दक्षिणपंथ

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‘गोली मारो’ नारा लगाने में कोई हर्ज नहीं: भाजपा नेता कपिल मिश्रा

वीडियो: बीते साल 23 फरवरी को कपिल मिश्रा ने एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें वह दिल्ली के मौजपुर ट्रैफिक सिग्नल के पास सीएए के समर्थन में जुड़ी भीड़ को संबोधित करते देखे जा सकते हैं. इसके अगले दिन ​राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. द वायर के अजय आशीर्वाद और इस्मत आरा की उनसे बातचीत.

कपिल मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: विवादित भाषण पर कपिल मिश्रा ने कहा- सड़कें बाधित हुईं तो फिर से ऐसा करूंगा

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने यह बयान ‘डेल्ही रॉयट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ नाम की किताब के विमोचन पर दिया. मिश्रा ने कहा कि जब भी सड़कें अवरुद्ध की जाएंगी और लोगों को काम पर या बच्चों को स्कूल जाने से रोका जाएगा तो इसे रोकने के लिए वहां हमेशा कपिल मिश्रा होगा.

(फोटो साभार: गरुड़ प्रकाशन)

‘देल्ही रॉयट्स 2020’ के लेखकों के ब्लूम्सबरी से किताब छपवाने की वजह क्या थी?

वैचारिक दुनिया में साख हासिल करना दक्षिणपंथ की तमन्ना रही है, लेकिन जब तक वह इस बुनियादी बात को नहीं समझ लेता कि साख कमानी पड़ती है, इसे खरीदा नहीं जा सकता- यह कभी भी ज़्यादा दूरी नहीं तय कर पाएगा.

जोसेफ मैकार्थी (बाएं) और स्टालिन. (फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स/रॉयटर्स)

भारत मैकार्थी के समय में है या स्टालिन के काल में?

जोसेफ मैकार्थी और स्टालिन दोनों दुनिया के दो अलग-अलग कोनों में भिन्न समयों और बिल्कुल उलट उद्देश्यों के लिए सक्रिय रहे हैं, लेकिन इनके कृत्यों से आज के भारत की तुलना करना ग़लत नहीं होगा.

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

अगर यह हिंदू राष्ट्र नहीं है तो और क्या है?

उदारवादी बौद्धिक जमात के लिए भारत भले ही अब तक हिंदू राष्ट्र न बना हो, लेकिन गलियों में घूमनेवाले हिंदुत्ववादियों के लिए यह एक हिंदू राष्ट्र है. इसके लक्षण भले छिपे हुए हों, लेकिन इसके समर्थक और पीड़ित, दोनों ही बहुत ही स्पष्ट तरीके से इसका अनुभव कर सकते हैं.

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चार्वाक के वारिस: विचारों को द्रोह माने जाने के काल में द्रोह पर आमादा किताब

यह निबंध-संग्रह ‘एक राष्ट्र, एक जन, एक संस्कृति’ के स्वनामधन्य पैरोकारों की असली-नकली अवधारणाओं और कुतर्कों की बिना पर रचे जा रहे तिलिस्म को वैज्ञानिक चिंतन प्रक्रिया की कसौटी पर कसकर न सिर्फ बेपरदा बल्कि पूरी तरह ख़ारिज भी करता है.

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जो आज दूसरों को ‘एंटी नेशनल’ बता रहे हैं, कभी वे भी ‘देशद्रोही’ हुआ करते थे

एंटी-नेशनल, भारत विरोधी जैसे शब्द आपातकाल के सत्ताधारियों की शब्दावली का हिस्सा थे. आज कोई और सत्ता में है और अपने आलोचकों को देश का दुश्मन बताते हुए इसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.

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हनुमान की नई छवि के मायने

हनुमान की यह छवि रचने वाले कलाकार करण आचार्य का कहना है कि उनके हनुमान शक्तिशाली हैं न कि दमनकारी. लेकिन जो इसे गर्व के साथ जोड़कर देख रहे हैं, वे शायद बिल्कुल ऐसा नहीं सोचते.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: महाराष्ट्र में दलित-मराठा रिश्ता हमेशा से जटिल रहा है

जाति-हिंसा लंबे समय से महाराष्ट्र की संस्कृति का अंग रही है. यहां हिंदुत्ववादी राजनीति का विकास कोई एक दिन मे नहीं हुआ है. इसे कई दशकों तक सक्रिय तरीके से खाद-पानी देने का काम कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने किया.

साभार: राधाकृष्ण प्रकाशन

क्या ‘जूठन’ पाठ्यक्रमों से बाहर कर दी जाएगी?

हिमाचल विश्वविद्यालय में ओम प्रकाश वाल्मीकि की ‘जूठन’ बीते 3 सालों से पढ़ाई जा रही थी, तब भावनाएं अचानक कहां से आहत हो गईं? क्या इसका ताल्लुक़ राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन से है?

छात्रनेता उमर ख़ालिद और गुजरात से निर्दलीय विधायक ​और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी. (फोटो: यूट्यूब/पीटीआई)

भाजपा और संघ हमें निशाना बना रहे हैं: जिग्नेश मेवाणी और उमर ख़ालिद

गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्रनेता उमर ख़ालिद ने भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में भड़काऊ भाषण देने के आरोपों को नकारा.

जिग्नेश मेवाणी. (फोटो: पीटीआई)

ख़ुद को आंबेडकर का भक्त बताने वाले मोदी भीमा-कोरेगांव हिंसा पर चुप क्‍यों हैं: ​मेवाणी

गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर बोला हमला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे कई सवाल.