नीतीश कुमार

बिहार में कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. (फोटो साभार: ट्विटर/@airnewsalerts)

बिहार में बाढ़ से करीब 32 लोगों की मौत, 18 लाख लोग प्रभावित

बिहार की पांच नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और 10 ज़िलों में स्थिति गंभीर है. सबसे ज़्यादा सीतामढ़ी ज़िला प्रभावित हुआ है. यहां करीब 11 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन में 60 लोगों की मौत.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी: सरकार

राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि बिहार में 2018 में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 33 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि 2019 में दो जुलाई तक 162 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

बिहार में डॉक्टरों के 57 फीसदी और नर्सों के 71 फीसदी पद खाली

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाख़िल कर ये जानकारी दी. हाल ही में चमकी बुखार के कारण राज्य में 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

A relative sits next to a child patient who is suffering from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur (Photo: Reuters)

‘सरकार ईमानदारी से काम करे, तो अगले साल इंसेफलाइटिस से एक भी बच्चे की जान नहीं जाएगी’

साक्षात्कार: बिहार में इस साल अब तक एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते मुज़फ़्फ़रपुर व उसके आसपास के ज़िलों में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. यह बीमारी 1995 में सामने आई थी, तब से हर साल बच्चों की मौत हो रही है, कभी कम तो कभी ज़्यादा. इस बीमारी के तमाम पहलुओं को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर में साढ़े तीन दशक से काम कर रहे प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण शाह से उमेश कुमार राय की बातचीत.

Relatives visit child patients who suffer from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur, in the eastern state of Bihar, India, June 20, 2019. Picture taken on June 20, 2019. REUTERS/Alasdair Pal

बिहार में बच्चों की मौत के लिए प्रशासनिक विफलता व राज्य की उपेक्षा ज़िम्मेदार: डॉक्टरों की टीम

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 150 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. अकेले मुज़फ़्फ़रपुर में तकरीबन 132 बच्चे इस बीमारी से मारे जा चुके हैं.

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नीतीश सरकार ने चमकी बुखार पर शोध, जागरूकता, पुनर्वास के लिए कोई फंड नहीं मांगा

चमकी बुखार या एईएस से बिहार में अब तक क़रीब 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. एईएस से निपटने के लिए बिहार सरकार की लापरवाही का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2019-20 के तहत इस पर शोध, पीड़ितों का पुनर्वास और लोगों को जागरूक करने के लिए किसी फंड की मांग नहीं की.

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मीडिया बोल: मुज़फ़्फ़रपुर की मौतें, सत्ता की बेफ़िक्री और मीडिया का मिजाज़

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में चमकी बुखार से हो रही बच्चों की मौतों पर सरकार की बेफ़िक्री और मेनस्ट्रीम मीडिया की स्तरहीन पत्रकारिता पर जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. विकास बाजपेयी और वरिष्ठ पत्रकार बिराज स्वैन से चर्चा कर रहें हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश.

बिहार के हरिवंशपुर गांव में गिरफ्तार किए गए लोगों के रिश्तेदार. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: चमकी बुखार से बच्चों की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 39 लोगों पर केस दर्ज

बीते 18 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुज़फ्फ़रपुर दौरे पर जाने के दौरान हरिवंशपुर गांव के लोगों ने चमकी बुखार से बच्चों की मौत और पानी की कमी को लेकर सड़क का घेराव किया था, जिसके चलते पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. नामजदों में क़रीब आधे दर्जन वे लोग हैं जिनके बच्चों की मौत चमकी बुखार से हुई है.

