पत्रकारिता

The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the Indian Community, at the ‘Bharat Ki Baat, Sabke Saath’ programme, at Westminster, London on April 18, 2018.

‘मीडिया का बड़ा हिस्सा केवल एक फ़क़ीर और उसकी फ़क़ीरी की चर्चा में लगा है’

वीडियो: 24 फरवरी 2019 को हुए द वायर डायलॉग्स में द वायर हिंदी के संपादक बृजेश सिंह द्वारा दिया गया वक्तव्य.

फोटो साभार: सूर्या समाचार/फेसबुक

पुण्य प्रसून वाजपेयी को मिला नोटिस जनता के जानने के अधिकार पर एक और गहरा वार है

आखिर क्या बात है कि खेती-किसानी हो, अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्से हों, विश्वविद्यालय हों या स्कूल, हिंदी अख़बारों या चैनलों से हमें न तो सही जानकारी मिलती है, न आलोचनात्मक विश्लेषण? क्यों सारे हिंदी जनसंचार माध्यम सरकार की जय-जयकार में जुट गए हैं?

Ravish Kumar The Wire featured

मैं एंटी-मोदी नहीं हूं, मैं बस उनसे सवाल पूछता हूं: रवीश कुमार

द वायर हिंदी के दो साल पूरे होने पर आयोजित द वायर डायलॉग्स में पत्रकार रवीश कुमार से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.

अरुण शौरी. (फोटो: पीटीआई)

रफाल पर दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम हुई: अरुण शौरी

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और वरिष्ठ पत्रकार अरुण शौरी ने कहा है कि वे राफेल मामले को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे.

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मीडिया बोल, एपिसोड 83: महत्वपूर्ण मुद्दे मुख्यधारा के मीडिया से क्यों छूट जाते हैं

मीडिया बोल की 83वीं कड़ी में उर्मिलेश भारतीय मीडिया पर कारवां मैगज़ीन के राजनीतिक संपादक हरतोष सिंह बल वरिष्‍ठ पत्रकार अनंत बागाईतकर और न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी वेबसाइट के संपादक अतुल चौरसिया से चर्चा कर रहे हैं.

पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामा प्रसाद प्रदीप.

जब संघ प्रमुख के कार्यक्रम को भाव न देने पर पत्रकार श्यामा प्रसाद को नौकरी गंवानी पड़ी

पुण्यतिथि विशेष: पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामा प्रसाद ‘प्रदीप’ का सिद्धांत था, ‘पत्रकार को नौकरी बचाने के फेर में पड़े बिना ही काम करना चाहिए वरना पत्रकारिता छोड़ कुछ और करना चाहिए.’

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मीडिया बोल, एपिसोड 81: ‘प्लायबल’ मीडिया, एडिटर्स गिल्ड और पत्रकारिता का संकट

मीडिया बोल की 81वीं कड़ी में उर्मिलेश नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार, मणिपुर में पत्रकार की गिरफ़्तारी और सबरीमाला मंदिर में हड़ताल कवर करने गई कैमरापर्सन शजिला से आंदोलनकारियों के दुर्व्यवहार पर हिंदुस्तान टाइम्स के पॉलिटिकल एडिटर विनोद शर्मा, द ट्रिब्यून की डिप्टी एडिटर स्मिता शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता से चर्चा कर रहे हैं.

New Delhi: WhoDoingWhat in New Delhi, on Friday, Jan. 4, 2019. SecondaryInfo. (PTI Photo/Arun Sharma)

द वायर हिंदी को मिला रामनाथ गोयनका पत्रकारिता सम्मान

द वायर हिंदी के वरिष्ठ संवाददाता रहे अमित सिंह को यह पुरस्कार ‘सर्वश्रेष्ठ हिंदी पत्रकारिता- प्रिंट’ श्रेणी में जम्मू कश्मीर पुलिस पर की गई उनकी ग्राउंड रिपोर्ट के लिए दिया गया है. वहीं पत्रकार संध्या रविशंकर को द वायर पर प्रकाशित रेत खनन पर उनकी रिपोर्ट के लिए एनवायरमेंटल रिपोर्टिंग- प्रिंट श्रेणी में अवॉर्ड मिला है.

सऊदी अरब के शहज़ादे मुहम्मद बिन सलमान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पत्रकार जमाल खशोगी. (फोटो: रॉयटर्स/विकिपीडिया)

पत्रकार जमाल ख़शोगी की हत्या के लिए संभवत: दुनिया ज़िम्मेदार: डोनाल्ड ट्रंप

तुर्की की ओर से कहा गया है कि जमाल ख़शोगी हत्याकांड के प्रति आंखें मूंदना चाह रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. जमाल ख़शोगी की बीते दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल शहर स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी.

