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‘हमें नए कृषि क़ानून की ज़रूरत नहीं, पहले बुंदेलखंड पैकेज से बनीं मंडियों को शुरू कराए सरकार’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में बुंदेलखंड के सात ज़िलों में किसानों को कृषि बाज़ार मुहैया करवाने के उद्देश्य से 625.33 करोड़ रुपये ख़र्च कर ज़िला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कुल 138 मंडियां बनाई गई थीं. पर आज अधिकतर मंडियों में कोई ख़रीद-बिक्री नहीं होती, परिसरों में जंग लगे ताले लटक रहे हैं और स्थानीय किसान परेशान हैं.

New Delhi: Farmers burn copies of the new farm laws as they celebrate Lohri festival during their ongoing protest against the central government, at Singhu border in New Delhi, Wednesday, Jan. 13, 2021. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI01 13 2021 000275B)

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि क़ानूनों की प्रतियां जलाईं

दिल्ली की विभिन्न ​सीमाओं पर लकड़ियां एकत्र कर जलाई गईं और उसके चारों तरफ घूमते हुए किसानों ने नए कृषि क़ानूनों की प्रतियां जलाईं. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने नारे लगाए, गीत गाए और अपने आंदोलन की जीत की प्रार्थना की. किसान एक महीने से ज्यादा समय से इन क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

कृषि क़ानूनों के विपरीत सुप्रीम कोर्ट कई विवादित क़ानूनों पर रोक लगाने से कर चुका है इनकार

विवादित तीन कृषि क़ानूनों की संवैधानिकता जांचे बिना सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाने के क़दम की आलोचना हो रही है. विशेषज्ञों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का ये काम नहीं है. इससे पहले ऐसे कई केस- जैसे कि आधार, चुनावी बॉन्ड, सीएए को लेकर मांग की गई थी कि इस पर रोक लगे, लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसा करने से मना कर दिया था.

Mumbai: People belonging to Sikh community block traffic at Sion -Panvel highway during the nationwide strike, called by agitating farmers to press for repeal of the Centres agri-laws, in Mumbai, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo/Shashank Parade)(PTI08-12-2020 000175B)

भाजपा नेताओं की तरह सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा- किसान आंदोलन में हुई खालिस्तानी घुसपैठ

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की इस स्वीकारोक्ति से पहले पिछले कुछ महीनों में कई भाजपा नेता किसान आंदोलन में खालिस्तानियों के शामिल होने का आरोप लगा चुके हैं. यहां तक कैबिनेट मंत्री रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और कृषि नरेंद्र तोमर ने भी इस संबंध में माओवादी और टुकड़-टुकड़े गैंग जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

सिंघु बॉर्डर पर किसानों की पेंटिंग बनाता कलाकार. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट की समिति के सदस्य सरकार समर्थक, उसके समक्ष पेश नहीं होंगे: किसान संगठन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए कृषि क़ानूनों पर रोक लगाते हुए किसानों से बात करने के लिए समिति बनाने के निर्णय पर किसान संगठनों ने कहा कि वे इस समिति को मान्यता नहीं देते. जब तक क़ानून वापस नहीं लिए जाते तब तक वे अपना आंदोलन ख़त्म नहीं करेंगे.

द (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि क़ानूनों पर रोक लगाई, किसानों से बातचीत के लिए समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन कृषि क़ानूनों पर केंद्र और किसानों के बीच गतिरोध दूर करने के उद्देश्य से बनाई गई समिति में भाकियू के भूपेंद्र सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घानवत, प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं. इन चारों द्वारा नए कृषि क़ानूनों का समर्थन किया गया है.

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन संभालने में नाकाम केंद्र, कृषि क़ानूनों पर रोक लगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ कई याचिकाओं को सुनते हुए सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि सरकार जिस तरह से मामले को संभाल रही है उससे वे बेहद निराश हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार कहे कि क़ानूनों को लागू करने पर रोक लगाएगी, तो अदालत इसके लिए समिति गठित करने को तैयार है.

