देशद्रोही

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हरियाणा: उमर खालिद पर गोली चलाने वाले शख़्स को शिवसेना ने दिया टिकट

13 अगस्त 2018 को छात्र नेता उमर खालिद पर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के बाहर दो लोगों ने हमला किया था. इनमें से एक नवीन दलाल को शिवसेना ने बहादुरगढ़ विधानसभा सीट से टिकट दिया है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

आज़ादी के 72 साल: क्या 2002 के पहले तिरंगा भारतीय राष्ट्र का राष्ट्रध्वज नहीं था या फिर आरएसएस खुद अपनी आज की कसौटी पर कहें तो देशभक्त नहीं था?

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‘एंटी-नेशनल’ का तमगा बांटने वाले समूह को आरएसएस की मीडिया इकाई ने दिया पत्रकारिता सम्मान

आरएसएस से संबद्ध इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र ने सोशल मीडिया समूह ‘क्लीन द नेशन’ को सोशल मीडिया नारद पत्रकारिता अवॉर्ड से सम्मानित किया है.

Mumbai: Students wave the Indian tricolor flag while celebrating the 71st Independence Day in Mumbai on Tuesday. PTI Photo by Santosh Hirlekar(PTI8_15_2017_000183B)

भारत जैसे देश में सिर्फ़ संविधान की सीमाओं में रहकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

आज़ादी के इतिहास को देखने पर यह पता चलता है कि तत्कालीन नेताओं ने आज़ादी को प्राप्त करने हेतु अपने-अपने मार्गों पर चलने का कार्य किया परंतु एक मार्ग पर चलने वाले ने दूसरे मार्ग पर चलने वाले नेताओं को कभी भी राष्ट्रद्रोही नहीं कहा.

Raja Ram Yadav Purvanchal Uni VC featured

अब तो कुलपति भी क़त्ल के लिए उकसाने लगे!

कुलपतियों के कारनामे अब देश के विश्वविद्यालयों का मौसम बन गए हैं. विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा और गुणवत्ता दोनों पर दाग लग रहे हैं. बड़बोलेपन में राजनीतिक नेताओं को भी मात करने वाले कुलपतियों के ही कारण देश के कई बड़े और श्रेष्ठ उच्च शिक्षण संस्थान इन दिनों बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं.

Demonstrators from the Jat community sit on top of a truck as they block the Delhi-Haryana national highway during a protest at Sampla village in Haryana, India, February 22, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

अब पराया लगता है यह देश

हम देश के एक छोटे से क़स्बे में पले-बढ़े लेकिन उस दौर में लोगों का दिलो-दिमाग राजनीति ने इतना छोटा नहीं था, जबकि देश का विभाजन हुए बहुत अरसा भी नहीं बीता था. नफ़रत की ऐसी आग नहीं लगी हुई थी, जैसी आज लगी है.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University (JNU) student Umar Khalid speaks to the media moments after he was shot at, during an event at the Constitution Club in New Delhi on Monday, Aug 13, 2018. Khalid escaped unhurt. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI8_13_2018_000097B)

उमर ख़ालिद पर हमले के कथित आरोपी हिरासत में

दरवेश शाहपुर और नवीन दलाल नाम के दो युवकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर जेएनयू के छात्रनेता पर हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University (JNU) student Umar Khalid speaks to the media moments after he was shot at, during an event at the Constitution Club in New Delhi on Monday, Aug 13, 2018. Khalid escaped unhurt. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI8_13_2018_000097B)

दो साल में मुझे बार-बार देशद्रोही बोला गया, मुझ पर हमला उसी का नतीजा है: उमर ख़ालिद

बीते 13 अगस्त को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब आॅफ इंडिया के बाहर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता उमर ख़ालिद पर एक अज्ञात व्यक्ति ने गोली चला दी थी.

Photographers and video cameramen gather outside the special court in Mumbai May 18, 2007. The court on Friday commenced sentencing against the 100 people found guilty of involvement in the 1993 bombings in Mumbai which killed 257 people. REUTERS/Punit Paranjpe  (INDIA)

ये चुप्पी मीडिया नहीं, ‘पपी मीडिया’ है, जो सरकार के फेंके गए टुकड़ों पर पल रहा है

हिंदू-मुसलमान का एक्शन, ‘हिंदू खतरे में है’ का नाच, जेएनयू पर डायलॉग, संसद का सास-बहू, लव जिहाद का धोखा… पूरा देश समाचारों में एकता कपूर के सीरियल देख रहा है, वहीं भुखमरी, किसान आत्महत्या, बलात्कार, बेरोज़गारी, निर्माण और उत्पादकता का विनाश, महिला और दलित उत्पीड़न के बारे में नज़र आती है तो केवल… चुप्पी.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

फोटो: रॉयटर्स

क्या संघ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के ख़िलाफ़ था?

भारत छोड़ो आंदोलन के बाद ब्रिटिश सरकार ने खुशी व्यक्त करते हुए लिखा कि संघ ने पूरी ईमानदारी से ख़ुद को क़ानून के दायरे में रखा, ख़ासतौर पर अगस्त, 1942 में भड़की अशांति में वो शामिल नहीं हुआ.