वसुधा काटजू और उमा चक्रवर्ती. (ग्राफिक्स: मनिंदर पाल सिंह)

‘यौन उत्पीड़न पर ख़ामोश रहने का फ़ायदा सिर्फ़ आरोपी को मिलता है’

साक्षात्कार: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और मीटू आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानी-मानी इतिहासकार व नारीवादी उमा चक्रवर्ती और आंबेडकर विश्वविद्यालय की शिक्षक वसुधा काटजू से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

सऊदी अरब के शहज़ादे मोहम्मद बिन सलमान और पत्रकार जमाल ख़शोगी. (फोटो रॉयटर्स/विकिपीडिया)

सीआईए ने जमाल ख़शोगी की हत्या के पीछे सऊदी अरब के शहज़ादे का हाथ बताया: रिपोर्ट

बीते दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में दाख़िल होने के बाद से जमाल ख़शोगी लापता हो गए थे. दूतावास में ही उनकी हत्या कर दी गई थी. द वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह तय है कि सऊदी अरब के शहज़ादे के बिना जानकारी या संलिप्तता के यह नहीं हुआ.

गौरव सावंत, (फोटो साभार: ट्विटर)

इंडिया टुडे के कार्यकारी संपादक गौरव सावंत पर यौन उत्पीड़न का आरोप

#मीटू: पत्रकार विद्या कृष्णन ने 15 साल पहले हुई घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि एक असाइनमेंट के दौरान गौरव सावंत ने उनके साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी की. विद्या उस समय ‘द पॉयनियर’ अख़बार में काम करती थीं.

(फोटो: पीटीआई/रॉयटर्स | ग्राफिक्स: मनिंदर पाल सिंह)

भारत में फ़र्ज़ी ख़बरों के प्रसार के पीछे राष्ट्रवादी अभियान: शोध

बीबीसी की ओर से किए गए अध्ययन में कहा गया है कि ट्विटर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन वाले नेटवर्कों पर फ़र्ज़ी ख़बर के स्रोत प्राय: एक ही होते हैं.

के. रामाराव. (जन्म: 09 नवंबर 1896 - अवसान: 24 मई 1953) (ग्राफिक्स: मनिंदर पाल सिंह)

के. रामाराव, जो मानते थे कि पत्रकारों को हमेशा सरकार के विरोध में रहना चाहिए

विशेष: नेशनल हेराल्ड अख़बार के संस्थापक संपादक र​हे के. रामाराव ने लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए लड़ रहीं ताक़तों के समर्थन की अपनी प्रतिबद्धता से कभी समझौता नहीं किया.

पूर्व संपादक और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर (फोटो: पीआईबी)

एमजे अकबर पर अमेरिकी पत्रकार ने लगाया बलात्कार का आरोप

पल्लवी गोगोई ने ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ में एक लेख में अपनी जिंदगी के ‘सबसे कष्टकारी क्षणों’ के बारे में एमजे अकबर द्वारा किए गए उत्पीड़न को बताया. अकबर ने पल्लवी गोगोई द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों को नकारा है, पत्नी ने भी किया बचाव.

सुहेल सेठ. (फोटो साभार: फेसबुक)

यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद टाटा सन्स द्वारा सुहेल सेठ के साथ क़रार ख़त्म करने की सूचना

लेखक और सलाहकार सुहेल सेठ पर मीटू अभियान के तहत अब तक छह महिलाएं यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं.

Saudi dissident Jamal Khashoggi speaks at an event hosted by Middle East Monitor in London, Sept. 29, 2018. Reuters

सऊदी अरब ने माना, तुर्की स्थित उसके दूतावास में पत्रकार जमाल ख़शोगी की मौत हो गई

पिछले दो अक्टूबर से लापता थे द वॉशिंगटन पोस्ट में कॉलम लिखने वाले पत्रकार जमाल ख़शोगी. आख़िरी बार तुर्की स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में देखा गया था. पत्रकार की मौत होने की आशंका से सऊदी अरब लगातार कर रहा था इनकार.

Jamal-Khashoggi-Washington-Post

लापता पत्रकार जमाल ख़शोगी की कोई सूचना नहीं, इस्तांबुल में सऊदी दूतावास की दोबारा तलाशी

द वॉशिंगटन पोस्ट सहित कई मीडिया इकाइयों के लिए लिखने वाले पत्रकार जमाल ख़शोगी की हत्या होने की आशंका. दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल शहर स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में दाख़िल होने के बाद से लापता हैं.