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

चमकी बुखार: अगर नीतीश सरकार ने समय रहते तैयारी की होती, तो बच्चों की जानें बच सकती थीं

ग्राउंड रिपोर्ट: मुज़फ़्फ़रपुर और आस-पास के जिलों में चमकी बुखार का प्रकोप अप्रैल से शुरू होता है और जून के महीने तक मानसून आने तक बना रहता है. इस लिहाज़ से लोगों को जागरूक करने के लिए और अन्य आवश्यक तैयारियां जनवरी माह से शुरू हो जानी चाहिए थीं लेकिन गांवों में जाने पर जागरूकता अभियान के कोई चिह्न दिखाई नहीं देते.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

चमकी बुखार से प्रभावित करीब 75 फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं: रिपोर्ट

बिहार सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में ये जानकारी सामने आई है. राज्य में एईएस या चमकी बुखार से अब तक 130 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बिहार सरकार को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सात दिन के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उन्होंने इंसेफलाइटिस से हो रहे बच्चों की मौत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) being treated at a hospital in Muzaffarpur, Saturday, June 15, 2019. Four more children died Friday in Bihar's Muzaffarpur district reeling under an outbreak of brain fever, taking the toll to 57 this month (PTI Photo)(PTI6_15_2019_000045B)

क्यों 25 साल बाद भी हमें नहीं पता कि बच्चों को चमकी बुखार से कैसे बचाया जाए?

वर्ष 1995 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में यह एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम का पहला मामला सामने आने के बाद 25 साल गुज़र गए, इसके बाद भी इस बीमारी के सही कारणों और निदान का पता नहीं चल पाया है.

बिहार के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पीछे पड़े कंकाल. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में अस्पताल के पीछे मिले मानव कंकाल

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित जिस अस्पताल के पीछे मानव कंकाल मिले हैं, वहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अभी तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार में चमकी बुखार से अभी तक करीब 139 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Muzaffarpur: A view of an over-crowded ward with children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) as they undergo treatment at a hospital, in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. The death toll rose to 100 in Muzaffarpur and the adjoining districts in Bihar. (PTI Photo) (PTI6_17_2019_000139B)

बिहार: एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अब त​क 136 की मौत, 16 जिलों में फैला

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में सबसे अधिक अब तक 117 की मौत हुई है. इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर से मौतों के मामले सामने आए हैं.

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बिहार में बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

वीडियो: बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत पर चर्चा कर रही हैं आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) undergoing treatment at Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH), in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. (PTI Photo)(PTI6_17_2019_000049B)

बिहार: इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 115 हुई, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

साल दर साल काल के गाल में समाते बच्चे और गाल बजाते नेता

सोमवार को मुज़फ़्फ़रपुर दौरे पर पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कई योजनाओं की घोषणा की, तो उन्हें 2014 में की गई घोषणाओं के बारे में ध्यान दिलाया गया, जिस पर वह असहज हो गए. दरअसल वे पांच साल पूर्व की गई अपनी ही घोषणाएं फिर से दोहरा रहे थे जो अब तक या तो अमल में ही नहीं आ सकी हैं या आधी-अधूरी हैं.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत के बाद जायजा लेने गए सीएम नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी

इंसेफलाइटिस की चपेट में आकर बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के ख़िलाफ़ परिवाद दायर. बिहार में अब तक तकरीबन 120 बच्चों की मौत इंसेफलाइटिस से हो चुकी है.

Bihar Encephalitis PTI

क्या है चमकी बुखार, जिसने बिहार में ली सैकड़ों बच्चों की जान

एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुख़ार का दायरा बहुत विस्तृत है, जिसमें अनेक संक्रमण शामिल होते हैं और यह बच्चों को प्रभावित करता है. बिहार में पिछले 20 दिनों में इसके 350 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें क़रीब 120 बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

बिहार में बच्चों की मौत पर मानवाधिकार आयोग का स्वास्थ्य मंत्रालय, बिहार सरकार को नोटिस

आयोग ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जापानी इंसेफलाइटिस वायरस, एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम पर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को लागू करने की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बिहार में ‘अज्ञात बुखार’ से करीब 120 बच्चों की मौत, कटघरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 में इस बीमारी के कारण 86 बच्चों की मौत हुई थी. जबकि 2015 में 11, साल 2016 में चार, साल 2017 में चार और साल 2018 में 11 बच्चों की मौत हुई थी.

