जेएनयू

New Delhi: JNU students during their march from the University campus to Rashtrapati Bhavan to 'save public education', in New Delhi, Monday, Dec. 9, 2019. (PTI Photo/Kamal Singh)  (PTI12_9_2019_000282B)

जेएनयू और डीयू के कुलपति निर्माण के बजाय इन विश्वविद्यालयों की जड़ खोदने में क्यों लगे हैं?

देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय को कुछ हद तक स्वायत्तता प्राप्त है. स्वायत्तता के नाम पर यहां के कुलपतियों को असीमित अधिकार मिल जाते हैं. इन अधिकारों का उपयोग वे विश्वविद्यालयों का निर्माण के बजाय उसे बर्बाद करने में लगे रहते हैं.

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‘जब 250 बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था नहीं हो रही, तब करोड़ों बच्चों के भविष्य का क्या होगा?’

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध के बीच भारतीय जनसंचार संस्थान में भी फीस बढ़ाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है. बीते 10 सालों में दोगुनी से अधिक बढ़ चुकी फीस को कम करने की मांग को लेकर संस्थान के छात्र पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

जेएनयू एक सामूहिक उपलब्धि है

जेएनयू कोई द्वीप नहीं है, वहां हमारे ही समाज से लोग पढ़ने जाते हैं. जो बात उसे विशिष्ट बनाती है, वो है उसके लोकतांत्रिक मूल्य. इनका निर्माण किसी एक व्यक्ति, पार्टी या संगठन ने नहीं, बल्कि भिन्न प्रकृति और विचारधारा के लोगों ने किया है. यदि ऐसा नहीं होता, तब किसी भी सरकार के लिए इसे ख़त्म करना बहुत आसान होता.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University  President Aishe Ghose addresses during a protest march towards Parliament, on the first day of the Winter Session, in New Delhi, Monday, Nov. 18, 2019. The students have been protesting for nearly three weeks against the draft hostel manual, which has provisions for a hostel fee hike, a dress code and curfew timings. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI11_18_2019_000290B)

हमारे घरों के बच्चे जेएनयू आकर ‘देशद्रोही’ क्यों हो जाते हैं?

ऐसा क्यों है कि अलग-अलग जगहों से आने वाले बच्चे यहां आकर लड़ने वाले बच्चे बन जाते हैं? बढ़ी हुई फीस का मसला सिर्फ जेएनयू का नहीं है. घटी हुई आज़ादी का मसला भी सिर्फ जेएनयू का नहीं है.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University students display placards during a protest against the administration's 'anti-students' policy, in New Delhi, Monday, Nov. 11, 2019. Students wanted to march towards the All India Council for Technical Education (AICTE), where Vice President Venkaiah Naidu was addressing the university's convocation at an auditorium. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI11_11_2019_000109B)

जेएनयू पर इसलिए हमला किया जा रहा है ताकि जियो यूनिवर्सिटी के मॉडल को स्थापित किया जा सके

अजीब बात है कि देश के प्रधानमंत्री लगातार पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन 5000 बच्चों को पढ़ाने के लिए देश की सरकार के पास पैसा नहीं है.

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जेएनयू: क्या सस्ती शिक्षा लोगों का अधिकार नहीं है?

वीडियो: दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में बीते तीन हफ्तों से फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है. इस मुद्दे पर द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी, द वायर के पत्रकार अविचल दुबे, आईसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनसाई बालाजी और जेएनयू के छात्र अनिकेत सिंह के साथ चर्चा कर रही हैं.

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जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लोकसभा में गूंजा

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, कांग्रेस सदस्य टीएन प्रतापन और बसपा के कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University students display placards during a protest against the administration's 'anti-students' policy, in New Delhi, Monday, Nov. 11, 2019. Students wanted to march towards the All India Council for Technical Education (AICTE), where Vice President Venkaiah Naidu was addressing the university's convocation at an auditorium. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI11_11_2019_000109B)

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी पर छात्रों के विरोध के बाद केंद्र ने समिति बनाई

मानव संसाधन और विकास मंत्रालय ने फीस वृद्धि पर छात्रों के विरोध को लेकर उनसे और प्रशासन से बात करने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर वीएस चौहान, एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल सहस्त्रबुद्धे और यूजीसी के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन शामिल हैं.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

जेएनयू बराबरी के समाज की सबसे ख़ूबसूरत संभावना है…

ऐसे सामाजिक पारिवारिक परिवेश, जिसमें उच्च शिक्षा की कल्पना डॉक्टरी-इंजीनियरिंग के दायरे से पार नहीं गई और नौकरी से परे शिक्षा को देखना एक तरह से अय्याशी और दूर की कौड़ी समझा जाता था, जेएनयू ने समझाया कि ये एक साज़िश है- समाज के बड़े तबके को बराबरी महसूस न होने देने की.

