न्यूनतम समर्थन मूल्य

Jaipur: A farmer harvests wheat crop at a field in Chandlai village of Jaipur on Friday. PTI Photo(PTI3_23_2018_000200B)

न्यूनतम समर्थन मूल्य: मोदी सरकार का ऐतिहासिक दाम का दावा ऐतिहासिक झूठ है

वीडियो: मोदी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए गए बदलाव और किसानों के मुद्दों पर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव से कबीर अग्रवाल की बातचीत.

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​जन गण मन की बात, एपिसोड 270: सोशल मीडिया और न्यूनतम समर्थन मूल्य

जन गण मन की बात की 270वीं कड़ी में विनोद दुआ फेक न्यूज़, ट्रोलिंग और लिंचिंग की घटनाओं के लिए सोशल मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति और केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए गए बदलाव पर चर्चा कर रहे हैं.

Kolkata: Farmers plant paddy saplings in a field as the Boro paddy season starts, in the outskirts of Kolkata on Monday morning. PTI Photo (PTI1_29_2018_000045B)

न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा करके वादा निभाया: मोदी, कांग्रेस ने कहा- चुनावी लॉलीपॉप

अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा, धान के एमएसपी में 200 रुपये की वृद्धि किसानों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है.

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किसान आंदोलन: राहुल ने कहा, मध्य प्रदेश में सरकार आई तो 10 दिन में क़र्ज़ माफ़

मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी पर आयोजित ‘किसान समृद्धि संकल्प’ रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘पूरे देश में आज किसान अपना हक़ मांग रहा है, आत्महत्या कर रहा है.’

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जन गण मन की बात, एपिसोड 254: विश्व पर्यावरण दिवस और किसान आंदोलन

जन गण मन की बात की 254वीं कड़ी में विनोद दुआ विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर देश में बढ़ते प्रदूषण और विभिन्न मांगों को लेकर गांवबंद आंदोलन कर रहे किसानों पर चर्चा कर रहे हैं.

Patiala: A labourer rest on sacks of vegetables on the 1st day of 10 day strike called by the farmers' unions for suply of Vegetables and Milk products in protest against hike of fuel prices, in Patiala on Saturday, Jun 02, 2018. (PTI Photo) (PTI6_2_2018_000139B)

किसान आंदोलन: पांचवें दिन भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी, कई जगहों पर सब्ज़ियों के दाम बढ़े

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल ने किसानों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस के ‘कुशासन’ को जिम्मेदार ठहराया, शरद पवार ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया, सरकार को आड़े हाथ लिया.

Hisar: Vegetables lie scattered on a road as farmer's protest enters third day, in Hisar, on Sunday, June 03, 2018. (PTI Photo) (PTI6_3_2018_000058B)

फसल काटते किसान की तस्वीर फांसी के फंदे पर लटकते किसान में क्यों बदल गई है?

किसान संगठनों ने जब ‘गांव बंद’ आंदोलन शुरू किया तो उन्हें उम्मीद थी कि चुनावी साल होने के कारण आमतौर पर ऊंचा सुनने वाली दिल्ली उन्हें सुनेगी लेकिन वे गलत सिद्ध हुए. सरकार उनका मज़ाक उड़ाने पर उतर आई है.

Meerut: Bharatiya Kisan Andolan activists along with the farmers throw tomatoes on a road during a protest various issues of the farmers including their loan waiver, in Meerut on Sunday, June 03, 2018. (PTI Photo) (PTI6_3_2018_000093B)

किसान आंदोलन का चौथा दिन: कुछ जगहों पर सब्ज़ियों और फलों के दाम में हुई बढ़ोतरी

मध्य प्रदेश समेत देश के दूसरे हिस्सों में किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी, छह जून को पंजाब में आंदोलन ख़त्म होने की ख़बर. कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज.

Patiala: A labourer rest on sacks of vegetables on the 1st day of 10 day strike called by the farmers' unions for suply of Vegetables and Milk products in protest against hike of fuel prices, in Patiala on Saturday, Jun 02, 2018. (PTI Photo) (PTI6_2_2018_000139B)

किसान आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश में तीन किसानों की मौत

ऑल इंडिया किसान सभा ने कहा कि तेज़ होगा आंदोलन. पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों में आपूर्ति बाधित होने से सब्ज़ियों के दाम बढ़े. जींद में दूध और सब्ज़ियों को सड़क पर फेंक जताया रोष. नासिक में आपूर्ति बाधित.

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मोदी के चार साल: देश का किसान दुख और विनाश के चक्रव्यूह में फंस गया है

देश में पिछले चार वर्षों में कृषि विकास दर का औसत 1.9 प्रतिशत रहा. किसानों के लिए समर्थन मूल्य से लेकर, फसल बीमा योजना, कृषि जिंसों का निर्यात, गन्ने का बकाया भुगतान और कृषि ऋण जैसे बिंदुओं पर केंद्र सरकार पूर्णतया विफल हो गई है.

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बागपत में गन्ने के बकाया भुगतान की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसान की मौत

कैराना लोकसभा उपचुनाव से ठीक एक दिन पहले 27 मई को बागपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली है. लेकिन इससे पहले पांच दिन से धरने पर बैठे एक किसान की मौत हो गई है.

