निगरानी

Chinese President Xi Jinping (R) guides Indian Prime Minister Narendra Modi to a meeting room in Xian, Shaanxi province, China, May 14, 2015.  REUTERS/Kim Kyung-Hoon

भारत के बड़े नेताओं, जजों, रक्षा अधिकारियों, क़ारोबारियों पर नज़र रख रही है चीनी कंपनी: रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन की झेन्‍हुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड द्वारा भारत के प्रभावशाली नेताओं जैसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत कई क़ारोबारी समूहों के अधिकारियों पर भी नज़र रखी जा रही है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

आरोग्य सेतु ऐप के प्रचार में सरकार ने साढ़े तीन महीने में ख़र्च किए 4.15 करोड़ रुपये

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा अप्रैल में लाया गया आरोग्य सेतु ऐप शुरुआत से ही नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा और इसकी उपयोगिता को लेकर विवादों में घिरा हुआ है.

Homeless people sit inside a corridor of a locked shelter during a 21-day nationwide lockdown to slow the spreading of the coronavirus disease (COVID-19) at Howrah, on the outskirts of Kolkata, India, April 3, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

कोरोना वायरस महामारी ने समाज की बीमारियों को उघाड़कर रख दिया है

जिस तरह कोरोना वायरस इंसान की देह में घुसकर वहां पहले से मौजूद बीमारियों के असर को बढ़ा देता है, ठीक उसी तरह इसने अलग-अलग देशों और समाजों में पहुंचकर उनकी दुर्बलताओं को उजागर किया है.

जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा. (फोटो: पीटीआई)

आरोग्य सेतु ऐप के उपयोग को अनिवार्य बनाना गैरकानूनी: जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा

निजी डेटा सुरक्षा विधेयक का पहला मसौदा लेकर आने वाली समिति के अध्यक्ष जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा ने कहा कि आरोग्य सेतु के उपयोग को अनिवार्य बनाने के लिए जारी दिशानिर्देशों को पर्याप्त कानूनी समर्थन नहीं माना जा सकता है.

(फोटो साभार: फेसबुक/MyGovIndia)

आरोग्य सेतु को लेकर नए दिशानिर्देश जारी, डेटा से छेड़छाड़ पर जेल का प्रावधान

12 मई से शुरू हो रही विशेष राजधानी ट्रेनों के यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप को अनिवार्य कर दिया गया है. केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों के बाद ऐप का डेटा इकट्ठा होने के ठीक 180 दिन बाद डिलीट हो जाएगा.

(फोटो साभार: ट्विटर)

क्या नागरिकों की सुरक्षा और निजता को आरोग्य सेतु ऐप दांव पर लगा रहा है?

सरकार का दावा कि इस ऐप के जरिये कुछ विशेष दूरी तक के ही संक्रमण की जानकारी मिल सकती है. हालांकि एक फांसीसी हैकर ने पीएमओ और रक्षा मंत्रालय जैसे हाईप्रोफाइल जगहों का डेटा सार्वजनिक करते हुए सिद्ध किया है कि इस ऐप के जरिये देश के कोने-कोने की जानकारी मिल सकती है.

(फोटो: पीटीआई)

आरोग्‍य सेतु ऐप डाउनलोड न करना माना जाएगा दंडनीय अपराध: नोएडा पुलिस

नोएडा पुलिस ने सार्वजनिक स्‍थानों पर जाने वाले लोगों के लिए मास्‍क पहनना और स्‍मार्टफोन में आरोग्‍य सेतु ऐप इंस्‍टॉल करना अनिवार्य किया है. इसके अलावा पुलिस ने सार्वजनिक स्‍थलों पर थूकने पर भी पाबंदी लगाई है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

आरोग्य सेतु ऐप निजता में सेंध लगाने वाली अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है: राहुल गांधी

राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आरोग्य सेतु ऐप शक्तिशाली सहयोगी है जो लोगों की सुरक्षा करता है. इसमें डाटा सुरक्षा की ठोस व्यवस्था है.

(फोटो साभार: फेसबुक/MyGovIndia)

केंद्र ने अपने कर्मचारियों से कहा, आरोग्य सेतु डाउनलोड करें, ख़तरा न होने पर ही काम पर जाएं

केंद्र सरकार के आदेश में कहा गया है कि आरोग्य सेतु ऐप पर अपने आसपास की स्थिति की समीक्षा करने और ऐप में ‘सुरक्षित’ या ‘कम जोख़िम’ के संकेत मिलने पर ही कार्यालय जाएं.

(फोटो साभार: फेसबुक/MyGovIndia)

आरोग्य सेतु ऐप पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम बताया है. हालांकि ऐप की क्षमताओं को लेकर विशेषज्ञों की राय सरकार के दावों के उलट है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

उपग्रह से निगरानी के बावजूद जंगल में आग लगने की घटनाओं में तीन गुना की बढ़ोतरी: सरकार

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान जंगल में आग लगने की घटनाओं में सर्वाधिक बढ़ोतरी ओडिशा और आंध्र प्रदेश में हुई है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मणिपुर में भी जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं.

निहालसिंह राठौड़. (फोटो: द वायर)

वॉट्सऐप जासूसी मामला: कौन हैं वे सामाजिक कार्यकर्ता और वकील, जिनके फोन पर रखी गई थी नज़र

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं के वकील निहालसिंह राठौड़ ने बताया कि पेगासस सॉफ्टवेयर पर काम करने वाली सिटिजन लैब के शोधकर्ता ने उनसे संपर्क कर डिजिटल ख़तरे को लेकर चेताया था. मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया और डीपी चौहान ने भी दावा किया है कि उनकी भी जासूसी की गई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

जासूसी मामले पर आईटी मंत्रालय ने वॉट्सऐप से चार नवंबर तक मांगा जवाब

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार को जासूसी करते हुए पकड़ा गया है. कांग्रेस ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से खुद संज्ञान लेने और केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने का अनुरोध किया.

(फोटो: रॉयटर्स)

वॉट्सऐप में सेंध लगाने वाला पेगासस स्पाइवेयर क्या है, कैसे करता है काम?

फेसबुक के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप ने कहा है कि भारत में आम चुनाव के दौरान पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर निगरानी के लिए इजरायल के स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग किया गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

वॉट्सऐप का खुलासा, आम चुनाव के दौरान हुई थी भारतीय पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की जासूसी

वॉट्सऐप द्वारा भारत में कम से कम दो दर्जन शिक्षाविदों, वकीलों, दलित कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से संपर्क कर उन्हें सचेत किया गया कि मई 2019 तक दो सप्ताह की अवधि के लिए उनके फोन एक अत्याधुनिक इजरायली सॉफ्टवेयर की निगरानी में थे.