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न्यू इंडिया में उच्च शिक्षा के बाज़ारीकरण का शिकार बनते जेएनयू जैसे संस्थान

उच्च शिक्षा का निजीकरण ऐसे सभी प्रावधानों को खत्म कर देगा,जिससे उस तक वंचित जमात पहुंच रहा था. अगर इस मुल्क को बचाना है तो पहले उच्च शिक्षा को बाज़ारीकरण से बचाना होगा.

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ सोमवार को जेएनयू छात्रों के विरोध प्रदर्शन का दृश्य. (फोटो: एएनआई)

दिल्ली: भारी विरोध के बाद जेएनयू ने आंशिक तौर पर वापस लिया फीस बढ़ोतरी का फैसला

नए फैसले के अनुसार, सिंगल रूम का किराया 200 रुपये जबकि डबल रूम का किराया 100 रुपये होगा. इसके साथ ही विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सहायता मुहैया कराएगा.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: फीस बढ़ोतरी को लेकर जेएनयू छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी, शिक्षक संघ ने किया समर्थन

फीस वृद्धि, कर्फ्यू के वक्त और ड्रेस कोड जैसी पाबंदियों को वापस लिए जाने की मांग करने वाले छात्रों पर की गई बर्बर पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए जेएनयू शिक्षक संघ ने कुलपति के इस्तीफे की मांग की.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University students try to open the gates during a protest against the administration's 'anti-students' policy, in New Delhi, Monday, Nov. 11, 2019. Students wanted to march towards the All India Council for Technical Education (AICTE), where Vice President Venkaiah Naidu was addressing the university's convocation at an auditorium. (PTI Photo)(PTI11_11_2019_000069B)

दिल्ली: फीस वृद्धि और ड्रेस कोड के विरोध में जेएनयू के छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों की मांग है कि मसौदा छात्रावास मैनुअल को वापस लिया जाए, जिसमें उनके अनुसार फीस वृद्धि, कर्फ्यू का वक्त और ड्रेस कोड जैसी पाबंदियों का प्रावधान है.

जेएनयूएसयू प्रेसिडेंट आईशी घोष (पीले कपड़े में) और उपाध्यक्ष साकेत मून. (बाएं से दाएं.) (फोटो: ट्विटर)

जेएनयू प्रशासन ने छात्र संघ को ऑफिस खाली करने को कहा, जेएनयूएसयू ने किया इनकार

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रशासन का कहना है कि चुनाव में लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन करने की वजह से अब तक यूनियन अधिसूचित नहीं हुई है. वहीं, छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष ने कहा कि 8500 स्टूडेंट्स की यूनियन की आवाज को इस तरह प्रशासन बंद नहीं कर सकता.

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हरियाणा: उमर खालिद पर गोली चलाने वाले शख़्स को शिवसेना ने दिया टिकट

13 अगस्त 2018 को छात्र नेता उमर खालिद पर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के बाहर दो लोगों ने हमला किया था. इनमें से एक नवीन दलाल को शिवसेना ने बहादुरगढ़ विधानसभा सीट से टिकट दिया है.

मोहम्मद दानिश, सतीश चंद्र यादव, साकेत मून और आईशी घोष. (बाएं से दाएं. (फोटो: ट्विटर)

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में चारों पदों पर लेफ्ट यूनिटी के उम्मीदवारों की जीत

वामपंथी छात्र संगठनों एआईएसए, एसएफआई, एआईएसएफ और डीएसएफ के संयुक्त मोर्चे की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आईशी घोष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष चुनी गई हैं. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मनीष जांगिड़ को हराया है. एसएफआई को 13 साल बाद अध्यक्ष पद मिला है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: पीटीआई)

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 सितंबर तक नतीजे घोषित करने पर लगाई रोक

छात्रसंघ चुनाव में काउंसिलर पद के लिए खड़े दो छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने ग़लत तरीके से उनका नामांकन ख़ारिज किया है, जिसके ख़िलाफ़ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: पीटीआई)

रोमिला थापर समेत 12 प्रोफेसर एमेरिटस से बायोडाटा देने को कहा गया है: जेएनयू प्रशासन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसने यह पत्र किसी की सेवा को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च वैधानिक निकाय कार्यकारी परिषद द्वारा समीक्षा करने की जानकारी देने के लिए लिखा है और ऐसा अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों जैसे एमआईटी और प्रिसंटन विश्वविद्यालय में भी होता है.