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला. (फोटो: पीटीआई)

भूमि अधिग्रहण बिल के बाद कृषि क़ानून प्रधानमंत्री की दूसरी हार का कारण बनेंगे: हन्नान मोल्ला

तीन कृषि क़ानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच अब तक हुई आठ दौर की वार्ता में भी गतिरोध ख़त्म नहीं होने को अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की की व्यक्तिगत असफलता बताया है.

New Delhi: Farmers during their Delhi Chalo protest march against the new farm laws, at Singhu border in New Delhi, Sunday, Dec. 6, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI06-12-2020 000091B)

कृषि क़ानूनों के कथित विरोध में टिकरी बॉर्डर प्रदर्शन स्थल के पास वकील ने आत्महत्या की

दिल्ली स्थित टिकरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन उगराहां के आंदोलन में शामिल 65 वर्षीय मृतक वकील अमरजीत सिंह राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम लिखे पत्र में कहा है कि कृपया कुछ पूंजीपतियों के लिए किसानों, मज़दूरों और आम लोगों की रोटी न छीनें और उन्हें सल्फास खाने के लिए मजबूर न करें.

हनुमान बेनीवाल. (फोटो: पीटीआई)

कृषि क़ानूनों के विरोध में एनडीए से अलग हुई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि तीनों कृषि क़ानून किसान-विरोधी हैं और देश के अन्नदाताओं के सम्मान में उनकी पार्टी ने एनडीए से अलग होने का निर्णय लिया है.

New Delhi: Farmers shout slogans at Singhu border during a protest against the new farm laws, in New Delhi, Friday, Dec. 25, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI25-12-2020 000113B)

जिस मंडी टैक्स की मंत्री और भाजपा नेता आलोचना कर रहे, उसे वित्त मंत्रालय ने ज़रूरी बताया था

विशेष रिपोर्ट: द वायर द्वारा प्राप्त किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने मंडियों में लगने वाले इस तरह के टैक्स को सही ठहराया था और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इसका समर्थन भी किया था. मंत्रालय ने कहा था कि मंडियों में मिलने वाली सेवाओं के लिए ये राशि वसूली जाती है.

Chandigarh: Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar addresses a press conference, in Chandigarh, Thursday, Sept 13, 2018. (PTI Photo)(PTI9_13_2018_000093B)

हरियाणाः सीएम का काफ़िला रोकने के आरोप में 13 किसानों के ख़िलाफ़ दंगा-हत्या के प्रयास का केस दर्ज

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर आगामी नगर निकाय चुनाव के प्रचार के लिए बीते मंगलवार को एक जनसभा करने अंबाला गए थे. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह ने उन्हें काले झंडे दिखाए और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की थी.

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संविधान की कोई बात लागू नहीं हो रही, सरकार की तानाशाही है

वीडियोः कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन पर भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के झंडा सिंह के साथ द वायर के पॉलिटिकल एडिटर अजय आशीर्वाद की बातचीत.

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किसान सरकार और अदालत का भरोसा कैसे करें?

कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक समिति का गठन करने का सुझाव दिया है. इसे लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद का नज़रिया.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addresses the media before commencement of the first day of Parliaments Monsoon Session, amid the ongoing coronavirus pandemic, at Parliament House in New Delhi, Monday, Sept. 14, 2020. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI14-09-2020 000025B)(PTI22-12-2020 000236B)

मोदी सरकार में स्वामीनाथन आयोग की 201 में से सिर्फ़ 25 सिफ़ारिशों को ही लागू किया गया

विशेष रिपोर्टः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसानों की हालत सुधारने के लिए गठित स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशें लागू करने का श्रेय एक बार फ़िर अपनी सरकार को दिया है. हालांकि द वायर द्वारा प्राप्त दस्तावेज़ों से पता चलता है कि मोदी सरकार में सिर्फ़ 25 सिफ़ारिशें ही लागू की गई है, जबकि यूपीए सरकार में 175 सिफ़ारिशें लागू की गई थीं.