फोटो: रॉयटर्स

1 से 10 जून के बीच देश भर में किसान करेंगे ‘गांवबंदी’

राष्ट्रीय किसान महासंघ ने देश भर में एक जून से दस दिनों तक सब्जियों, अनाजों और दूध जैसे कृषि उत्पादों की आपूर्ति नहीं करने की घोषणा की है.

A woman winnowing wheat at a wholesale grain market on the outskirts of Ahmedabad, Gujarat, May 7, 2013. Credit Amit Dave/Reuters

सरकारें किसानों के वोट से बनती हैं, लेकिन काम उद्योगों के लिए करती हैं

सरकार ने महंगाई दर कम करने और आंकड़ों की कलाबाज़ी करने के लिए जो नीति बनाई उसमें वह सफल रही है क्योंकि किसान की फसल के दाम कम हो गए और बाकि सभी चीज़ें महंगी हो गईं.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे. (फोटो: पीटीआई)

क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा के बाद भी राजस्थान के किसान ग़ुस्से में क्यों हैं?

स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने और कुछ अन्य मांगों को लेकर किसानों ने अपना आंदोलन वापस तो ले लिया है, लेकिन यह कभी भी राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के गले की फांस बन सकता है.

A woman winnowing wheat at a wholesale grain market on the outskirts of Ahmedabad, Gujarat, May 7, 2013. Credit Amit Dave/Reuters

किसानों को लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा एक जुमले से ज़्यादा कुछ नहीं

बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की ओर से किए गए प्रावधानों पर कृषि विशेषज्ञों को संदेह है. उनके अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा काफ़ी नहीं, यह भी देखा जाना ज़रूरी है कि बहुत थोड़े किसानों की पहुंच एमएसपी तक है.

फोटो: रॉयटर्स

पर्याप्त ख़रीद व्यवस्था की कमी से सभी फसलों को एमएसपी के दायरे में लाना मुश्किल: कृषि विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान तभी लाभकारी होगा जब किसान अपनी उपज उपयुक्त माध्यम से बेचे. देश में अधिक खाद्य उत्पादन के बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

सरकार ने किसानों को बेवकूफ़ बनाया, मार्च में 180 किसान संगठन करेंगे प्रदर्शन: योगेंद्र यादव

बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य फसल उत्पादन लागत का डेढ़ गुना तक बढ़ाने के प्रस्ताव में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों की अनदेखी के चलते किसान संगठनों ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी.

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बजट 2018: वादों और दावों की भूलभुलैया

दो हज़ार करोड़ के फंड के साथ पचास करोड़ लोगों को बीमा देने की करामात भारत में ही हो सकती है. यहां के लोग ठगे जाने में माहिर हैं. दो बजट पहले एक लाख बीमा देने का ऐलान हुआ था, आज तक उसका पता नहीं है.

Kolkata: Farmers plant paddy saplings in a field as the Boro paddy season starts, in the outskirts of Kolkata on Monday morning. PTI Photo (PTI1_29_2018_000045B)

बजट किसानों को चकमा देने के लिए होगा, वादे लबालब और नतीजे ठनठन

आपके मुल्क में अक्टूबर से लेकर आधी जनवरी तक एक फिल्म को लेकर बहस हुई है. साढ़े तीन महीने बहस चली. नौकरी पर इतनी लंबी बहस हुई? बेहतर है आप भी सैलरी की नौकरी छोड़ हिंदू-मुस्लिम डिबेट की नौकरी कर लीजिए.

फोटो: पीटीआई

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसान आत्महत्या दर में 45 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा: कांग्रेस

कांग्रेस बोली, पिछले 3 सालों में 38 हज़ार किसानों ने आत्महत्या की है. 35 किसान हर दिन आत्महत्या कर रहे हैं. सरकार ने किसानों की जगह अमीरों का क़र्ज़ माफ़ किया.

फोटो: रॉयटर्स

किसानों को फ़सलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा: मोदी सरकार

सीताराम येचुरी ने कहा, कृषि विकास दर 4.5 प्रतिशत से घटकर 2.1 प्रतिशत हुई, किसान आत्महत्याएं ख़तरनाक स्तर पर पहुंचीं, क़र्ज़माफ़ी सिर्फ़ बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स के लिए.

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न्यू इंडिया में प्रधानमंत्री एक के बाद एक चुनाव लड़ेंगे और किसान ख़ुदकुशी करेंगे

साल 2017 एक तरह से किसान आंदोलनों का साल रहा. पूरे बरस भर देश के किसी न किसी हिस्से में किसान आंदोलन करते रहे.

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2017 में ज़्यादातर देशों की जीडीपी बढ़ी, बेरोज़गारी घटी लेकिन भारत में ऐसा नहीं हुआ

2017 को एक ऐसे साल के तौर पर याद किया जाएगा, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था को अपने ही हाथों भारी नुकसान पहुंचाया गया. इससे जीडीपी में तीव्र गिरावट आयी और पहले से ही नए रोज़गार निर्माण की ख़राब स्थिति और बदतर हुई.

