दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ

​दौलत राम कॉलेज. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली विश्वविद्यालय की एडहॉक शिक्षक प्रिंसिपल पर जातिगत भेदभाव का आरोप क्यों लगा रही हैं?

दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग में एडहॉक शिक्षक डॉ. ऋतु सिंह ने दावा किया है कि बीते अगस्त महीने में पढ़ाने के लिए उनकी जॉइनिंग हो गई थी, लेकिन जातिगत आधार पर उन्हें पढ़ाने से मना कर दिया गया. वहीं कॉलेज की प्रिंसिपल का कहना है कि अगर ऐसा है तो वे प्रमाण दिखाएं. विवाद के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीयू के कुलपति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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एनजीटी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में 39 मंजिला इमारत के निर्माण पर रोक लगाई

यह प्रोजेक्ट क्षेत्र दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा रक्षा मंत्रालय से अधिग्रहीत की गई 3.05 हेक्टेयर भूमि का हिस्सा था. मेट्रो स्टेशन एक हेक्टेयर भूमि पर बनाया गया था और बाकी एक कंपनी को दिया गया था, जो आवासीय फ्लैट बनाने की योजना बना रही है.

New Delhi: JNU students during their march from the University campus to Rashtrapati Bhavan to 'save public education', in New Delhi, Monday, Dec. 9, 2019. (PTI Photo/Kamal Singh)  (PTI12_9_2019_000282B)

जेएनयू और डीयू के कुलपति अपने विश्वविद्यालयों की जड़ खोदने में क्यों लगे हैं?

देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय को कुछ हद तक स्वायत्तता प्राप्त है. स्वायत्तता के नाम पर यहां के कुलपतियों को असीमित अधिकार मिल जाते हैं. इन अधिकारों का उपयोग कर वे विश्वविद्यालय को बेहतर बनाने के बजाय उसे बर्बाद करने में लगे रहते हैं.

DUTA Protest FB Rajiv Ray

दिल्ली विश्वविद्यालय के अस्थायी शिक्षकों को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?

बीते एक सप्ताह से दिल्ली विश्वविद्यालय के एडहॉक शिक्षक दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेतृत्व में स्थायी नियुक्ति को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. नियुक्ति के अलावा इनकी कई और मांगें हैं, जिनमें वीसी का इस्तीफ़ा भी शामिल है.

साइकिल मार्च निकालकर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के आवास जाते प्रदर्शनकारी छात्र और शिक्षक.

‘छात्रों के लिए हॉस्टल बनवाने के बजाय विश्वविद्यालय की ज़मीन को बिल्डरों को सौंपना ग़लत है’

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व की ज़मीन पर एक निजी बिल्डर द्वारा उनतालीस मंज़िला इमारत का निर्माण शुरू होने के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र हड़ताल पर हैं. उनकी मांग है कि इस ज़मीन पर विश्वविद्यालय का हक़ है और यहां विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल बनना चाहिए.

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन के समर्थन में बीते दिनों प्रदर्शन किया गया. (फोटोः रीतू तोमर)

डीयू: क्या दलित होने की वजह से एक प्रोफेसर को हिंदी का विभागाध्यक्ष नहीं बनाया जा रहा है?

विशेष रिपोर्ट: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद के लिए दो प्रोफेसरों के बीच खींचतान चल रही है. इसकी वजह से विभाग के अध्यक्ष पद की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है.