पत्रकार की हत्या

यूपी: संदिग्ध परिस्थितियों में पत्रकार की मौत पर विपक्ष और भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

एबीपी गंगा में कार्यरत प्रतापगढ़ के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव ने शराब माफिया से धमकी मिलने का संकेत देते हुए इलाहाबाद पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी. पुलिस ने दावा किया है कि सोमवार की रात सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हुई है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया समेत विपक्ष के नेताओं ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए हैं.

उत्तर प्रदेश: शराब माफिया से धमकी मिलने के बाद पत्रकार की मौत

प्रतापगढ़ ज़िले के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव एबीपी गंगा में कार्यरत थे. शराब माफिया के बारे में ख़बर लिखने के बाद बीते 12 जून को उन्होंने धमकी मिलने का संकेत देते हुए इलाहाबाद के अपर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की थी. पुलिस ने दावा किया कि उनकी मौत सड़क दुर्घटना में हुई है.

तमिलनाडु: कथित ड्रग तस्करों ने की पत्रकार की हत्या

मामला तमिलनाडु के कांचीपुरम ज़िले का है. तमिझन टीवी के 29 वर्षीय रिपोर्टर इजरावेल मोसेज ने बीते समय में गांजे की बिक्री और भूमि अतिक्रमण को लेकर कई ख़बरे लिखी थीं. आरोप है कि इसी के चलते उनकी हत्या की गई है.

उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश में पत्रकार की गोली मारकर हत्या

मध्य प्रदेश के निवाड़ी ज़िले के पुतरीखेरा गांव का मामला. पुलिस ने हत्या की वजह ज़मीन का विवाद बताया है. 21 जुलाई को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में भी एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

पत्रकार की हत्या मामले में प्रेस काउंसिल ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी, एनएचआरसी ने भेजा नोटिस

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 19 जून को एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या के पीछे क्षेत्र में सक्रिय रेत और भू माफिया का हाथ बताया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश: कथित तौर पर रेत माफिया के ख़िलाफ़ ख़बर करने वाले उन्नाव के पत्रकार की हत्या

उत्तर प्रदेश के कानपुर से प्रकाशित एक अख़बार के पत्रकार 25 वर्षीय शुभम मणि त्रिपाठी ने अपनी हत्या से पहले अधिकारियों को पत्र लिखकर क्षेत्र के भू-माफिया और रेत माफिया से अपनी जान को ख़तरा होने की आशंका जताई थी.

बीते पांच साल में भारत में पत्रकारों पर 200 से अधिक गंभीर हमले हुएः रिपोर्ट

‘गेटिंग अवे विद मर्डर’ नाम के अध्ययन के मुताबिक 2014 से 2019 के बीच भारत में 40 पत्रकारों की मौत हुई, जिनमें से 21 पत्रकारों की हत्या की वजह उनके काम से जुड़ी थी.

2019 में दुनियाभर में 49 पत्रकारों की हत्या हुई: रिपोर्ट

पेरिस स्थित निगरानी संगठन ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के प्रमुख क्रिस्टोफ डेलोयर ने कहा कि लोकतांत्रिक देशों में अधिकतर पत्रकारों को उनके काम के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जो कि लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है.

पत्रकारों के 90 फीसदी हत्यारों को दोषी क़रार नहीं दिया गया: यूनेस्को

यूनेस्को ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो वर्ष में 55 फीसदी पत्रकारों की हत्या संघर्ष रहित क्षेत्रों में हुई जो राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दिखाता है.

पनामा पेपर्स घोटाले का खुलासा करने वाली पत्रकार की हत्या

पत्रकार डेफ्ने कारुआना गालिज़िआ ने माल्टा में पनामा पेपर्स से जुड़े घोटाले को उजागर किया था. उनकी रिपोर्ट में माल्टा के प्रधानमंत्री की पत्नी, चीफ आॅफ स्टाफ और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पर आरोप लगाया गया था.