धर्म

2307 Gondi.00_38_40_09.Still094

धर्म के आधार पर नागरिकता क़ानून बनाना जायज़ नहीं

वीडियो: पिछले कुछ समय से विपक्ष की आवाज़ को संसद और संसद से बाहर दबाने की कोशिश हो रही है. नागरिकता संशोधन क़ानून विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने वालों को जेल में डाला जा रहा है. उन्हें दिल्ली दंगों में फंसाया जा रहा है. इन मुद्दों पर पूर्व उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

झारखंड के गुमला जिले के डुमरी ब्लॉक गांव में बने एक अंग्रेजी-कुरुख स्कूल के छात्र. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था आदिवासियों को उनका अस्तित्व बचा पाने के रास्ते क्यों नहीं दिखा पाती

आधुनिक शिक्षा का पूरा ढांचा वर्चस्ववादी संस्कृति और मानसिकता से खड़ा किया गया है, जिसमें आदिवासी समाज कहीं फिट नहीं बैठता. उसकी पूरी जीवन शैली, जीवन दर्शन और दुनिया अलग है, जिसे वर्चस्ववादी नज़रिये से नहीं समझा जा सकता.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड महामारी के साथ नस्लवाद और भेदभाव में भी इज़ाफ़ा हुआ है: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

धर्म या आस्था के आधार पर हिंसा का शिकार होने को लेकर 22 अगस्त को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भेदभाव और अन्य संबंधित घृणा अपराधों को समाप्त किया जाना चाहिए.

Tribal painting, though popular among most tribes in MP, is extremely well honed as an art among the Gond tribe of Mandala

क्या आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार उनकी ही संस्कृति के लिए ख़तरा है

विश्व आदिवासी दिवस: मूल निवासियों की पहचान उनकी अपनी विशेष भाषा और संस्कृति से होती है, लेकिन बीते कुछ समय से ये चलन-सा बनता नज़र आया है कि आदिवासी क्षेत्र के लोग मुख्यधारा की शिक्षा मिलते ही अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को हेय दृष्टि से देखने लगते हैं.

बीरभूम में हूल उत्सव में आदिवासी समाज के लोग. (फाइल फोटो: पीटीआई)

विश्व आदिवासी दिवस: ये आदिवासियों के लिए ख़ुद से सवाल पूछने का समय है

किसी भी संगठित धर्म में गया आदिवासी अपनी मूल पहचान बचाए रखने के नाम पर प्रकृति से जुड़े उत्सवों में हिस्सा लेकर इस भ्रम में रहता है कि वह ज़मीन से जुड़ा हुआ है. लेकिन क्या वह कभी ये महसूस करता है कि अपनी संस्कृति, भाषा आदि को लेकर उसका नज़रिया कैसे कथित मुख्यधारा के नज़रिये जैसा हो जाता है?

प्रेमचंद. (जन्म: 31 जुलाई 1880 – अवसान: 08 अक्टूबर 1936) (फोटो साभार: रेख्ता डॉट ओआरजी)

प्रेमचंद के विचारों को उनके जन्म के सौ साल बाद याद करने की ज़रूरत क्यों है…

विशेष: प्रेमचंद अगर आज के हालात, ख़ासकर तथाकथित संस्कृति बचाने वालों को देखते, तो शायद अवसाद में चले जाते. उन्हें संस्कृति राजनीतिक स्वार्थ-सिद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाला महज़ साधन लगती थी और उनके अनुसार यही तथाकथित संस्कृति, सांप्रदायिकता को भी स्वार्थ पूरे करने के अवसर देती थी.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने के लिए याचिका दायर

1976 में भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे. अब दो वकीलों ने इन्हें हटाने की मांग करते हुए कहा है कि यह संशोधन भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय-वस्तु के विपरीत था.

