश्रा

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

पिता जीवित हों या नहीं, संपत्ति में बेटी को भी हिस्सेदार माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के ज़रिये पिता की संपत्ति में बेटी को बराबर का हिस्सा देने का अधिकार दिया गया था. हालांकि इसे लेकर एक विवाद यह था कि यदि पिता का निधन साल 2005 के पहले हो गया है तो यह क़ानून बेटियों पर लागू होगा या नहीं. इसे लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं.

(फोटो: पीटीआई)

अवमानना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण की सफ़ाई स्वीकार करने से मना किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के साल 2009 के अवमानना मामले की वह विस्तृत सुनवाई करेगा. प्रशांत भूषण पर एक अन्य अवमानना मामला चल रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके दो ट्वीट के कारण न्यायपालिका का अपमान हुआ है.

अरुण शौरी, एन. राम और प्रशांत भूषण. (फोटो: द वायर/पीटीआई)

अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका को जस्टिस चंद्रचूड़ और जोसेफ़ की पीठ से हटाया गया

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और कार्यकर्ता एवं वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका के संबंध में अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि इस मामले को जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के सामने क्यों सूचीबद्ध नहीं किया गया?

प्रशांत भूषण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

प्रशांत भूषण अवमानना मामला: वकील बोले- जज की उचित तरह से आलोचना अपराध नहीं अधिकार है

प्रशांत भूषण के ट्वीट्स पर अदालत की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है. भूषण ने अदालत में अपने बचाव में कहा कि उनके ट्वीट न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और इससे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं होती है.

प्रशांत भूषण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

अवमानना मामलाः प्रशांत भूषण का माफ़ी से इनकार, कहा- खेद है कि बयान को ग़लत समझा गया

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा 2009 में तहलका मैगज़ीन को दिए साक्षात्कार में सुप्रीम कोर्ट के जजों के ख़िलाफ़ ग़लत टिप्पणी करने का आरोप है, जिसके लिए शीर्ष अदालत ने उन्हें और पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को माफ़ीनामा जारी करने को कहा था

(फोटो: पीटीआई)

अवमानना नोटिस पर प्रशांत भूषण ने कहा- सीजेआई की आलोचना से शीर्ष अदालत का अपमान नहीं होता

शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ट्वीट्स को लेकर उन्हें अवमानना का नोटिस जारी किया था. भूषण ने इसके जवाब में दिए हलफनामे में कहा कि सीजेआई को सुप्रीम कोर्ट मान लेना और कोर्ट को सीजेआई मान लेना भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संस्था को कमज़ोर करना है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट. (फोटो: पीटीआई)

अगर शीर्ष नेतृत्व बाग़ियों को माफ़ कर देता है तो मैं उनका स्वागत करूंगा: अशोक गहलोत

सचिन पायलट और 18 अन्य कांग्रेस विधायकों की वापसी के सवाल पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह फ़ैसला पार्टी आलाकमान को करना है. अगर आलाकमान उन्हें माफ़ करता है तो वे भी बाग़ियों को गले लगा लेंगे.

अरुण शौरी, एन. राम और प्रशांत भूषण. (फोटो: द वायर/पीटीआई)

अदालत की अवमानना अधिनियम के ख़िलाफ़ एन. राम, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2 (सी) (i) को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने के साथ अस्पष्ट, व्यक्तिपरक और स्पष्ट तौर पर मनमाना है.

जयपुर एयरपोर्ट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: ख़रीद-फ़रोख़्त के ‘दाम’ बढ़ने के आरोप के बाद गहलोत ने कांग्रेस विधायकों को जैसलमेर भेजा

कांग्रेस नेता सचिन पायलट के गुट के विधायक गजेंद्र शक्तावत ने कहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी व्हिप जारी करती है तो वह और अन्य विधायक 14 अगस्त से शुरू होने जा रहे आगामी विधानसभा सत्र में हिस्सा लेंगे.

राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (फोटो साभार: ट्विटर/@RajCMO)

राजस्थान: 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाने के गहलोत सरकार के चौथे प्रस्ताव को राज्यपाल ने मंज़ूरी

राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा विधानसभा सत्र बुलाने की मंज़ूरी दिए जाने के साथ ही राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच एक हफ़्ते से जारी गतिरोध ख़त्म हो गया. सरकार चाहती थी कि 31 जुलाई से सत्र बुलाया जाए, पर 21 दिन का नोटिस देने की मांग करते हुए राज्यपाल ने तीन बार प्रस्ताव वापस लौटा दिया था.

राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (फोटो साभार: ट्विटर/@KalrajMishra)

राजस्थान: विधानसभा सत्र बुलाने के लिए गहलोत सरकार ने राज्यपाल को तीसरी बार भेजा प्रस्ताव

राजस्थान में जारी सियासी खींचतान के बीच 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कैबिनेट ने राज्यपाल को तीसरी बार प्रस्ताव भेजा है. इससे पहले दो बार राजभवन कुछ बिंदुओं के साथ प्रस्ताव सरकार को लौटा चुका है.

प्रशांत भूषण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही आलोचना का गला दबाने की कोशिश: नागरिक कार्यकर्ता

पूर्व जजों, नौकरशाहों, राजनयिकों, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रशांत भूषण लगातार समाज के कमज़ोर वर्गो के अधिकारों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं. उन्होंने अपना जीवन उन सभी को क़ानूनी मदद उपलब्ध कराने में लगा दिया, जो सहजता से न्याय पाने में सक्षम नहीं थे.

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी. (फोटो: ट्विटर)

राजस्थान: विधानसभा स्पीकर ने हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर याचिका वापस ली

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अध्यक्ष को बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही स्थगित करने के आदेश संबंधी हाईकोर्ट के 21 जुलाई के आदेश पर शीर्ष अदालत ने रोक नहीं लगाई, जिसके कारण इस याचिका का अब कोई औचित्य नहीं है.

राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: राज्यपाल ने दूसरी बार ख़ारिज की विधानसभा सत्र बुलाने की मांग

राजस्थान सरकार ने विधानसभा सत्र 31 जुलाई से बुलाने के लिए राज्यपाल के पास शनिवार को संशोधित प्रस्ताव भेजा था. प्रस्ताव को खारिज करते हुए राज्यपाल ने सरकार से कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण विधानसभा सत्र के लिए सभी विधायकों को बुलाना मुश्किल होगा. क्या आप विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 21 दिन का नोटिस देने पर विचार कर सकते हैं?

Lucknow: Bahujan Samaj Party supremo Mayawati addresses a press conference, in Lucknow, Sunday, Sept 16, 2018. (PTI Photo/Nand Kumar)(PTI9_16_2018_000063B)

राजस्थान: बसपा ने छह विधायकों को कांग्रेस के ख़िलाफ़ मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया

साल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में छह विधायक बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे. सितंबर 2019 में उन्होंने कांग्रेस में विलय की अर्जी दी थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया था. अब बसपा का कहना है कि वह एक राष्ट्रीय पार्टी है, जिसका राज्य स्तर पर विलय नहीं हो सकता है.