नक्सली

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छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा के एक गांव में पुलिस कैंप लगाने के ख़िलाफ़ उतरे ग्रामीण

दंतेवाड़ा ज़िले के पोटाली गांव में खोले जा रहे नए पुलिस कैंप को लेकर नाराज़ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे गांव वालों को फ़र्ज़ी मामलों में फंसाने के प्रकरण बढ़ेंगे. वहीं पुलिस के अनुसार ग्रामीण नक्सली दबाव में कैंप का विरोध कर रहे हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और बेला भाटिया. (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियोग्रैब)

छत्तीसगढ़ पुलिस ने आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी और बेला भाटिया के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया

छत्तीसगढ़ पुलिस ने एफआईआर में सोनी सोरी और बेला भाटिया को चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान अवैध रूप से रैली निकालने और प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करने का आरोपी बनाया है. बेला भाटिया ने पुलिस पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.

समाजवादी पार्टी के नेता संतोष पुनेम. (फोटो साभार: फेसबुक)

छत्तीसगढ़ः बीजापुर में समाजवादी पार्टी के नेता की अपहरण के बाद हत्या

पुलिस ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने समाजवादी पार्टी के नेता संतोष पुनेम को मंगलवार शाम को अगवा कर लिया गया था, बुधवार को उनका शव बरामद किया गया.

रूपेश कुमार सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार: क्या पुलिस ने फ़र्ज़ी मामला बनाकर पत्रकार रूपेश को गिरफ़्तार किया?

बीते ​छह जून को बिहार की गया पुलिस ने तीन नक्सलियों को जिलेटिन स्टिक और इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर के साथ गिरफ़्तार करने का दावा किया था.

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छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला को नक्सली बताकर जेल भेजने की सैन्य बलों की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

वीडियो: आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कांकेर ज़िले के ताड़ावायली गांव में एक आदिवासी महिला को नक्सली बताकर पुलिस ने उनके पति और दो साल की बेटी के साथ गिरफ़्तार कर लिया है.

नीला उइके और उनके पति लालसु उइके.

छत्तीसगढ़: आदिवासी महिला को नक्सली बताकर जेल भेजने की सैन्य बलों की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कांकेर ज़िले के ताड़ावायली गांव में एक आदिवासी महिला को नक्सली बताकर पुलिस ने उनके पति और दो साल की बेटी के साथ गिरफ़्तार कर लिया है.

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क्या गढ़चिरौली में सुरक्षा बल पर हुआ हमला नक्सलियों की बदले की कार्रवाई थी?

ग्राउंड रिपोर्टः महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 1 मई को हुए हमले से कुछ दिन पहले सुरक्षाकर्मियों ने दो ‘निहत्थी’ महिला नक्सलियों को मार गिराया था. पुलिस का कहना है कि उनकी मौत का बदला लेने के लिए ही इनमें से एक के पति ने इस हमले की योजना बनाई.

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नक्सली हमलों से 15 गुना अधिक हार्ट अटैक, डिप्रेशन, डेंगू से सीआरपीएफ जवानों की मौत

यह आंकड़ा सभी 11 नक्सल प्रभावित राज्यों का है. साल 2016 से जुलाई 2018 तक हार्ट अटैक, मलेरिया-डेंगू, आत्महत्या और अन्य गैर नक्सली कारणों से 1294 सीआरपीएफ जवानों की मौत हुई है.

(फोटो साभार: एएनआई)

ओडिशा: कंधमाल ज़िले में नक्सलियों ने महिला चुनाव अधिकारी की गोली मारकर हत्या की

पुलिस के अनुसार, माओवादियों ने ओडिशा के कंधमाल ज़िले के लोगों से मतदान का बहिष्कार करने को कहा था. ज़िले के फिरिंगिया पुलिस थाना इलाके के एक अन्य गांव में माओवादियों ने चुनाव अधिकारियों को मतदान केंद्र ले जा रहे वाहन में आग लगा दी.

(फोटो: रॉयटर्स)

क्यों निर्दोष नागरिकों को सालों-साल क़ैद में रखना चुनावी मुद्दा बनना चाहिए

बड़ी संख्या में नागरिकों, विशेष रूप से हाशिये के समुदायों से आने वालों को बेक़सूर होने के बावजूद एक लंबा समय जेल में बिताना पड़ा है. फिर भी कोई प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे को उठाना नहीं चाहता.

(फोटो साभार: ट्विटर)

सुकमा मुठभेड़: छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में छह अगस्त को हुई मुठभेड़ में पुलिस के 15 नक्सलियों को मारने के दावे पर स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा था कि नक्सलियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या की गई है. मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

छत्तीसगढ़: सुकमा मुठभेड़ पर सवाल, नक्सलियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि मुठभेड़ के वक्त मौके पर कोई माओवादी नहीं था बल्कि बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को देखकर ग्रामीण भागने और छिपने की कोशिश कर रहे थे जिन पर बिना कुछ कहे और बताए गोलियां बरसा दी गईं. मरने वालों में 6 नाबालिगों के होने का भी दावा है.

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गढ़चिरौली: गांववालों का आरोप, लापता बच्चों को माओवादी बताने के लिए पुलिस करा रही जबरन दस्तख़त

ग्राउंड रिपोर्ट: गट्टेपल्ली के पास अप्रैल के आखिरी हफ्ते में हुए कथित नक्सल एनकाउंटर के बाद गांव के लापता बच्चों में से एक के पिता ने कहा, ‘पुलिस हमारे बच्चों की हत्याओं को जायज़ ठहराने के लिए हमारा ही इस्तेमाल कर रही है.’

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पत्थलगड़ी आंदोलन से भाजपा सरकारें क्यों डरी हुई हैं?

पत्थलगड़ी आंदोलन के रूप में जनता द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी इस्तेमाल ने कई ऐसे सवाल उठाए हैं, जिनका जवाब देना सरकारों के लिए मुश्किल हो गया है.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

क्या गढ़चिरौली ‘एनकाउंटर’ में नक्सलियों के साथ आम लोग भी मारे गए हैं?

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) द्वारा कथित रूप से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गढ़चिरौली की इंद्रावती नदी में ‘एनकाउंटर’ के बाद मिले 40 शवों में से केवल 22 शव इस समूह के लोगों के हैं.