दोहरी मूल्य नीति

कोविड-19 रोधी टीकों की ख़रीद पर स्पष्टता नहीं, उचित दिशानिर्देश जारी करें सरकार: निजी अस्पताल

देश के विभिन्न निजी अस्पतालों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित की गई नई नीति के तहत कोविड-19 रोधी टीकों की ख़रीद को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. इसकी वजह से उनके केंद्रों पर टीकाकरण स्थगित करना पड़ा है. इन अस्पतालों ने टीकों की ख़रीद के लिए एक उचित तंत्र और एकल खिड़की प्रणाली स्थापित किए जाने की मांग की है.

देश के बड़े अनौपचारिक कार्यबल को कोविड-19 टीकाकरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए

एक अनुमान के अनुसार लगभग 70% शहरी कार्यबल अनौपचारिक रूप से कार्यरत हैं. अनौपचारिक श्रमिकों के काम की अनिश्चित प्रकृति पहले ही जोखिम भरी होती है, जिससे उनके कोविड-19 के संपर्क में आने का ख़तरा बढ़ जाता है. मौजूदा टीकाकरण ढांचे में कई बाधाओं के चलते ऐसे कामगारों के टीकाकरण की संभावना कम है.

केंद्र को कोविड टीकाकरण के लिए समान मूल्य निर्धारण की नीति अपनानी चाहिए

एकाधिक मूल्य निर्धारण, यानी केंद्र के लिए एक मूल्य और निजी अस्पतालों के लिए अलग मूल्य – किसी भी तर्क के विपरीत है. राष्ट्रीय आपातकाल के समय में ऐसा करना निर्माताओं को अधिक लाभ अर्जित करने की अनुमति देना है और सौदे पर बातचीत करने वाले दोनों पक्षों की ओर से संदिग्ध उद्देश्यों की बू आती है.

नरेंद्र मोदी का ये दावा कि राज्यों ने ख़ुद कोविड टीके खरीदने की मांग की थी, ग़लत है

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सात जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण नीति में बदलाव की घोषणा की और पुरानी नीति के लिए राज्यों को ज़िम्मेदार ठहरा दिया. हालांकि ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल बताती है कि दो मुख्यमंत्रियों के बयानों को छोड़ दें, तो किसी भी राज्य ने ख़ुद वैक्सीन खरीदने की मांग नहीं की थी.

विपक्ष ने कहा- दबाव और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने केंद्र को टीकाकरण नीति बदलने पर मजबूर किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सोमवार को घोषणा की कि 18 वर्ष से 44 साल उम्र तक के लोगों के टीकाकरण के लिए 21 जून से राज्यों को कोविड-19 का टीका मुफ्त दिया जाएगा और आगामी दिनों में देश में टीका आपूर्ति में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी.

टीकाकरण नीति पर अदालत के सवालों के बाद केंद्र ने 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण निशुल्क किया

सोमवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि 21 जून से राज्यों को 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के लिए मुफ़्त कोविड टीका मिलेगा. बीते हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा इसी आयु वर्ग के टीकों के लिए राज्यों व निजी अस्पतालों को लोगों से शुल्क वसूलने की अनुमति देने को लेकर सवाल उठाए थे.

केंद्र को वैक्सीन खरीद नीति पर जस्टिस चंद्रचूड़ के सवालों का जवाब देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट को इस बात की विस्तृत जांच करनी चाहिए कि कैसे नवंबर से लेकर मार्च तक घरेलू उत्पादकों को पर्याप्त ऑर्डर या क्षमता विस्तार के लिए पूंजीगत मदद न दिए जाने के कारण गंवा दिए गए. अदालत को इस संबंध में एसआईआई और भारत बायोटेक से संबंधित ब्यौरा मांगना चाहिए, जिससे यह पता लग सके कि पिछले साल दिसंबर से अब तक उनके और पीएमओ के बीच क्या बातचीत हुई.

कोविड-19: केरल विधानसभा ने सभी राज्यों को नि:शुल्क टीके उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव पारित किया

केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि महामारी से लड़ने के लिए हमें सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण प्रदान करने की ज़रूरत है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि समाज के सभी वर्ग वायरस से सुरक्षित हैं. केंद्र सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकती और सब कुछ राज्यों पर नहीं छोड़ सकती. उसे समयबद्ध तरीके से टीकाकरण सुनिश्चित करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की कोविड टीकाकरण नीति को मनमाना क़रार दिया, समीक्षा के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दो चरणों में संबंधित समूहों (45 वर्ष से अधिक उम्र) को टीके की मुफ़्त खुराक दी गई और अब राज्यों एवं निजी अस्पतालों को 18-44 साल आयु वर्ग के लोगों से शुल्क वसूलने की अनुमति दी गई है. अदालत ने यह भी जानना चाहा कि टीकाकरण के लिए निर्धारित 35,000 करोड़ रुपये अब तक कैसे ख़र्च किए गए हैं और इसका उपयोग 18 से 44 साल के लोगों के टीकाकरण पर क्यों नहीं किया जा सकता.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

टीकाकरण पर केंद्र की दोहरी मूल्य नीति पर कोर्ट की फटकार, कहा- राज्यों को अधर में नहीं छोड़ सकते

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि महामारी की पल-पल बदलती स्थिति से निपटने के लिए वे अपनी नीतियों में लचीनापन रखें. साथ ही अदालत ने केंद्र के टीकाकरण के लिए ‘कोविन’ पर पंजीयन अनिवार्य करने को लेकर कहा कि बार-बार डिजिटल इंडिया का नाम लिया जाता है पर ग्रामीण इलाकों में हालात अलग हैं.