तहसीन पूनावाला

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

संचार व्यवस्था पर प्रतिबंध लागू करने संबंधी आदेश पेश करे जम्मू कश्मीर प्रशासन: सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राष्ट्रहित में लिए गए प्रशासनिक फैसलों की अपील पर कोई नहीं बैठ सकता. केवल न्यायालय ही इसे देख सकती है और याचिकाकर्ता इसे नहीं देख सकते.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

जम्मू कश्मीर में पाबंदी पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सरकार के सिर पर बंदूक रखना सही नहीं

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की राज्य में संचार माध्यमों से पाबंदी हटाने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जहां केंद्र ने अदालत से कहा कि राज्य में किसी भी प्रकाशन पर कोई रोक नहीं है.

Srinagar: A security personnel keeps vigil as a family rides on a scooter during restrictions in Srinagar, Thursday, Aug 8, 2019. Restrictions have been imposed in several districts of Jammu and Kashmir as a precautionary measure after the state lost its special status and was bifurcated on Tuesday as Parliament approved a resolution scrapping Article 370 of the Constitution and passed a bill to split the state into two Union Territories. (PTI Photo)(PTI8_9_2019_000020B)

जम्मू कश्मीर के हालात ‘बेहद संवेदनशील’, सरकार को समय मिलना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने संचार सेवाओं के साथ लगे अन्य प्रतिबंधों को हटाने के संबंध में केंद्र सरकार को तत्काल कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया. पीठ ने हालात में सुधार की उम्मीद करते हुए सुनवाई को 2 हफ्ते के लिए टाल दिया है.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने अलवर लिंचिंग मामले में अवमानना याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा

इस घटना के पहले शीर्ष न्यायालय ने कथित गोरक्षा के नाम पर हिंसा से निपटने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे.

Jaipur: Rajasthan Chief Minister Vasundhara Raje and BJP state President Madanlal Saini attend the two days state working committee meeting, in Jaipur on Friday, July 20, 2018. (PTI Photo)(PTI7_20_2018_000235B)

मॉब लिंचिंग: राजस्थान सरकार के ख़िलाफ़ अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी और कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बावजूद देश में पीट-पीटकर हत्या करने की घटनाएं जारी हैं. पहलू ख़ान के बाद राजस्थान के अलवर ज़िले में बीते 21 जुलाई को गो-तस्करी के संदेह में भीड़ ने रकबर ख़ान की पीट-पीटकर हत्या कर दी.

फोटो: द कारवां/पीटीआई

जज लोया मामला: सुनवाई में वकीलों ने बताईं सरकार की रिपोर्ट में विसंगतियां

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा पेश जांच रिपोर्ट में कई विसंगतियां हैं, जिससे जज लोया की मौत पर संदेह किया जा सकता है.

फोटो: द कारवां/पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट में होगी जज लोया की मौत से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि जज लोया की मौत से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में नहीं होगी.

Judge Loya Justice Arun Mishra PTI

क्या जस्टिस अरुण मिश्रा का जज लोया केस छोड़ने का इशारा न्यायपालिका पर उठे सवालों का जवाब है?

जस्टिस अरुण मिश्रा द्वारा जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले मामले की सुनवाई के बाद ‘इसे उपयुक्त बेंच के समक्ष पेश करें’ कहना दिखाता है कि वे अब इस संवेदनशील मामले को नहीं सुनना चाहते.

फोटो: द कारवां/पीटीआई

जज लोया की मौत से जुड़े दस्तावेज़ याचिकाकर्ताओं को सौंपे महाराष्ट्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

राज्य सरकार के वक़ील हरीश साल्वे ने इन दस्तावेज़ों को गोपनीय बताया था, लेकिन अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को मामले के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए.

फोटो: द कारवां/पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा, पेश करें जज लोया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और रिकॉर्ड

सीबीआई की विशेष अदालत के जज बीएच लोया की मौत की जांच की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में 15 जनवरी तक जवाब देने को कहा.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कथित गोरक्षकों की गुंडागर्दी का मामला, छह राज्यों को नोटिस

याचिका में कोर्ट से गोरक्षा दलों पर पाबंदी लगाने और गोरक्षा क़ानून के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक क़रार देने की मांग की गई है.