दिल्ली हिंसा

उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/@MuhammedSalih)

दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में उमर ख़ालिद को ज़मानत

दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिससे पता चले के घटना के दिन उमर ख़ालिद वारदात स्थल पर मौजूद थे. हालांकि जेएनयू के पूर्व छात्र ख़ालिद को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा. उनके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत आपराधिक साज़िश का मुक़दमा भी दर्ज किया गया है.

अपने बच्चों के साथ ख़ालिद. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

‘जेल का वो गुलाब, ज़िंदगी के फ़लसफ़े सिखाते हुए मानो मेरा उस्ताद बन गया है…’

दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ़्तार किए गए ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ के ख़ालिद सैफ़ी का जेल से अपने परिवार को भेजा गया ख़त.

faizan-national-anthem-delhi-police

दिल्ली दंगा: पुलिस का दावा- ‘राष्ट्रगान वीडियो’ वाले युवक की हिरासत के समय थाने का कैमरा खराब था

पिछले साल दिल्ली दंगे के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ पुलिसवाले पांच मुस्लिम युवकों को पीटते हुए उनसे राष्ट्रगान गवा रहे थे. बाद में इसमें से एक शख़्स 23 वर्षीय फ़ैज़ान की मौत हो गई थी. फ़ैज़ान की मां ने पुलिसकर्मियों पर हिरासत में हत्या करने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है.

यति नरसिंहानंद (बाएं) के साथ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह. (दाएं)  बीच में भाजपा के बीएल शर्मा हैं और पीछे सफेद कमीज़ और गमछे में यति का करीबी और 'हिंदू फोर्स' का संस्थापक दीपक सिंह हिंदू.

दिल्ली दंगों से पहले कट्टर हिंदुत्ववादी नेता ने लगातार किया था मुस्लिमों के ‘संहार’ का आह्वान

विशेष: साल 2020 के दिल्ली दंगों को लेकर द वायर की श्रृंखला के दूसरे हिस्से में जानिए कट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद को, जिनके नफ़रत भरे भाषणों ने उन दंगाइयों में कट्टरता पैदा की, जिन्होंने फरवरी 2020 के आखिरी हफ़्ते में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में क़हर बरपाया.

वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा (फोटो साभारः ट्विटर)

दिल्ली: वकील महमूद प्राचा के दफ़्तर में छापेमारी के बाद कोर्ट ने सर्च वारंट पर रोक लगाई

महमूद प्राचा दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों में वकील हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने मंगलवार से पहले दिसंबर 2020 में भी प्राचा के दफ़्तर पर छापेमारी की थी. इस दौरान सर्च टीम ने उनके कंप्यूटर और विभिन्न दस्तावेज़ों को जब्त करने पर जोर दिया, जिनमें केस की विस्तृत जानकारी थी.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: आरोप-पत्र मीडिया में लीक होने पर अदालत ने पुलिस की आलोचना की

दिल्ली दंगों के एक आरोपी के बयान से जुड़े दस्तावेज़ लीक होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर आपके अधिकारी ने इसे लीक किया तो यह अधिकारों का दुरुपयोग है और अगर इसे मीडिया ने कहीं से लिया है तो यह चोरी है. इसलिए किसी भी सूरत में य​ह घटना अपराध है.

WhatsApp Image 2021-03-04 at 22.56.04 (1)

दिल्ली दंगे के साल भर बाद प्रभावित शिव विहार का हाल

वीडियो: एक साल पहले सांप्रदायिक दंगों में उत्तर पूर्वी दिल्ली में जान-माल का काफ़ी नुकसान हुआ था. तब द वायर ने शिव विहार के प्रभावित लोगों से इस विषय पर बात की थी. एक साल बाद उन्हीं लोगों से दोबारा बातचीत कर उनका हाल जाना गया.