पूर्व संपादक एमजे अकबर (फोटो: पीआईबी)

यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने दिया इस्तीफा

मीटू अभियान के तहत पूर्व संपादक एमजे अकबर पर तकरीबन 16 महिलाएं यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं.

New Delhi: Minister of State for External Affairs MJ Akbar leaves MEA at South Block, in New Delhi, Monday, Oct 15, 2018. Akbar has filed a private criminal defamation complaint against journalist Priya Ramani who recently levelled charges of sexual misconduct against him as the #MeToo campaign raged in India. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI10_15_2018_000158B)

प्रिया रमानी के समर्थन में आईं 20 महिला पत्रकार, एमजे अकबर के ख़िलाफ़ गवाही को तैयार

केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने पत्रकार प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में एक निजी आपराधिक मानहानि शिकायत दायर की है.

पूर्व संपादक और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर (फोटो: पीआईबी)

ग़ज़ाला वहाब का एमजे अकबर को जवाब

प्रताड़ना और उत्पीड़न की मेरी कहानी को ख़ारिज करते हुए अकबर अपने ‘प्लाईवुड और कांच के छोटे-से क्यूबिकल’ में छिप रहे हैं. या तो वे झूठ बोल रहे हैं या उन पर उम्र का असर होने लगा है.

Media Bol ep 71

​मीडिया बोल, एपिसोड 71: #मीटू मुहिम और मीडिया  

मीडिया बोल की 71वीं कड़ी में उर्मिलेश #मीटू मुहिम और मीडिया पर इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स की अध्यक्ष टीके राजलक्ष्मी और वरिष्ठ पत्रकार सांत्वना भट्टाचार्य से चर्चा कर रहे हैं.​

पूर्व संपादक और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर (फोटो साभार: फेसबुक)

एमजे अकबर का बयान निराशाजनक, मानहानि के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए तैयार हूं: प्रिया रमानी

यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने पटियाला हाउस कोर्ट में एक निजी आपराधिक मानहानि मुक़दमा दायर किया है.

People participate in a "MeToo" protest march for survivors of sexual assault and their supporters in Hollywood, California last Noember. Less than four months after the #MeToo movement inspired a national conversation about sexual misconduct and led to the downfall of dozens of powerful American men, a backlash seems to be underway. File/Lucy Nicholson, Reuters

#मीटू: दिल्ली में पत्रकारों का प्रदर्शन, कहा कार्यस्थल पर यौन शोषण स्वीकार्य नहीं

नई दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोपियों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की.

मध्य प्रदेश में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष लता केलकर (फोटो साभार: एएनआई)

#मीटू: भाजपा नेता बोलीं, महिला पत्रकार इतनी मासूम नहीं कि उनका फायदा उठाया जा सके

मध्य प्रदेश में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष लता केलकर ने मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर पर महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कहा कि पत्रकार बहनों को मैं इतना मासूम नहीं मानती कि कोई उनका ग़लत फायदा उठा ले.

Suhel seth Facebook featured

लेखक सुहेल सेठ पर फिल्मकार और पत्रकार सहित 4 महिलाओं ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप

#मीटू: सोशल मीडिया पर सामने आई कई महिलाओं ने लेखक सुहेल सेठ द्वारा किए गए अनुचित व्यवहार और अश्लील मैसेज भेजने के बारे में बताया है. सुहेल की ओर से अब तक इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

‘लड़कियों के लिए न्यूज़रूम तक पहुंचना जितना मुश्किल है, उससे ज़्यादा मुश्किल वहां टिके रहना है’

न्यूज़रूम की कहानियां: मेरे साथ किसी तरह की बदतमीज़ी नहीं की गई, खुले तौर पर कोई दुर्व्यवहार नहीं हुआ, पर संगठित होकर इस तरह का माहौल बनाया गया, जिसमें काम करना मुश्किल होता गया और आख़िरकार मैंने नौकरी छोड़ दी.

पूर्व संपादक और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर (फोटो साभार: फेसबुक)

मोदी सरकार में मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर पर 8 महिला पत्रकारों ने लगाया यौन शोषण का आरोप

इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि ताक़तवर पदों पर बैठे पुरूष अक्सर ऐसा करते हैं. किसी के भी ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि आमतौर पर महिलाएं इस बारे में बोलने से डरती हैं.