2007 amu.00_23_51_06.Still004

एएमयू हिजाब विवाद: ‘मैं हिंदू छात्रा हूं मुझे धर्म नहीं जेंडर के आधार पर भेदभाव महसूस होता है’

वीडियो: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक बार फिर सोशल मीडिया पर शुरू हुए हिजाब विवाद के बाद से सुर्खियों में है. आखिर क्या है पूरा मामला और लड़कियां क्यों उठा रहीं हैं हॉस्टल के नियमों पर सवाल.

(फोटो: रॉयटर्स)

आज के परिवेश में गुरु की भूमिका क्या है

बचपन से ही सुनते आए हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा के समाप्त हो जाने से ही शिक्षा व्यवस्था में सारी गड़बड़ी पैदा हुई है. लेकिन इस परंपरा की याद किसके लिए मधुर है और किसके लिए नहीं, इस सवाल पर विचार तो करना ही होगा.

AKI 8 July 2020.00_19_51_08.Still002

क्यों ज़रूरी है इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनना

वीडियो: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बनने वाले पहले कृष्ण मंदिर की नींव को कुछ मजहबी गुटों ने ढहा दिया. इमरान ख़ान सरकार ने भी मुस्लिम कट्टरपंथियों के फतवे के आगे घुटने टेकते हुए मंदिर के निर्माण पर रोक लगा दी थी. इस मुद्दे पर पाकिस्तान के कराची में वरिष्ठ पत्रकार वीनगस से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

Minara masjid wears a deserted look on the first day of the holy fasting month of Ramzan, amid unprecedented circumstances due to the coronavirus pandemic and a nationwide lockdown, in Mumbai. PTI

कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मलप्पुरम ने एक नई राह दिखाई है

आज जब पूरे देश में धार्मिक स्थलों को खोला जा रहा है, तब बीते दिनों ‘सांप्रदायिक’ होने का इल्ज़ाम झेलने वाले केरल के मलप्पुरम ज़िले ने अपनी अलग राह चुनी है. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र वहां की पांच हज़ार मस्जिदों को अनिश्चितकाल तक बंद रखने समेत कई धार्मिक स्थलों को न खोलने का फ़ैसला लिया गया है.

(फोटो साभार: लिंक्डइन)

कोरोना वायरस जाति-धर्म नहीं देखता, इससे निपटने के लिए एकता और भाईचारा ज़रूरी: नरेंद्र मोदी

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई के दौरान कुछ लोग जान-बूझकर धर्मनिरपेक्षता-सांप्रदायिकता की बातें उठा रहे हैं. भारत एकजुट है और हम सब एक हैं. सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करती है.

Demonstrators attend a protest march against the National Register of Citizens (NRC) and a new citizenship law, in Kolkata, December 19, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

गृह मंत्रालय ने संसद में दी सफाई, देशव्यापी एनआरसी लाने पर अभी कोई फैसला नहीं

देश के कई स्थानों पर संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में यह सफाई दी है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Defence Minister Rajnath Singh during the BJP parliamentary party meeting, in New Delhi, Tuesday, July 9, 2019. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI7_9_2019_000001B)

एनआरसी बन रहा है, इसमें क्या आपत्ति है: राजनाथ सिंह

कर्नाटक के मंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी पर मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या हर देश को यह नहीं पता होना चाहिए कि उसकी ज़मीन पर कितने नागरिक रहते हैं और कितने विदेशी रहते हैं?

Hyderabad: Muslims under the banner  of United Muslim Action Committee during their protest rally against CAA(Citizen Amendment Act)  in Darussalam, Hyderabad, Saturday, Dec,21,2019.(PTI Photo)(PTI12_21_2019_000241B)

जस्टिस चेलामेश्वर सहित आठ हस्तियों ने संविधान के कामकाज का आत्म-विश्लेषण करने की अपील की

भारतीय संविधान के 70 साल पूरे होने के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाली हस्तियों ने रविवार को एक पत्र जारी कर स्पष्ट सवाल किया कि क्या ‘संविधान सिर्फ प्रशासन चलाने की नियमावली है?