नेहरू

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

सोशल मीडिया पर राजनीतिक संवाद तर्क पर कम और मन के विश्वास पर ज़्यादा आधारित है

मुद्दा ये नहीं है कि आप किसका समर्थन करते हैं. आप बिल्कुल उन्हीं को चुने जिसका आपको मन है, लेकिन ये उम्मीद ज़रूर है कि आप अपने विवेक पर पर्दा न डालें.

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हम भी भारत, एपिसोड 56: मोदी के भारत में नेहरू का महत्व

हम भी भारत की 56वीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी मोदी के भारत में नेहरू के महत्व पर इतिहासकार सैयद इरफ़ान हबीब और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी से चर्चा कर रही हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

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कैसे हुआ था रिज़र्व बैंक का बंटवारा

आज़ादी के 71 साल: 1947 में देश के विभाजन के बाद रिज़र्व बैंक ने कुछ समय तक पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक की भी ज़िम्मेदारी उठाई थी, जिसने आगे जाकर कई मुश्किलें खड़ी कर दीं.

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मैंने भाजपा से इस्तीफ़ा दिया क्योंकि…

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की टीम का हिस्सा रहे शिवम शंकर सिंह कहते हैं, ‘मैं 2013 से भाजपा का समर्थक था क्योंकि नरेंद्र मोदी देश के लिए उम्मीद की किरण की तरह लगते थे और मुझे उनके विकास के नारे पर विश्वास था. अब वो नारा और उम्मीद दोनों जा चुके हैं.’

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‘भारत की राष्ट्रीयता किसी एक भाषा या एक धर्म पर आधारित नहीं है’

7 जून 2018 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पर हुए समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया पूरा भाषण.

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मीडिया बोल, एपिसोड 49: प्रधानमंत्री का इतिहास ज्ञान, जनतंत्र और मीडिया

मीडिया बोल की 49वीं कड़ी में उर्मिलेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाषणों में ग़लत ऐतिहासिक तथ्यों के इस्तेमाल और मीडिया की भूमिका पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद सज्जाद से चर्चा कर रहे हैं.

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क्या नेताजी के ज़िंदा होने की ख़बर नेहरू को घेरने के लिए फैलाई गई थी?

लोगों को यक़ीन दिलाया गया कि नेताजी इसलिए भूमिगत रहे क्योंकि नेहरू ने ब्रिटिश सरकार से गुपचुप समझौता किया था कि अगर नेताजी कभी जीवित मिलते हैं तो उन्हें एक युद्ध अपराधी के रूप में तत्काल ब्रिटेन को सौंप दिया जाएगा.

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क्या राहुल की ‘भद्रता’ उनकी कमज़ोरी को छिपाने का बहाना है?

राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी ने मणिशंकर अय्यर से दूरी बनाने की जितनी जल्दबाज़ी दिखाई उससे गुजरात और देश ने यह सबक नहीं लिया कि राहुल एक भद्र व्यक्ति हैं बल्कि यह संदेश गया कि राहुल में लड़ने का माद्दा नहीं है.

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गैर-कांग्रेसवाद के घाट पर ही होगा कांग्रेस उद्धार

कांग्रेस अब तक अगर विजयी होती रही है तो उसका कारण यही था कि वह अपने विरोधियों की मांगों और उनके गुणों को आत्मसात कर लेती थी. जब तक वह ऐसा करती रही तब तक चलती रही और जब छोड़ दिया तो अवसान की ओर बढ़ने लगी.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान उन्हें शुभकामनाएं देते पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. (फोटो: ट्विटर/रणदीप सुरजेवाला)

कांग्रेस को प्रासंगिक बनाए रखना राहुल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है

‘राहुल गांधी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपने को एक विश्वसनीय नेता के रूप में साबित करने की है जिसमें वह पिछले 15 सालों से विफल रहे हैं.’

बसपा प्रमुख मायावती. (फोटो: पीटीआई)

देश को विपक्ष मुक्त बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा केंद्र: मायावती

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को चेताया, लोकसभा चुनाव समय से पहले होने की संभावना, अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए भाजपा हिंदुत्व को बना सकती है मुद्दा.

गिरिराज सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

बहुसंख्यकों की आबादी गिरेगी, उस दिन लोकतंत्र ख़तरे में होगा: केंद्रीय मंत्री

केंद्र सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, भारत में जम्हूरियत भी तभी तक है और लोकतंत्र तभी तक सुरक्षित है जब तक बहुसंख्यकों की आबादी है.

गजानन माधव मुक्तिबोध (13 नवंबर 1917 – 11 सितंबर 1964)

मुक्तिबोध: उम्र भर जी के भी न जीने का अंदाज़ आया

हरिशंकर परसाई ने मुक्तिबोध को याद करते हुए लिखा कि जैसे ज़िंदगी में मुक्तिबोध ने किसी से लाभ के लिए समझौता नहीं किया, वैसे मृत्यु से भी कोई समझौता करने को तैयार नहीं थे.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi pays floral tributes to the bust of Shyama Prasad Mukherjee at BJPs national executive meeting at Talkatora stadium, in New Delhi on Monday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI9 25 2017 000034B)

दीनदयाल उपाध्याय: जो मुसलमानों को समस्या और धर्मनिरपेक्षता को देश की आत्मा पर हमला मानते थे

अंत्योदय का नारा देने वाले दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि अगर हम एकता चाहते हैं, तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा, जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिंदू संस्कृति है.

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मुजफ़्फ़रनगर में 30 लोगों की मौत के बाद रेल मंत्रालय ने कहा, ट्रेन दुर्घटनाओं में कमी आई है

मंत्रालय ने कहा है कि यूपीए सरकार के पहले तीन वर्षों के कार्यकाल में 759 मौतें हुईं, दूसरे कार्यकाल में यह संख्या 938 हो गई. मौजूदा सरकार के पहले तीन वर्षों में यह संख्या 652 है.