जस्टिस अरुण मिश्रा

जस्टिस अरुण मिश्रा.

जस्टिस अरुण मिश्रा के न्यायिक परंपराओं की अनदेखी की वजह उनका रूढ़िवादी नज़रिया है

जस्टिस अरुण मिश्रा द्वारा प्रार्थनास्थलों पर सरकार की नीति, अश्लीलता और लैंगिक न्याय को लेकर दिए गए फ़ैसले क़ानूनी पहलुओं से ज़्यादा उनके निजी मूल्यों पर आधारित नज़र आते हैं.

प्रशांत भूषण. (फोटो: ट्विटर)

प्रशांत भूषण ने 1 रुपये का जुर्माना भरा, कहा- इसका मतलब ये नहीं कि फैसला स्वीकार कर लिया

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को न्यायपालिका एवं जजों को लेकर अपने दो ट्वीट के चलते अदालत की अवमानना का दोषी क़रार दिया गया था और एक रुपये जुर्माने की सज़ा दी गई थी.

प्रशांत भूषण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

अवमानना मामला: दो​षसिद्धि के ख़िलाफ़ अपील का अधिकार पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भूषण

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को न्यायपालिका एवं जजों को लेकर अपने दो ट्वीट के चलते अदालत की अवमानना का दोषी क़रार दिया गया था और 31 अगस्त को एक रुपये जुर्माने की सज़ा दी गई थी.

दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास बसी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: रेलवे ट्रैक के किनारे बसी झुग्गियों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की मांग

बीते 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में रेलवे पटरी के किनारे बसी 48 हज़ार झुग्गियों को तीन महीने के अंदर हटाने का आदेश दिया है. 50 से अधिक ग़ैर-सरकारी संगठनों ने एक बयान जारी कर कहा कि इस क़दम का ढाई लाख लोगों के जीवन, आजीविका, गरिमा और अधिकारों पर विनाशकारी परिणाम पड़ेगा.

दिल्ली के आज़ादपुर रेलवे स्टेशन के पास बनी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना के दौर में घर के अंदर रहने की हिदायतों के बीच 48 हज़ार घरों को तोड़ने का अदालती आदेश

बीते 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में रेलवे ट्रैक के किनारे बसी 48 हज़ार झुग्गियों को तीन महीने के अंदर हटाने का आदेश दिया है. अदालत के इस आदेश में कई ज़रूरी पहलुओं पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है, इनमें सबसे महत्वपूर्ण आवास के अधिकार को नज़रअंदाज़ करना है.

जस्टिस अरुण मिश्रा (फोटो: पीटीआई/रॉयटर्स)

जस्टिस अरुण मिश्रा के सुप्रीम कोर्ट के सबसे प्रभावशाली जज बनने की कहानी

भारत के राजनीतिक तौर पर सर्वाधिक संवेदनशील मामलों को अनिवार्य रूप से जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ को ही भेजा जाता था और देश के सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम जज इसकी वजह जानने के लिए इतिहास में पहली बार मीडिया के सामने आए थे.

New Delhi: Activist-lawyer Prashant Bhushan addreses a press conference, after Supreme Court imposed a token fine of one rupee as punishment in a contempt case against him, in New Delhi, Monday, Aug. 31, 2020. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI31-08-2020_000105B)

अदालत की अवमानना का अधिकार क्षेत्र ख़तरनाक, इस व्यवस्था को ख़त्म होना चाहिए: प्रशांत भूषण

बीते दिनों अवमानना के दोषी ठहराए गए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय प्रणाली और कोर्ट के कामकाज से वाक़िफ़ हर नागरिक को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से उसे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताकर अवमानना के रूप में लिया जाता है.

जस्टिस अरुण मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर आ गया है कि जज बार से भयभीत होने लगे हैं: बार एसोसिएशन अध्यक्ष

बुधवार को रिटायर हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा को उनके सहयोगियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विदाई दी गई. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने इस आयोजन में उन्हें बोलने का मौक़ा न दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे ट्रैक के आसपास की क़रीब 48,000 झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने का ये काम तीन महीने के भीतर पूरा कर लिया जाना चाहिए. साथ ही ये निर्देश भी दिया कि झुग्गियां हटाने को लेकर कोई भी अदालत स्टे नहीं लगाएगी.

जनवरी 2018 में चार वरिष्ठ जजों ने सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक से न चलने को लेकर देश के इतिहास में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

भूषण अवमानना मामला: जस्टिस मिश्रा ने 2018 में हुई चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना की

अवमानना की कार्रवाई के दौरान प्रशांत भूषण और उनके वकील ने कहा था कि 2018 में चार जजों द्वारा अदालत और सीजेआई पर सवाल उठाने को लेकर अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं हुई थी. जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने सोमवार को अपने फ़ैसले में लिखा कि वह इस तरह की पहली और आख़िरी प्रेस वार्ता थी.

प्रशांत भूषण. (फोटो: ट्विटर)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए मैं एक रुपये का जुर्माना भर दूंगा: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को 15 सितंबर तक एक रुपये का जुर्माना भरने की सज़ा सुनाई है. जुर्माना न देने पर उन्हें तीन महीने जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

(फोटो: पीटीआई)

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपये का जुर्माना लगाया

ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सज़ा सुनाते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने निर्देश दिया कि 15 सितंबर तक जुर्माना न देने पर उन्हें तीन महीने जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

(फोटो: पीटीआई)

भूषण अवमानना केस: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा, पूछा- माफ़ी मांगने में ग़लत क्या है

दो ट्वीट्स के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा माफ़ी मांगने से इनकार के बाद उनकी सज़ा को लेकर हुई सुनवाई में जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि अगर आप माफ़ी मांगते हैं तो गांधीजी की श्रेणी में आएंगे. ऐसा करने में छोटा महसूस करने जैसा कुछ नहीं है.

प्रशांत भूषण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

भूषण अवमानना केस: सुप्रीम कोर्ट ने 11 साल पुराने मामले को उचित पीठ के पास भेजने को कहा

सुप्रीम कोर्ट पीठ की अगुवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि वे रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पास समय नहीं है, इसलिए मुख्य न्यायाधीश के आदेश के अनुसार इस मामले को 10 सितंबर को उचित पीठ के पास भेजा जाए.

प्रशांत भूषण. (फोटो: द वायर)

अवमानना मामला: प्रशांत भूषण का माफ़ी से फिर इनकार, कहा- ऐसा करना मेरी अंतरात्मा की अवमानना होगी

ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार का समय दिया था. भूषण ने अपने पूरक बयान में कहा है कि यदि वे अपने उन बयानों, जो उनके विचार में सही हैं, को वापस लेंगे या माफ़ी मांगेंगे, तो यह उनकी अंतरात्मा को गवारा नहीं होगा.