जातिगत भेदभाव

हलहलिया के गुरुद्वारे में किशन सिंह और सिख धर्म के अपनाने वाले लोगों के बच्चे. (सभी फोटो: हेमंत कुमार पांडेय)

बिहार: कमाने के लिए पंजाब गए कामगार सिख धर्म क्यों अपना रहे हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: अररिया ज़िले की हलहलिया पंचायत में मुसहर जाति समेत पिछड़े वर्गों के कई कामगार, जो आजीविका कमाने के लिए पंजाब गए थे, उन्होंने सिख धर्म अपना लिया है. उनका कहना है कि वे इस बात से बहुत प्रभावित हुए कि इस धर्म में ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं किया जाता.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

दलितों ने जो अधिकार संघर्ष से हासिल किए थे, आज वो सब खोते जा रहे हैं

बहुत सारे अधिकार संविधान सभा की बहसों से निकले थे, जब भारतीय संविधान बना तो उसमें उन अधिकारों को लिख दिया गया और बहुत सारे अधिकार बाद में दलितों ने अपने संघर्षों-आंदोलनों से हासिल किए थे. हालांकि दलितों का बहुत सारा समय और संघर्ष इसी में चला गया कि राज्य ने उन अधिकारों को ठीक से लागू नहीं किया.

तमिलनाजु में पंचायत के अन्य सदस्यों के साथ जमीन पर बैठीं दलित महिला पंचायत प्रधान आर. राजेश्वरी. (फोटो: @ambedkariteIND)

तमिलनाडु: दलित महिला प्रधान को ज़मीन पर बैठने पर मजबूर किया, आरोपी उप प्रधान फ़रार, दो गिरफ़्तार

मामला तमिलनाडु के कडलूर ज़िले का है. पिछले साल दिसंबर में पंचायत प्रधान चुनी गईं दलित एस. राजेश्वरी कई बैठकों में उसी पंचायत के उप-प्रधान ने ज़मीन पर बैठने को मजबूर किया. आरोप है कि कई अवसरों पर महिला प्रधान को झंडा भी नहीं फ़हराने दिया गया.

डॉ. पायल तड़वी. (फोटो साभारः फेसबुक)

पायल तड़वी आत्महत्या: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी डॉक्टरों को पढ़ाई पूरी करने की अनुमति दी

डॉ. पायल तड़वी की आत्महत्या मामले में आरोपी तीन डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी पढ़ाई पूरी करने की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की थी. अदालत ने कड़ी शर्तों पर उन्हें इसकी अनुमति दी. इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने उनकी याचिका का विरोध किया था.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता के लिए न्याय मांगते हुए भोपाल  में हुआ एक प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: बलात्कार मामलों में न्याय की राह में पहला रोड़ा पुलिस का रवैया है

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव और एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स के एक साझा अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि यूपी में यौन हिंसा पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करवाने के दौरान लगातार पुलिस के हाथों अपमान झेलना पड़ा और एफआईआर भी पहले प्रयास में दर्ज नहीं हुई.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस: यह सिर्फ़ बेटी का मामला नहीं है…

हाथरस में जो हुआ वह जातीय श्रेष्ठता और उसके अधिकार के अहंकार का ही नतीजा है. इसका एक प्रमाण गांव के कथित उच्चजातीय समूह की प्रतिक्रिया है.

(प्रतीकात्मक फोटोः पीटीआई)

एससी एसटी क़ानून के तहत लाया गया राजस्थान पुलिस का सर्कुलर विधिसम्मत क्यों है

राजस्थान पुलिस के सर्कुलर में कहा गया है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अभियुक्त को सीआरपीसी की धारा 41 ए का लाभ दिया जाना अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इसके उद्देश्य को विफल करता है. कई समूहों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

कंगना रनौत को फेमिनिज़्म के बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है

कंगना रनौत का एक साथी महिला कलाकार के काम को नकारते हुए उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास और घर गिराए जाने की तुलना बलात्कार से करना दिखाता है कि फेमिनिज़्म को लेकर उनकी समझ बहुत खोखली है.

डॉ. पायल तड़वी. (फोटो साभारः फेसबुक)

पायल तड़वी आत्महत्या: महाराष्ट्र सरकार ने आरोपियों की पढ़ाई पूरी करने की याचिका का विरोध किया

डॉ. पायल तड़वी की आत्महत्या मामले में आरोपी तीन डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी पढ़ाई पूरी करने की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था. राज्य सरकार ने कहा है कि सुनवाई ख़त्म होने तक उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.

डॉ. कफ़ील ख़ान और प्रशांत कनौजिया. (फोटो साभार: फेसबुक)

बहुजनों और मुस्लिमों के लिए इंसाफ की राह मुश्किल क्यों है

एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार जेलों में बंद दलित, आदिवासी और मुस्लिमों की संख्या देश में उनकी आबादी के अनुपात से अधिक है, साथ ही दोषी क़ैदियों से ज़्यादा संख्या इन वर्गों के विचाराधीन बंदियों की है. सरकार का डॉ. कफ़ील और प्रशांत कनौजिया को बार-बार जेल भेजना ऐसे आंकड़ों की तस्दीक करता है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

अगर मॉडर्न इंडिया ने जातिवाद को नकार दिया है, तो ऊंचे पदों पर दलित क्यों नहीं हैं

बीते रविवार को अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर पर भारत में जाति-व्यवस्था, आरक्षण और भेदभाव को लेकर टिप्पणियां की थीं.

(फोटो साभार: इंडिया रेल इंफो)

ओडिशा: किशोरी के फूल तोड़ने पर 40 दलित परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का आरोप

ढेंकानाल ज़िले के कांतियो कतेनी गांव का मामला. दलित समुदाय का आरोप है कि गांव वालों ने उनसे बात बंद कर दी है, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से राशन नहीं मिल रहा और किराना दुकानों ने सामान देना बंद कर दिया है. वहीं ग्राम प्रधान का कहना है कि दलित समुदाय से सिर्फ़ बात बंद करने को कहा गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

जातिगत भेदभाव को लेकर कब ख़त्म होगा भारतीयों का दोहरापन

भारतीयों के मन में व्याप्त दोहरापन यही है कि वह ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर होने वाली ज़्यादतियों से उद्वेलित दिखते हैं, पर अपने यहां के संस्थानों में आए दिन दलित-आदिवासी या अल्पसंख्यक छात्रों के साथ होने वाली ज़्यादतियों को सहजबोध का हिस्सा मानकर चलते हैं.

Coimbatore: Rescue work being carried out at the site of the wall collapse in Nadur village of Mettupalayam taluk, near Coimbatore, Monday, Dec. 2, 2019. Seventeen people were killed in the incident on Sunday night after the compound wall of three tile roofed houses collapsed on them, reportedly due to rains. (PTI Photo)   (PTI12_2_2019_000107B)

तमिलनाडु: जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए 3,000 दलितों ने इस्लाम अपनाने की बात कही

तमिलनाडु के नादुर गांव में दो दिसंबर को दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई थी. उस दीवार को एक व्यक्ति खुद के घर को दलितों से अलग करने के लिए बनाया था. उसके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं होने से दलित समुदाय के लोगों ने यह फैसला लिया है.