निषाद पार्टी

पीस पार्टी के प्रमुख डॉ. अयूब. (फोटो साभार: फेसबुक)

उत्तर प्रदेश: पीस पार्टी क्यों अलग-थलग पड़ गई है

गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा को साथ लाने का दावा करने वाली पीस पार्टी शिवपाल यादव की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने 17 लोकसभा सीटों अपने प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन किसी भी सीट पर सफलता तो दूर वह ठीक-ठाक प्रदर्शन करने के प्रति भी आश्वस्त नहीं है.

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नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद भाजपा ने गोरखपुर से रवि किशन को टिकट क्यों दिया?

विशेष रिपोर्ट: गोरखपुर में भाजपा आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही है. प्रत्याशी चयन में एक महीना लगना और इस दौरान दर्जन भर नेताओं का नाम आना व ख़ारिज होना इसका उदाहरण है. आखिर में ऐसे प्रत्याशी को ‘आयात’ करना पड़ा, जिसे लेकर पार्टी और समर्थकों में उत्साह नहीं दिख रहा है.

अभिनेता रवि किशन और गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद. (फोटो साभार: फेसबुक)

भाजपा ने रवि किशन को गोरखपुर से, प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से प्रत्याशी बनाया

संत कबीर नगर से सांसद शरद त्रिपाठी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है. त्रिपाठी पिछले महीने संत कबीर नगर में एक बैठक के दौरान ज़िले की मेंहदावल सीट से भाजपा विधायक राकेश बघेल को जूते से पीटने के बाद चर्चा में आए थे.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

क्या योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट से ‘योग्य उम्मीदवार’ नहीं ढूंढ पा रही है भाजपा?

विशेष रिपोर्ट: पिछले उपचुनाव में गोरखपुर से मिली हार के चलते पूरे देश में भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट अब पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे अधिक चिंता की सीट बन गई है.

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द वायर बुलेटिन: केरल की वायनाड सीट से राहुल गांधी ने​ नामांकन दाख़िल किया

लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर सीट पर भाजपा को हराने वाले सांसद प्रवीण निषाद के भाजपा में शामिल होने समेत आज की बड़ी ख़बरें. दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

New Delhi: Bharatiya Janata Party leader and Union Minister JP Nadda greets Nishad Party leader and Gorakhpur (UP) MP Praveen Nishad after he joined BJP, in New Delhi, Thursday, April 04, 2019. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI4_4_2019_000037B)

लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर सीट पर भाजपा को हराने वाले सांसद प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल

एक समाचार चैनल ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद ने लोकसभा चुनाव में काला धन ख़र्च करने की बात स्वीकार की और इस चुनाव में भी काले धन के इस्तेमाल से उन्हें कोई ऐतराज़ नहीं था.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद. (फोटो साभार: पीटीआई/फेसबुक)

निषाद पार्टी का सपा से गठबंधन क्यों टूटा

सबसे बड़ा सवाल यह है कि निषाद पार्टी से सपा का गठबंधन टूटने से पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? भाजपा से निषाद पार्टी का गठजोड़ न तो निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को पसंद आ रहा है और न भाजपाइयों को.

बीते शुक्रवार को लखनऊ में निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. (फोटो साभार: एएनआई)

निषाद पार्टी ने सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का साथ छोड़ा, पार्टी प्रमुख योगी आदित्यनाथ से मिले

समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर से राम भुवाल निषाद को बनाया अपना प्रत्याशी. निषाद पार्टी के मीडिया प्रमुख के मुताबिक, समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश की महराजगंज लोकसभा सीट को लेकर मतभेद था.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 संजय निषाद, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 संजय चौहान एवं राष्ट्रीय समानता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मोतीलाल कुशवाहा.

लोकसभा चुनाव के सपा-बसपा गठबंधन में निषाद पार्टी समेत तीन अन्य दल शामिल

लोकसभा चुनाव राउंडअप: राहुल गांधी ने सूरतगढ़ में एक सभा में कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव दो विचारधाराओं की लड़ाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो हिंदुस्तान बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें एक हिंदुस्तान अमीरों का और दूसरा गरीबों का होगा.

डॉ. संजय निषाद. (फोटो साभार: फेसबुक/निषाद पार्टी)

कौन हैं संजय निषाद, जिनकी निषाद पार्टी ने योगी को उनके गढ़ में मात दी

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: गोरक्षपीठ को निषादों का बताने वाले संजय उन चंद लोगों में हैं, जो गोरखपुर में रहते हुए हिंदू युवा वाहिनी को दंगा करने वाला, मुसलमानों, दलितों, अति पिछड़ों और निषादों पर अत्याचार करने वाला ‘संगठित गिरोह’ बताते रहे हैं.

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‘चाणक्य नीति’ जैसा कुछ नहीं, सब मीडिया मैनेजमेंट है

जहां भाजपा सफल हो जाती है, वहां ये कथित ‘चाणक्य नीति’ का ढोल पीटते हैं, जहां विफल हो जाते हैं तो कहते हैं कि अति-आत्मविश्वास हमें ले डूबा.

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गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा की हार पर हैरत नहीं होनी चाहिए

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: मार्च 2017 के बाद यूपी की राजनीति में नए बदलाव की जो धीमी आवाज़ें उठ रही थीं, उसे सुना नहीं गया. ये आवाज़ें इस चुनाव में बहुत मुखर थीं लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया. अब जब उसने अपना असर दिखा दिया, तो सभी हैरान हैं.

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क्यों गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है?

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: लगातार जीत से अति-आत्मविश्वास की शिकार भाजपा के लिए यह उपचुनाव आसान नहीं रह गया है. दोनों उपचुनाव शुरू से ही पार्टी के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं क्योंकि यहां के प्रतिकूल परिणाम उसे बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं.