नक्सलवाद

Bhupesh Baghel

जोगी के जाने से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मज़बूत हुई, वे भाजपा के लिए काम करते थे: भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी, 15 साल के भाजपा शासन और राज्य की विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को लेकर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भूपेश बघेल से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

(फोटो साभार: ट्विटर)

सुकमा मुठभेड़: छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में छह अगस्त को हुई मुठभेड़ में पुलिस के 15 नक्सलियों को मारने के दावे पर स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा था कि नक्सलियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या की गई है. मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

छत्तीसगढ़: सुकमा मुठभेड़ पर सवाल, नक्सलियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि मुठभेड़ के वक्त मौके पर कोई माओवादी नहीं था बल्कि बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को देखकर ग्रामीण भागने और छिपने की कोशिश कर रहे थे जिन पर बिना कुछ कहे और बताए गोलियां बरसा दी गईं. मरने वालों में 6 नाबालिगों के होने का भी दावा है.

Bhupesh Baghel

अजीत जोगी के जाने से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मज़बूत हुई, वे भाजपा के लिए काम करते थे: भूपेश बघेल

वीडियो: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

बस्तर के आम युवाओं को नक्सलियों से लड़ाने के लिए सरकार ने तैयार की ‘बस्तरिया ब्रिगेड’

सीआरपीएफ बस्तर जिले में नक्सलियों के खिलाफ आम आदिवासियों की एक बटालियन तैनात करने जा रही है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ब्रिगेड में स्थानीय युवाओं को शामिल करने से सूचना-तंत्र मजबूत होगा और नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में वे काफी कारगर साबित होंगे.

(फोटो: रॉयटर्स)

नोटबंदी आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला, जी​डीपी को 2.25 लाख करोड़ का नुकसान: विपक्ष

जीडीपी ​तीन साल के सबसे निचले स्तर पर, निर्माण क्षेत्र ​की वृद्धि दर 10.7 से 1.2 पर पहुंची, सरकार पर विपक्ष हमलावर.

A group of Indian tribes sit in open at a camp in Dornapal in the central state of Chhattisgarh, India March 8, 2006. More than 45,000 people have left their homes to live in camps run by the Salwa Judum, but have just bows and arrows to defend themselves against the rebels' guns and explosives.  Picture taken March 8, 2006.  REUTERS/Kamal Kishore

आदिवासियों के लिए इस आज़ादी का क्या मतलब है?

आदिवासी तो दुनिया बनने से लेकर आज़ाद ही हैं. बस्तर के इन जंगलों में तो अंग्रेेज़ भी नहीं आए. इसलिए इन आदिवासियों ने अपनी ज़िंदगी में न ग़ुलामी देखी है, न ग़ुलामी के बारे में सुना है.

The Union Home Minister, Shri Rajnath Singh paying tributes to the martyred CRPF personnel, in Raipur, Chhattisgarh on April 25, 2017.
The Chief Minister of Chhattisgarh, Dr. Raman Singh and the Minister of State for Home Affairs, Shri Hansraj Gangaram Ahir are also seen.

माओवादियों की 50 साल की हिंसक राजनीति से क्या हासिल हुआ?

बस्तर में चलने वाले नक्सल राज की खूनी कहानी हर गांव में आपको सुनने को मिलेगी. बंदूक और हिंसा की राजनीति का नतीजा यह हुआ है कि शांतिपूर्ण जीवन के आदी आदिवासियों का जीवन बिखर चुका है.

आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी (फोटो: पीटीआई)

रमन सरकार ने कोर्ट से कहा, याचिकाएं ख़ारिज कर हिमांशु कुमार व सोनी सोरी को दंडित करें

सोनी सोनी को जेल में प्रताड़ित करने और 2009 में एक क़त्लेआम के ख़िलाफ़ दोनों कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका.

Soni Sori

बस्तर के आईने में भारतीय लोकतंत्र का चेहरा बेहद डरावना नज़र आता है

क्या बस्तर में भी भारतीय संविधान लागू है? क्या माओवाद से लड़ाई के नाम पर ग्रामीणों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर, महिलाओं के बलात्कार, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले और जेल आदि सब जायज़ हैं, जबकि माओवाद तो ख़त्म होने की जगह बढ़ रहा है?