जाति

(फोटो साभार: अरिजीत)

बाबा साहेब के सपनों को साकार करने के लिए जातिवादी व्यवस्था के विरुद्ध मुहिम तेज़ करनी होगी

कोई भी राजनीतिक दल जाति व्यवस्था के अंत का बीड़ा नहीं उठाना चाहता है, न ही कोई सामाजिक आंदोलन इस दिशा में अग्रसर है. बल्कि, जाति आधारित संघों का विस्तार तेज़ी से हो रहा है. यह राष्ट्र एवं समाज के लिए एक घातक संकेत है.

(फोटो: पीटीआई)

बंधुत्व के बिना स्वतंत्रता और समानता हासिल करना असंभव है

जाति एक ऐसी बाधा है जो एक समाज का निर्माण नहीं होने देती. राष्ट्र बनकर भी नहीं बन पाता क्योंकि हम एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी नहीं होते. एकजुटता या बंधुत्व के अभाव में सामाजिक संपदा का निर्माण भी नहीं हो पाता.

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हमारा संविधान: अनुच्छेद-15 भेदभाव के ख़िलाफ़ निषेध

वीडियो: भारत में धर्म, कुल, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. संविधान का अनुच्छेद 15 क्या कहता है? कैसे न्यायालयों ने भेदभाव करने वाले बहुत सारे क़ानूनों को ग़ैर-संविधानिक क़रार दिया.

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दलितों को इंसान समझे जाने का अभी भी इंतज़ार है: यशिका दत्त

वीडियो: हाल ही में यशिका दत्त को उनकी अंग्रेज़ी संस्मरणात्मक किताब ‘कमिंग आउट ऐज़ अ दलित’ के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. यशिका दत्त से दामिनी यादव की बातचीत.

Sant Ravidas Wikipedia

‘जब सभ कर दोउ हाथ पग दोउ नैन दोउ कान, रविदास पृथक कइसे भये हिंदू औ मूसलमान’

संत कवियों की लंबी परंपरा में एक रविदास ही ऐसे हैं जो श्रम को ईश्वर बताकर ऐसे राज्य की कल्पना करते हैं, जो भारतीय संविधान के समता, स्वतंत्रता, न्याय व बंधुत्व पर आधारित अवधारणा के अनुरूप है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुजरात: दलित व्यक्ति की बारात में शामिल लोगों पर पथराव, नौ के ख़िलाफ़ प्राथमिकी

गुजरात के अरवल्ली ज़िले का मामला है. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बारात में शामिल दलित पुरुषों और महिलाओं के परंपरागत साफा पहनने पर आपत्ति जताई थी. राजपूत समुदाय के नौ लोगों के ख़िलाफ़ दंगा, हमला, आपराधिक धमकी देने और एससी/एसटी एक्ट के तहत के तहत मामला दर्ज किया गया है.

दुकानदार नासिर. (फोटो: वीडियोग्रैब)

उत्तर प्रदेश: ‘ठाकुर’ लिखा जूता बेचने पर मुस्लिम विक्रेता गिरफ़्तार, विवाद के बाद रिहा

मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का है. हिंदुत्ववादी संगठन बजरंग दल के संयोजक ने दुकानदार नासिर पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. वहीं, ठाकुर फुटवियर कंपनी के मालिक ने कहा कि यह नाम उनके दादाजी से जुड़ा है. किसी राजनीति के लिए नहीं बदलेंगे.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

क्यों भारतीय जेलें मनु के बनाए जाति नियमों से चल रही हैं

कई राज्यों की जेलों के मैनुअल कारागार के अंदर किए जाने वाले कामों का निर्धारण जाति के आधार पर करने की बात कहते हैं.

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अ सूटेबल बॉय: मुहब्बत और बदलते वक़्त की सुरीली दास्तान

वीडियो: हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई ‘अ सूटेबल बॉय’ छह एपिसोड की एक बीबीसी टेलीविज़न ड्रामा मिनिसीरिज़ है, जिसे मीरा नायर ने डायरेक्ट किया है. ये वेब सीरिज़ इसी नाम से 1993 में आए विक्रम सेठ के उपन्यास पर आधारित है.

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डोम जाति के लिए मरघट बन गया है बिहार, बुनियादी सुविधाओं से हैं कोसों दूर

वीडियो: डोम समुदाय बिहार और देश के सबसे पिछड़े समुदायों में से एक है. पूर्वी चंपारण ज़िले की ढाका विधानसभा के रहने वाले ऐसे ही कुछ लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में मीना कोटवाल ने बात की.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस: यह सिर्फ़ बेटी का मामला नहीं है…

हाथरस में जो हुआ वह जातीय श्रेष्ठता और उसके अधिकार के अहंकार का ही नतीजा है. इसका एक प्रमाण गांव के कथित उच्चजातीय समूह की प्रतिक्रिया है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

कंगना रनौत को फेमिनिज़्म के बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है

कंगना रनौत का एक साथी महिला कलाकार के काम को नकारते हुए उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास और घर गिराए जाने की तुलना बलात्कार से करना दिखाता है कि फेमिनिज़्म को लेकर उनकी समझ बहुत खोखली है.

(फोटो: गूगल मैप)

यूपी: बरेली में युवक का मुंह काला कर चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया

मामला बरेली ज़िले के शाही थाना इलाके के एक गांव का है. कुछ लोगों ने युवक के साथ कथित तौर पर दूसरी जाति की एक लड़की को देख लिया था. पीड़ित की शिकायत पर गांव प्रधान के पति समेत 13 लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

(फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन)

कुठांव: मुस्लिम समाज में जातिवाद को उघाड़ता उपन्यास

अब्दुल बिस्मिल्लाह ने मुस्लिम समाज में मौजूद जातिवाद को कुठांव यानी मर्मस्थल की मानिंद माना है. उनके अनुसार यह एक ऐसा नाज़ुक विषय है अमूमन जिसका अस्तित्व ही अवास्तविक माना जाता है और जिसके बारे में बात करना पूरे मुस्लिम समाज के लिए एक पीड़ादायक विषय है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

अगर मॉडर्न इंडिया ने जातिवाद को नकार दिया है, तो ऊंचे पदों पर दलित क्यों नहीं हैं

बीते रविवार को अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर पर भारत में जाति-व्यवस्था, आरक्षण और भेदभाव को लेकर टिप्पणियां की थीं.