WhatsApp Image 2021-03-01 at 21.10.15 (1)

दिल्ली दंगों का एक साल: ख़ौफ़ में जीने को मजबूर शिव विहार के मुसलमान

वीडियो: दिल्ली दंगों के एक साल बाद भी लोग ख़ौफ़ में जी रहे हैं. दंगों में हुए जान-माल के नुकसान की भरपाई हो पाना असंभव है. द वायर ने शिव विहार के लोगों से बातकर उनकी समस्या को जाना.

रागिनी तिवारी, दीपक सिंह हिंदू और अंकित तिवारी.

दिल्ली 2020 की असली साज़िश: जानिए वो, जिसे पुलिस ने अनदेखा किया

विशेष: साल 2020 के दिल्ली दंगों को लेकर द वायर की श्रृंखला के पहले हिस्से में जानिए उन हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं को, जिन्होंने नफ़रत फ़ैलाने, भीड़ जुटाने और फिर हिंसा भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: आरोपी का बयान लीक से संबंधित दिल्ली पुलिस की जांच रिपोर्ट को कोर्ट ने रद्दी काग़ज़ बताया

पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित एक मामले में गिरफ़्तार जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ़ इक़बाल तन्हा ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर जांच के दौरान जांच एजेंसी द्वारा दर्ज उनके बयान को मीडिया में लीक को लेकर पुलिस अधिकारियों पर कदाचार के आरोप लगाए गए हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली दंगा: गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ितों ने कहा- उचित मुआवज़ा नहीं मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली की केजरीवाल सरकार का दावा है कि पिछले साल फरवरी महीने में हुए सांप्रदायिक दंगे के पीड़ितों को उचित मुआवज़ा दिया है, हालांकि कई घायलों का कहना कि उन्हें गंभीर चोटें लगने के बावजूद कम मुआवज़ा दिया गया है.

नई दिल्ली में आयोजि कंसर्न्ड सिटिजन्स कलेक्टिव के  कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण (फोटोः इस्मत आरा)

दिल्ली दंगाः साल भर बाद भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं, कार्यकर्ताओं ने की पुलिस की भूमिका की निंदा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का साल भर बीतने के बाद आज भी पीड़ित इंसाफ के इंतज़ार में हैं और सरकार कार्यकर्ताओं को अपराधी ठहराने के अपने अभियान में लगी हुई है.

WhatsApp Image 2021-02-26 at 23.12.03

दिल्ली हिंसा को कैसे याद करें?

वीडियो: दिल्ली हिंसा ने बहुत कुछ तबाह किया. 53 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और सैकड़ों की तादाद में लोग घायल हुए. दिल्ली हिंसा के एक साल बाद यह बेहद ज़रूरी सवाल है कि उस हिंसा को किस तरह याद किया जाए?

दिल्ली हिंसा के दौरान जाफराबाद में जलता एक वाहन. (फाइल फोटो: पीटीआई)

हिंसा को याद करने का तरीका क्या है

सामूहिक हिंसा एक तरह की नहीं होती. दो समूह लड़ पड़ें, तो वह सामूहिक हिंसा है. एक समूह को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा भी सामूहिक हिंसा ही है. ऐसी हिंसा को भारत में प्रायः दंगा कह देते हैं. दंगा शब्द में कुछ स्वतः स्फूर्तता का भाव आता है, लेकिन यह सच नहीं है.

फरवरी 2020 के दंगों में क्षतिग्रस्त दुकानें. (फाइल फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: पीड़ितों द्वारा कुल दावे की तुलना में 10 फीसदी से भी कम मुआवज़ा मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में प्रभावित मौजपुर, अशोक नगर जैसे इलाकों के 55 पीड़ित दुकानदारों ने क्षतिपूर्ति के लिए कुल 3.71 करोड़ रुपये का दावा किया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसमें से 36.82 लाख रुपये का ही भुगतान किया है. ये दावा की गई कुल राशि का 9.91 फीसदी ही है.