Bihar AES Muzaffarpur Photo Umesh Ray (6)

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में दिमागी बुखार सहित अज्ञात बीमारी से अब तक 84 बच्चों की मौत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

Bihar Muzaffarpur Photo Umesh Featured

बिहार: बीते पंद्रह दिनों में हुई तक़रीबन 60 बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के मुज़फ्फरपुर में अब तक ‘अज्ञात बुखार’ के चलते करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों बच्चे इससे पीड़ित हैं.

Forbesganj: Prime Minister Narendra Modi and Bihar Chief Minister and Janta Dal United President Nitish Kumar during an election rally at Araria lok sabha constituency, in Forbesganj, Saturday, April 20, 2019. (PTI Photo) (PTI4_20_2019_000016B)

क्या नीतीश कुमार फिर एनडीए से अलग होने की तैयारी कर रहे हैं?

उचित प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से जदयू के इनकार और बिहार राज्य कैबिनेट विस्तार में किसी भाजपा नेता को जगह न देने के सियासी घटनाक्रम को दोनों पार्टियों के बीच बढ़ती खटास के तौर पर देखा जा रहा है.

Ravi Shankar Prasad Shatrughan Sinha PTI Twitter

पटना साहिब सीट: भाजपा के रविशंकर प्रसाद 2.72 लाख वोटों से आगे, शत्रुघ्न सिन्हा पिछड़े

लोकसभा चुनाव परिणाम 2019: बिहार की राजधानी की पटना साहिब सीट पर कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा और भाजपा के रविशंकर प्रसाद के बीच सीधा मुक़ाबला है. लंबे समय तक भाजपा में रहे सिन्हा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल में हुए थे.

Nitish kumar ani

गोडसे वाले बयान के लिए भाजपा प्रज्ञा ठाकुर को निष्कासित करने पर विचार करे: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘यह बेहद निंदनीय है. हम ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. बापू राष्ट्रपिता हैं और लोग पसंद नहीं करेंगे अगर कोई इस तरह से गोडसे के बारे में बात करता है.’

nalanda

प्राचीन भारत में शिक्षा का केंद्र रहे नालंदा का राजनीतिक समीकरण

सड़क से संसद: बिहार का नालंदा लोकसभा सीट शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है. यहीं से जॉर्ज फर्नांडिस और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे नेताओं ने अपना राजनीतिक करिअर शुरू किया. यहां आख़िरी चरण में 19 मई को लोकसभा के लिए वोट डाले जाएंगे.

बिहार के मुख्यमंत्री नी​तीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

पांच साल में बिहार की नीतीश सरकार ने विज्ञापन पर ख़र्च किए तक़रीबन पांच अरब रुपये

विशेष रिपोर्ट: सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार बिहार में राबड़ी देवी सरकार ने साल 2000 से 2005 के दौरान 23 करोड़ 48 लाख रुपये विज्ञापन पर ख़र्च किए थे. वहीं ​नीतीश कुमार सरकार ने पिछले पांच साल में विज्ञापन पर 4.98 अरब रुपये ख़र्च किए हैं.

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बिहार के अररिया में मवेशी चोरी के शक में एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या

यह घटना रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत डाक हरिपुर गांव की है. मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

India's Prime Minister Narendra Modi reacts as he speaks to members of the Australian-Indian community during a reception at the Allphones Arena located at Sydney Olympic Park in western Sydney in this November 17, 2014 file photograph. Since Modi came to power in May, ties between Israel and India have been in overdrive, with the two signing a series of defence and technology deals that have underscored their burgeoning commercial and political relationship. To match INDIA-ISRAEL/TIES REUTERS/Rick Stevens/Files (AUSTRALIA - Tags: POLITICS BUSINESS)

वन-मैन शो वाली सरकार चलाने वाले मोदी के लिए मुश्किल होगी गठबंधन की राह

अगर भाजपा पिछली बार जीती गई 282 सीटों से कम सीटें पाती है, तो पार्टी को सहयोगियों की ज़रूरत होगी. समीकरण जैसे भी बनें, यह निश्चित है कि अगली सरकार गठबंधन की या खिचड़ी सरकार होगी, जिसे मोदी बिल्कुल पसंद नहीं करते.

