दिहाड़ी मजदूर

लॉकडाउन ख़त्म हो गया, मगर क्या प्रवासी मज़दूर और ग़रीबों की ज़िंदगी में कोई बदलाव आया?

वीडियो: कोरोना वायरस के मद्देनज़र लगाए गए लॉकडाउन के बाद अनलॉक फेज़ शुरू हो गया है, लेकिन कई दैनिक वेतनभोगी अभी भी लॉकडाउन की स्थिति में जी रहे हैं. लॉकडॉउन के दौरान हुए वित्तीय नुकसान से नहीं उबर पा रहे हैं.

2019 में जितने लोगों ने आत्महत्या की, उनमें से लगभग एक चौथाई दिहाड़ी मज़दूर थे: एनसीआरबी

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में कुल 139,123 लोगों ने आत्महत्या की है, जिसमें दिहाड़ी मज़दूरों की संख्या लगभग एक चौथाई यानी 32,563 है. इसके बाद गृहिणियों द्वारा आत्महत्या के सर्वाधिक मामले आए हैं. 2019 में 14,019 बेरोज़गारों ने आत्महत्या की थी, जो 2018 की तुलना में 8.37 प्रतिशत अधिक है.

हरियाणा: पा​र्क बनाने के लिए झुग्गी बस्ती को उजाड़ा, दिहाड़ी मज़दूर बेघर

वीडियो: गुड़गांव के एक स्लम कॉलोनी को पार्क बनाने के लिए उजाड़ दिया गया. इससे यहां रहने वाले क़रीब 100 बेघर लोग बीते 21 अगस्त से गुड़गांव नगर निगम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं.

कोविड-19 के चलते 60 फ़ीसदी लोगों की आजीविका पूरी तरह या गंभीर रूप से प्रभावित हुई: सर्वे

एनजीओ ‘वर्ल्ड विज़न एशिया पैसिफ़िक’ द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन की सबसे अधिक मार दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ी और इसके चलते छिनी आजीविका ग्रामीण और शहरी ग़रीबों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई.

लॉकडाउन: दिल्ली में फंसे प्रवासी रिक्शा चालकों के सामने आजीविका का संकट

देश की राजधानी दिल्ली में दूसरे राज्यों से आए तमाम रिक्शा चालक लॉकडाउन के कारण फंस गए हैं, जिनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.

कोरोना वायरस: दिल्ली में यमुना किनारे रह रहे सैकड़ों दिहाड़ी मज़दूर और बेघर लोगों को शिफ्ट किया गया

पिछले करीब एक हफ्ते से बड़ी संख्या में दिहाड़ी मज़दूर और बेघर लोग यमुना के किनारे रह रहे थे. इसे लेकर काफी हंगामा मचा कि सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है. इसकी वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का ख़तरा बढ़ सकता है.

बिहारः अस्पताल ने एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई, परिवार को कंधों पर शव ले जाना पड़ा

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने शव ले जाने के लिए पीड़िता के परिवार से कथित तौर पर 3,000 रुपये मांगें, जिसके बाद परिवार को चार किलोमीटर तक शव को कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ा.