तीन साल

बीते जून में भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों ने विरोध स्वरूप दूध, फल और सब्जियों की आपूर्ति रोक दी थी और अपने उत्पाद सड़कों पर फेंक दिए थे. (फाइल फोटो: पीटीआई)

फसल अच्छी होने के बावजदू हमारा किसान हताश क्यों है?

शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता है, जब देश के किसी न किसी कोने से किसानों की आत्महत्या की खबरें न आती हों. हार किसानों की नहीं हुई है. ये हार अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं की है, जिन्होंने किसानों को मझधार में छोड़ दिया है.

Modi Clash

बढ़ते सामाजिक टकराव पर प्रधानमंत्री चुप क्यों?

बढ़ती जातीय और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं प्रधानमंत्री मोदी की विकास के उनके घोषित एजेंडे के अनुकूल नहीं रहीं, लिहाजा देश को अपेक्षा थी कि ऐसी घटनाओं पर मोदी सख्ती से पेश आएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

job reuters

ऐतिहासिक रोज़गार संकट से आंखें चुरा रही है मोदी सरकार

विधानसभा चुनावों में विभाजनकारी और भावनात्मक मुद्दों पर भाजपा को मिल रही जीत ने सरकार में यह भाव भरने का काम किया है कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी सब बढ़िया है.

Vinod Dua EP 53

जन गण मन की बात, एपिसोड 53: मोदी सरकार के तीन साल और आईटी क्षेत्र में छंटनी

जन गण मन की बात की 53वीं कड़ी में विनोद दुआ मोदी सरकार के तीन साल और आईटी क्षेत्र में हो रही छंटनी पर चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: पीटीआई

एक छोटी सी नौकरी का तलबगार हूं मैं, उनसे कुछ और जो मांगूं तो गुनहगार हूं मैं…

मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर छिड़ा ट्विटर वॉर, ट्रेंड कर रहा है ‘अच्छे दिन नौकरी बिन’ और तीन साल गोलमाल.