इतिहासकार रोमिला थापर. (फोटो: द वायर)

गर्व है कि वीसी ने रोमिला थापर को बुलाकर कोरे कागज पर नाम लिख के दिखाने को नहीं कहा

किसी यूनिवर्सिटी के बर्बाद होने का जितना सामाजिक और राजनीतिक समर्थन भारत में मिलता है, उतना कहीं नहीं मिलेगा. हम बगैर गुरुओं के भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं. रोमिला थापर को भारत को विश्व गुरु बनाने के प्रोजेक्ट में सहयोग करना चाहिए. बस इतनी गुज़ारिश है कि सीवी में अंग्रेज़ी थोड़ी हल्की लिखें वरना उन पर संस्कृत की उपेक्षा का इल्ज़ाम लग सकता है.

इतिहासकार रोमिला थापर. (फोटो: द वायर)

जेएनयू ने ‘मूल्यांकन’ के लिए प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर से सीवी मांगा

प्रशासन ने कहा कि रोमिला थापर का सीवी यानी कि उनका शैक्षिक एवं कार्य अनुभव देखने के बाद यह फैसला किया जाएगा कि वह बतौर प्रोफेसर पढ़ाना जारी रखेंगी या नहीं. फिलहाल थापर जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस हैं.

भाजपा सांसद हंसराज हंस. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा सांसद हंसराज बोले- जेएनयू का नाम एमएनयू कर दो, मोदी के नाम पर भी कुछ होना चाहिए

जेएनयू में एबीवीपी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दिल्ली से भाजपा के सांसद हंसराज हंस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लिए काफी कुछ किया है और उनके काम के कारण ही मैंने कहा कि जेएनयू का नाम बदलकर ‘मोदी नरेंद्र यूनिवर्सिटी’ रखा जाना चाहिए.

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 72 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

Delhi

दिल्लीः जेएनयू छात्रा ने कैब ड्राइवर पर लगाया बलात्कार का आरोप

जेएनयू की द्वितीय वर्ष की छात्रा का आरोप है कि उसने दो अगस्त को मंदिर मार्ग थाने से कैब बुक की थी. कैब चालक ने कथित तौर पर उसे कुछ नशीला पदार्थ खिलाया और बलात्कार किया.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

स्वच्छता के नाम पर जेएनयू की ‘बोलती दीवारों’ को चुप कराने का निर्णय कहां तक सही है?

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वच्छता अभियान के तहत कैंपस की दीवारों पर पोस्टर लगाने पर रोक लगा दी है. प्रशासन के इस क़दम से छात्र-छात्राओं में रोष है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: पीटीआई)

जेएनयू शीर्ष शोध संस्थान, इसे बदनाम करने के मंसूबों को सफल नहीं होने देंगे: एचआरडी मंत्री

मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की. वे भाजपा के एसपी सिंह बघेल की टिप्पणी का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने कहा था कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंध्र प्रदेश में जो जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित होने जा रहा है, वो दूसरा जेएनयू न बन पाए.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए जेएनयू वाम राजनीति से कहीं बढ़कर है

जेएनयू की प्रवेश परीक्षा में अब बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जो अंग्रेजी में होंगे. इसका अर्थ हुआ कि हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए एक और राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के दरवाज़े बंद हो गए.

New Delhi: A Muslim woman looks on, near Jama Masjid in New Delhi, Wednesday, Sept 19, 2018. The Union Cabinet approved an ordinance to ban the practice of instant triple talaq. Under the proposed ordinance, giving instant triple talaq will be illegal and void and will attract a jail term of three years for the husband. (PTI Photo/Atul Yadav) (Story No. TAR20) (PTI9_19_2018_000096B)

मुस्लिम औरतों को धर्म के पिंजरे में सुरक्षित रहने की गारंटी कौन दे रहा है?

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इस्लामिक यूथ फेडरेशन ने एक तस्वीर जारी की है, जिसमें औरतों को इस्लाम के पिंजरे में क़ैद पंछी की शक्ल दी गई. बताया गया कि ये पिंजरा ही वो महफ़ूज़ जगह है, जहां औरतें न सिर्फ़ नेकियां कमा सकती हैं बल्कि तमाम ‘ज़हरीली’ विचारधाराओं से बची रह सकती हैं.