फोटो: रॉयटर्स

अनाज उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर पर, दाम को लेकर बढ़ सकती हैं किसानों की दिक्कतें

विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में संकट बढ़ रहा है. उपज का दाम समर्थन मूल्य से नीचे आता है, तो किसानों को मुश्किल होगी. पिछले दो साल में किसानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई है.

दिल्ली के संसद मार्ग पर देश भर के 184 किसान संगठनों की ओर से दो दिवसीय किसान मुक्ति संसद लगाई गई. (फोटो: कृष्णकांत/द वायर)

कॉरपोरेट की क़र्ज़माफ़ी से विकास होता है, किसानों की क़र्ज़माफ़ी विकास-विरोधी है

भाषणों में पूरी राजनीति और सरकार किसानों-ग़रीबों को समर्पित है लेकिन किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य से भी कम पर बेचने को मजबूर है.

A labourer carries a sack filled with pulses at a wholesale pulses market in Kolkata, July 31, 2015. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

एक किलो टमाटर ख़रीदने के लिए पांच किलो उड़द बेचने को मजबूर किसान: यूनियन

मध्य प्रदेश की मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही है दाल. जून में किसानों का हिंसक आंदोलन झेल चुके सूबे में कृषि क्षेत्र के संकट का मुद्दा फिर गरमाता नज़र आ रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलता तो 36,000 करोड़ का होगा नुकसान: किसान संगठन

20 नवंबर को कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य, ऋण माफी और अन्य मांगों को लेकर दिल्ली में होगी किसान मुक्ति संसद.

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क़र्ज़माफ़ी को फैशन बताने वाले उपराष्ट्रपति ने कहा- नेताओं व प्रेस ने किसानों के लिए कुछ न किया

उपराष्ट्रपति ने कृषि में और अधिक सरकारी निवेश की हिमायत करते हुए कहा, किसानों की आय नहीं बढ़ी, वे कृषि छोड़ना चाहते हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

प्रधानमंत्री किसानों से ऐसा वादा कर रहे हैं जिसे पूरा करना संभव नहीं

मोदी जी ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था, ‘जिस देश के किसान ख़ुदकुशी कर रहे हैं वहां के सत्ताधारी लोगों को नींद कैसे आ सकती है?’ अब पता नहीं उन्हें नींद कैसे आती होगी.

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क्या भारत डब्ल्यूटीओ के जाल में फंस चुका है?

भारत सरकार अब इस बात से सहमत है कि खाद्य सब्सिडी को कम से कम किया जाना होगा, इस कारण से पूरी संभावना है कि भारत में रोज़गार, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक गैर-बराबरी का दर्द अब और ज़्यादा बढ़ेगा.

The Minister of State for Commerce & Industry (Independent Charge), Smt. Nirmala Sitharaman meeting the DG, WTO, Mr. Roberto Azevedo, in Geneva on July 18, 2017.

नीति बनाने वाले किसान और उपभोक्ता को एक-दूसरे का दुश्मन बना रहे हैं

जब कुछ ख़ास व्यापारिक प्रतिष्ठानों का एकाधिकार स्थापित हो जाएगा, तब क़ीमतें सरकार और किसान नहीं, बड़ी कंपनियां तय करेंगी.

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जिस सरकार ने नोटबंदी की, उसी को क़र्ज़ माफ़ी का ख़र्च भी उठाना चाहिए

अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग उथली राजनीति है तो नरेंद्र मोदी का देश भर में घूम-घूम कर चुनावी सभाओं में वादा करना उथली राजनीति नहीं थी?

(फोटो: रॉयटर्स)

किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घाटे का सौदा है

वास्तव में किसानों से उपज खरीदने वालों से व्यापार में नैतिकता की अपेक्षा भर की जाती रही. सरकार ने यह कोशिश कभी नहीं की कि किसानों को उचित कीमतें मिलें.

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क्या खेती करने में बुद्धि का इस्तेमाल नहीं होता?

खेती से जुड़े किसी भी काम को अकुशल श्रम माना जाता है. क्या मिट्टी की पहचान के साथ फसल तय करने में बुद्धि का इस्तेमाल नहीं होता? बीज अंकुरित होगा या नहीं, यह जांचना गैर-तकनीकी काम है? कौन से उर्वरक-खाद डालना है, कब डालना है, क्या यह विशेषज्ञता का काम नहीं है?

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व्यवस्था ‘नत्था’ से किसानी छुड़ाकर मज़दूरी कराना चाहती है

‘पीपली लाइव’ किसान और मीडिया के चित्रण के जरिये भूमंडलीकरण की प्रक्रिया और उसके दुष्परिणामों की गहरी पड़ताल करता है. सिनेमा का व्यंग्यात्मक रुख राज्य और समाज के रवैये की भी पोल खोलता है.

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मंदसौर से निकली ‘किसान मुक्ति यात्रा’ को पुलिस ने रोका

किसान यात्रा में शामिल योगेंद्र यादव, मेधा पाटेकर समेत कई किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उनके अगले पड़ाव पर छोड़ दिया.