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हम भी भारत: मोदी सिर्फ नफ़रत की राजनीति जानते हैं- तेजस्वी यादव

बिहार की राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख तेजस्वी यादव से लोकसभा चुनाव और बिहार की राजनीति पर चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

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हम भी भारत: बिहार के दंगल में किस ओर बहेगी गंगा?

हम भी भारत की इस कड़ी में पटना के गांधी घाट पर लोकसभा चुनावों के बारे में पत्रकार निवेदिता झा, फ़ैजान अहमद, प्रोफेसर डेज़ी नारायण, प्रोफेसर शंकर दत्त, पटना विश्वविद्यालय, डॉक्टर हसनैन क़ैसर और असमां ख़ान से चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट से महागठबंधन के उम्मीदवार शरद यादव, एनडीए के उम्मीदवार दिनेश चंद्र यादव और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पप्पू यादव. (फोटो: पीटीआई/बिहार विधानसभा)

शरद यादव, पप्पू यादव या दिनेश चंद्र यादव: कौन बनेगा बिहार के ‘मधेपुरा का गोप’

बिहार के मधेपुरा लोकसभा पर यादव बिरादरी का प्रभुत्व है. यहां एनडीए की तरफ से जदयू नेता दिनेश चंद्र यादव मैदान में हैं जबकि महागठबंधन ने शरद यादव को मैदान में उतारा है, वहीं पप्पू यादव निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/ट्विटर)

बिहार बालिका गृह मामला: मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित 21 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर शहर में सेवा संकल्प एवं विकास समिति नाम के एनजीओ द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों के साथ पिछले साल यौन शोषण का मामला सामने आया था. एनजीओ का संचालक ब्रजेश ठाकुर मुख्य आरोपी है.

Prashant Kishor, political strategist of India's main opposition Congress party, is pictured at a hotel in New Delhi, India May 15, 2016. To match Insight INDIA-CONGRESS/ REUTERS/Anindito Mukherjee

नीतीश कुमार को एनडीए में शामिल होने के बजाय दोबारा जनादेश हासिल करना चाहिए था: प्रशांत किशोर

चुनावी रणनीतिकार और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने एक साक्षात्कार के दौरान नीतीश कुमार के दोबारा भाजपा से हाथ मिलाने के फैसले से असहमति जताई.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार: शराबबंदी से राजस्व में कमी न होने का नीतीश कुमार का दावा ग़लत निकला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दावे के उलट कैग की रिपोर्ट बताती है कि शराबबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-2017 में कर राजस्व में गिरावट आई है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

बिहारः मोकामा शेल्टर होम से सात लड़कियां लापता, मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले की पीड़िताएं भी शामिल

एक पुलिस अधिकारी ने शेल्टर होम प्रबंधन पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गुपचुप तरीके से काम किया है. उन्होंने कहा कि सरकार की महिला प्रतिनिधियों को भी लड़कियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही.

नीतीश कुमार (फाइल फोटो: पीटीआई)

बिहार बालिका गृह: नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ जांच के आदेश की ख़बर झूठी निकली

बीते शनिवार को एक न्यूज़ एजेंसी द्वारा ख़बर प्रसारित की गई थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर बालिका आश्रय गृह यौन शोषण मामले में सीबीआई को जांच का आदेश दिया गया है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar during a prayer meeting for former defence minister George Fernandes, in Patna, Friday, Feb 8, 2019. (PTI Photo) (PTI2_8_2019_000136B)

बिहार बालिका गृह: सीबीआई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ जांच करने का आदेश

नोट: ये ख़बर समाचार एजेंसी भाषा की ओर से गलती से जारी कर दी गई थी. पाठकों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है.

बिहार में मार दिए गए आरटीआई कार्यकर्ता ​शशिधर मिश्रा, रामकुमार ठाकुर और वाल्मीकि यादव (बाएं से दाएं).

बिहार में क्यों निशाने पर हैं आरटीआई कार्यकर्ता?

विशेष रिपोर्ट: एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 से लेकर अब तक देशभर में 79 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है, जिसमें क़रीब 20 फीसदी की हत्याएं केवल बिहार में हुई हैं. साल 2018 में बिहार में पांच आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले सामने आए हैं.