पेंटिंग: शबनम गिल

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर की हत्या के दोषियों की उम्रक़ैद की सज़ा बरक़रार

दो बार जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर की 31 मार्च 1997 को बिहार के सीवान शहर में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान हत्या कर दी गई थी.

Najeeb-Ahmed Mother Protest PTI featured

नजीब की मां को सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने की अनुमति

जेएनयू के छात्र नजीब अहमद 2016 से लापता हैं. बीते दिनों सीबीआई ने इस मामले में क्लोज़र रिपोर्ट सौंपी है.

Najeeb-Ahmed Mother Protest PTI

कोर्ट ने जेएनयू छात्र नजीब के लापता होने की क्लोज़र रिपोर्ट उनकी मां को देने के लिए कहा

जेएनयू के एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के प्रथम वर्ष के छात्र नजीब अहमद 15 अक्टूबर 2016 को जेएनयू कैंपस से लापता हो गए थे. तब से उनका कुछ पता नहीं चल सका है.

कन्हैया कुमार (फोटो: पीटीआई )

अपूर्वानंद की मास्टरक्लास: कौन हैं कन्हैया कुमार?

आज की मास्टरक्लास में अपूर्वानंद बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से सीपीआई के उम्मीदवार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर ‘सामना’ अख़बार में छपे एक लेख पर चर्चा कर रहे हैं.

उमर ख़ालिद और कन्हैया कुमार. (फोटो: पीटीआई)

जेएनयू राजद्रोह मामले में पुलिस ने जल्दबाज़ी में आरोप-पत्र दाख़िल किया: दिल्ली सरकार

2016 में दर्ज राजद्रोह के मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, पूर्व छात्र उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य तथा अन्य के ख़िलाफ़ बीते 14 जनवरी को आरोप-पत्र दाख़िल किया था.

Najeeb-Ahmed Mother Protest PTI featured

लापता जेएनयू छात्र नजीब की मां का प्रधानमंत्री से सवाल, अगर आप चौकीदार हैं तो मेरा बेटा कहां है

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्विटर पर अपने नाम के साथ चौकीदार जोड़ने के बाद 2016 में लापता हुए छात्र नजीब अहमद की मां फ़ातिमा नफ़ीस ने उनसे पूछा कि देश की सर्वोच्च एजेंसियां क्यों नजीब को ढूंढने में नाकाम रहीं.

शाह फैसल (फोटो साभार: एएनआई)

जम्मू कश्मीरः पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने बनाई नई पार्टी, शेहला राशिद भी शामिल

पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने कश्मीर में लगातार हो रही हत्याओं और भारतीय मुसलमानों के हाशिये पर होने का आरोप लगाते हुए जनवरी में पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

Ranchi: RSS leader Indresh Kumar addresses a press conference, in Ranchi on Monday, July 23, 2018. (PTI Photo) (PTI7_23_2018_000133B)

2025 के बाद भारत का हिस्सा बन जाएगा पाकिस्तानः आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि आप लिखकर ले लीजिए, पांच-सात साल बाद आप कहीं कराची, लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट में मकान खरीदेंगे और वहां व्यापार करने का भी मौका मिलेगा.

उमर ख़ालिद और कन्हैया कुमार. (फोटो: पीटीआई)

राजद्रोह मामले में कन्हैया और अन्य के ख़िलाफ़ केस चलाने की अभी नहीं मिली मंज़ूरी: दिल्ली पुलिस

अदालत ने पुलिस से कहा कि वह मंज़ूरी हासिल करने के बाद आरोप-पत्र दाख़िल कर सकती थी. इतनी जल्दबाज़ी क्या थी. जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और पूर्व छात्रों उमर ख़ालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य के ख़िलाफ़ देश विरोधी नारे लगाने का आरोप है.

Mumbai: A top angle view of the Mumbai city, Wednesday, Oct 17, 2018. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad) (PTI10_17_2018_000055B)

देश के उच्च जाति के हिंदू सबसे अमीर, कुल संपत्ति के 41% के मालिक: रिपोर्ट

जेएनयू, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी और भारतीय दलित अध्ययन संस्थान द्वारा दो साल तक किए एक अध्ययन में सामने आया है कि देश की कुल संपत्ति का 41 प्रतिशत हिंदू उच्च जातियों और 3.7 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के हिंदुओं के पास है.