People participate in a "MeToo" protest march for survivors of sexual assault and their supporters in Hollywood, California last Noember. Less than four months after the #MeToo movement inspired a national conversation about sexual misconduct and led to the downfall of dozens of powerful American men, a backlash seems to be underway. File/Lucy Nicholson, Reuters

एडिटर्स गिल्ड ने मीडिया संस्थानों से यौन उत्पीड़न के मामलों में पूरी जांच कराने को कहा

‘मीटू’ अभियान को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए किसी भी शख़्स को क़ानून के हिसाब से दंडित किया जाना चाहिए. देश में प्रेस की आज़ादी के लिए निष्पक्ष, न्यायोचित और सुरक्षित कार्य वातावरण ज़रूरी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

गुजरात की साबरमती जेल में क़ैदियों के लिए पत्रकारिता का पाठ्यक्रम

साबरमती जेल में 15 अक्टूबर से ‘पत्रकारिता एवं प्रूफ रीडिंग’ में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू होगा. कई प्रकाशकों ने पाठ्यक्रम ख़त्म होने के बाद क़ैदियों को प्रूफ रीडिंग का काम देने पर सहमति जताई है.

Narendra Modi at Amul Plant Twitter namo featured

रुपया 73 पर, बेरोज़गारी आसमान पर और प्रधानमंत्री इवेंट पर

अनिल अंबानी समूह पर 45,000 करोड़ रुपये का कर्जा है. अगर आप किसान होते और पांच लाख का कर्जा होता तो सिस्टम आपको फांसी का फंदा पकड़ा देता. अनिल अंबानी राष्ट्रीय धरोहर हैं. ये लोग हमारी जीडीपी के ध्वजवाहक हैं. भारत की उद्यमिता की प्राणवायु हैं.

फोटो साभार: cobrapost.com

दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया कोबरापोस्ट की डॉक्यूमेंट्री सार्वजनिक करने से रोकने वाला आदेश

बीते मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कोबरापोस्ट के ऑपरेशन- 136 पर दैनिक भास्कर समूह की याचिका के बाद रोक लगा दी थी. शुक्रवार को इस आदेश को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि कथित अपमानजनक सामग्री दुर्भावनापूर्ण या झूठी है, तब तक एकतरफा रोक का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए.

इंडिया अगेंस्ट बायस्ड मीडिया के सह संस्थापक विपुल सक्सेना का ट्विटर अकाउंट. अपने परिचय में उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें फॉलो करते हैं.

भारत में सत्ताधारी पार्टी से सहमत न होने वाले पत्रकारों की प्रताड़ना चिंताजनक: आरडब्ल्यूबी

प्रेस की दशा-दिशा पर नज़र रखने वाली वैश्विक संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की ओर कहा गया है कि पत्रकारों को प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं के पीछे हिंदू राष्ट्रवादियों का हाथ है. इसमें हत्या भी हो सकती है, जैसा पत्रकार गौरी लंकेश के मामले में हुआ.

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन

आपातकाल के दौरान इसका विरोध करने की वजह से जेल गए. तकरीबन 15 किताबें लिखने वाले कुलदीप नैयर तमाम प्रतिष्ठित अख़बारों के संपादक रह चुके थे.

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यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए निराशाजनक दौर है

यह एक कठोर हक़ीक़त है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने वाले हर क़ानून के अपनी जगह पर होने के बावजूद समाचारपत्रों और टेलीविज़न चैनलों ने बिना प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया है और ऊपर से आदेश लेना शुरू कर दिया है.

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जम्मू कश्मीर: शुजात बुख़ारी की हत्या के विरोध में अख़बारों ने ख़ाली छोड़े संपादकीय

कश्मीर एडिटर्स गिल्ड के सदस्य ने कहा, संपादकीय लिखने वाले हाथ हमसे छीन लिए गए हैं. ऐसा लग रहा है मानो हमारी स्याही सूख गयी है, इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपना विरोध दर्ज करवाएं.

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पत्रकारिता को स्टिंग ऑपरेशन से ज़्यादा ख़तरा ज़हर फैला रहे मीडिया से है

मीडिया मालिक अख़बारों और न्यूज़ चैनलों को सुधारने के लिए कुछ करें या न करें, लेकिन यह तो तय है कि जब तक हर रोज़, हर न्यूज़रूम में प्रतिरोध की आवाज़ें मौजूद रहेंगी, तब तक भारतीय पत्रकारिता बनी रहेगी.