निजामुद्दीन मरकज

(फाइल फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात: कोर्ट ने कहा- बरी किए गए 35 विदेशी नागरिकों के ज़ब्त पासपोर्ट जारी करे दिल्ली पुलिस

दिल्ली की एक अदालत ने देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र जारी सरकारी दिशानिर्देशों का कथित तौर पर पालन नहीं करते हुए तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आरोपों का सामना कर रहे 36 विदेशी नागरिकों को पिछले साल दिसंबर में बरी कर दिया था.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, क्या किसानों के आंदोलन से तबलीग़ी जमात जैसी ‘दिक्कत’ पेश आएगी

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के मद्देनज़र कृषि क़ानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या प्रदर्शनकारियों को कोविड-19 से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात: दिल्ली की अदालत ने 36 विदेशियों को सभी आरोपों से बरी किया

दिल्ली पुलिस ने तबलीग़ी जमात के सदस्यों के ख़िलाफ़ वीज़ा शर्तों के उल्लंघन, धार्मिक प्रचार गतिविधियों में शामिल होने समेत कई आरोपों को लेकर चार्जशीट दायर की थी. हालांकि कोर्ट ने ठोस सबूत नहीं मिलने पर सभी को बरी कर दिया.

नई दिल्ली का निज़ामुद्दीन मरकज इलाका. (फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात: अदालत ने विदेशियों को बरी किए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ 44 याचिकाएं खारिज़ की

पुलिस ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर कर अनुरोध किया था कि जिन अपराधों में 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया था, उनमें आरोप तय किए जाएं. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तबलीग़ी जमात के नौ विदेशी सदस्यों के भारत की यात्रा करने पर 10 साल के प्रतिबंध के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को अमान्य कर दिया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

तबलीग़ी जमात केस: अदालत ने कहा, बोलने की आज़ादी के अधिकार का सर्वाधिक दुरुपयोग हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कोरोना महामारी की शुरुआत के समय तबलीग़ी जमात के आयोजन को लेकर मीडिया का एक वर्ग मुस्लिमों के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक वैमनस्य फैला रहा था. मीडिया का बचाव करते हुए केंद्र की ओर से कहा गया है कि याचिकाकर्ता बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलना चाहते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली: तबलीग़ी जमात के 8 विदेशी सदस्य आरोपमुक्त, अदालत ने कहा- मरकज़ में होने के सबूत नहीं

दिल्ली पुलिस ने वीज़ा शर्तों के कथित उल्लंघन, धार्मिक प्रचार गतिविधियों में शामिल होने समेत कई आरोपों में क़रीब 955 विदेशियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें से 44 ने दिल्ली में केस लड़ा. साकेत अदालत ने इनमें से आठ को बरी किया और बाकी 36 पर से कई आरोप हटा दिए हैं.

New Delhi: Members of the Tablighi Jamaat show victory sign as they leave in a bus from LNJP hospital for the quarantine centre during the nationwide lockdown, in wake of the coronavirus pandemic, in New Delhi, Tuesday, April 21, 2020.

संभावना है कि तबलीग़ी जमात के विदेशी सदस्यों को बलि का बकरा बनाया गया: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने तबलीग़ी जमात के 29 विदेशी सदस्यों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर रद्द करते हुए कहा कि दिल्ली में जमात के कार्यक्रम में शामिल होने आए विदेशियों के ख़िलाफ़ मीडिया में दुष्प्रचार किया गया और ऐसी छवि बनाने की कोशिश की गई कि ये ही भारत में कोविड-19 फ़ैलाने के ज़िम्मेदार थे.

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तमिलनाडु: तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशी नागरिक डिटेंशन कैंप में रहने को मजबूर

वीडियो: तमिलनाडु सरकार ने मार्च महीने में तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीकी देशों के कुल 129 विदेशी नागरिकों को एक केंद्रीय जेल में रखा है. उनके परिजनों के अनुसार, उनके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार हो रहा है, वहीं वकीलों का मानना है कि यह कार्रवाई ग़ैरक़ानूनी है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात के विदेशी सदस्यों को मुक़दमा पूरा होने तक उनके देश नहीं भेजा जा सकता: केंद्र

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से 2,679 विदेशी नागरिकों का वीज़ा निरस्त करने और उन्हें तबलीग़ी जमात की गतिविधियों में शामिल होने के चलते प्रतिबंधित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को ख़ारिज करने की मांग की है.

पुझल सेंट्रल जेल. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

तमिलनाडु: कोविड-19 के दौर में ‘डिटेंशन कैंप’ में रहने को मजबूर हैं 129 विदेशी नागरिक

तमिलनाडु सरकार ने मार्च महीने में तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीकी देशों के कुल 129 विदेशी नागरिकों को एक केंद्रीय जेल में रखा है. उनके परिजनों के अनुसार उनके साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है, वहीं वकीलों का मानना है कि यह कार्रवाई ग़ैरक़ानूनी है.

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने तबलीगी जमात के 83 लोगों के खिलाफ दायर की चार्जशीट, इसमें 57 विदेशी हैं

इन लोगों को कथित रूप से कोरोना वायरस फैलाने के आरोप में सहारनपुर में छह अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया था.

Narela Quarantine Centre

निज़ामुद्दीन मरकज़ से क्वारंटीन किए गए लोगों का आरोप, समयसीमा पूरी होने पर भी नहीं छोड़ रही सरकार

निज़ामुद्दीन मरकज़ में कोरोना संक्रमण मिलने के बाद तबलीग़ी जमात के क़रीब हज़ार लोगों को नरेला के एक सेंटर में क्वारंटीन किया गया था. देश के विभिन्न हिस्सों आए इन लोगों का कहना है कि अधिकतर लोगों की कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव होने और क्वारंटीन की तय अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें घर नहीं जाने दिया जा रहा है.

नई दिल्ली का निज़ामुद्दीन मरकज इलाका. (फोटो: पीटीआई)

कोविड-19 संक्रमण की आपराधिक जवाबदेही तबलीग़ी जमात के माथे ही क्यों है?

डब्ल्यूएचओ कहता है कि नागरिकों का स्वास्थ्य सरकारों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है. लेकिन भारत सरकार के यात्राओं पर प्रतिबंध, हवाई अड्डों पर सबकी स्क्रीनिंग के निर्णय में हुई देरी पर बात नहीं हुई, न ही कोविड जांच की बेहद कम दर की बात उठी. जमात ने ग़लती की है पर क्या सरकारों को कभी उनकी नाकामियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा?

झारखंड स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता (फोटो: @TeamBanna फेसबुक से)

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण तबलीग़ी जमात के कारण फैला

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार पर राज्य को आवश्यक मदद करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को बताना होगा कि आख़िर तबलीग़ी जमात के सैकड़ों लोग दुनिया भर से दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में कैसे पहुंचे?

Bihar Sharif Corona Story

क्या नीतीश कुमार के गृह जनपद में मुसलमान सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं?

कोरोना संकट के दौरान गहराती सांप्रदायिकता का नया उदाहरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा के बिहार शरीफ में देखने को मिला है, जहां मुस्लिम रहवासियों का आरोप है कि हिंदू दुकानदारों द्वारा उन्हें सामान नहीं दिया जा रहा और उनका सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है.