पारदर्शिता

(फोटो: रॉयटर्स)

अब तक 6000 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे जा चुके हैं: एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपने विश्लेषण में बताया है कि 12 चरणों के दौरान बेचे गए 12,313 बॉन्ड्स में से 6524 बॉन्ड्स (45.68 फीसदी) एक करोड़ की कीमत के थे जबकि 4877 बॉन्ड्स (39.61 फीसदी) 10 लाख रुपये की कीमत के थे.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

सुप्रीम कोर्ट का चुनावी बॉन्ड योजना पर तत्काल रोक से इनकार, केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

चुनावी बॉन्ड योजना को लागू करने के लिए मोदी सरकार ने साल 2017 में विभिन्न कानूनों में संशोधन किया था. इसके बाद एडीआर ने याचिका दायर कर इन संशोधनों को चुनौती दी थी.

CIC1-1200x359

केंद्रीय सूचना आयुक्त का पद फिर हुआ खाली, कुल पांच रिक्तियां, 34,500 मामले लंबित

साल 2014 के बाद से ये चौथा मौका है जब फिर से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली हुआ है लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है. आयोग में कुल पांच पद खाली हैं जिसमें से चार पद नवंबर 2018 से खाली पड़े हुए हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

2018-2019 में दोगुनी हुई भाजपा की आय, चुनावी बॉन्ड से मिला 60 फीसदी

चुनाव आयोग को दी गई ऑडिट रिपोर्ट में भाजपा ने बताया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में पार्टी की कुल आय 2,410 करोड़ रुपये रही. पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 134 फीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है.

CIC1-1200x359

चंदा देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की मांग करने वालों के नाम बताए केंद्र: सीआईसी

इस विषय को लेकर दायर किए गए आरटीआई आवेदन पर सही से कार्रवाई नहीं करने को लेकर सीआईसी ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग, आर्थिक कार्य विभाग तथा राजस्व विभाग और चुनाव आयोग को कारण बताओं नोटिस जारी किया है.

(फोटो: पीटीआई/विकिपीडिया)

सीजेआई के इस दावे में कितनी सच्चाई है कि आरटीआई का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए हो रहा है?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दावा किया कि आरटीआई का इस्तेमाल लोग ब्लैकमेलिंग के लिए कर रहे हैं. हालांकि ख़ुद केंद्र सरकार ने पिछले साल लोकसभा में बताया था कि बड़े स्तर पर आरटीआई के दुरुपयोग का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

केंद्र और राज्य सरकारें तीन महीने के भीतर सूचना आयुक्त नियुक्त करें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि नियुक्तियां करना शुरू कर दें. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह दो हफ्ते के भीतर उस खोज समिति के सदस्यों के नाम सरकारी वेबसाइट पर डालें, जिन्हें सीआईसी के सूचना आयुक्त चुनने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड: चुनाव आयोग ने क़ानून मंत्रालय के अलावा संसदीय समिति को भी पत्र लिख जताई थी चिंता

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की संसदीय समिति को बताया था कि यह समय में पीछे जाने वाला क़दम है और इसकी वजह से राजनीतिक दलों की फंडिंग से जुड़ी पारदर्शिता पर प्रभाव पड़ेगा.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जनवरी में सुनवाई होगी

चुनावी बॉन्ड योजना को लागू करने के लिए मोदी सरकार ने साल 2017 में विभिन्न कानूनों में संशोधन किया था. एडीआर ने साल 2017 में याचिका दायर कर इन्हीं संशोधनों को चुनौती दी है.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड योजना पर रोक लगाने के लिए एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर किया

हाल ही में चुनावी बॉन्ड के संबंध में हुए कई खुलासे को आधार बनाकर एडीआर ने अपनी याचिका में ये नया आवेदन दायर किया है. आवेदन में कहा गया है कि इससे राजनीतिक दलों को असीमित कॉरपोरेट चंदा प्राप्त करने के दरवाजे खुल गए हैं, जिसका देश के लोकतंत्र पर गंभीर परिणाम पड़ सकता है.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड योजना का ड्राफ्ट बनने से पहले ही भाजपा को इसके बारे में जानकारी थी: आरटीआई

पार्टी ने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा था कि चुनावी बॉन्ड को बिना किसी सीरियल नंबर या किसी पहचान के निशान के जारी किया जाना चाहिए, ताकि बाद में दानकर्ता का पता लगाने के लिए इसका इस्तेमाल न किया जा सके.

Indian Prime Minister Narendra Modi gestures during a sideline event ahead of the Group 20 summit called "Yoga por la paz" (Peace through Yoga) in Buenos Aires, Argentina, November 29, 2018. REUTERS/Andres Martinez Casares/Files

मोदी के साथ बैठक के बाद चुनावी बॉन्ड पर पार्टियों और जनता की सलाह लेने का प्रावधान हटाया गया

आरटीआई के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि जब चुनावी बॉन्ड योजना का ड्राफ्ट तैयार किया गया था तो उसमें राजनीति दलों एवं आम जनता के साथ विचार-विमर्श का प्रावधान रखा गया था. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद इसे हटा दिया गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरटीआई के तहत खुलासा, 91 फीसदी से ज्यादा चुनावी बॉन्ड एक करोड़ रुपये के खरीदे गए

इसके अलावा एक मार्च 2018 से 24 जुलाई 2019 के बीच खरीदे गए कुल चुनावी बॉन्ड में से 99.7 फीसदी बॉन्ड 10 लाख और एक करोड़ रुपये के थे. करीब 80 फीसदी चुनावी बॉन्ड नई दिल्ली में भुनाए गए हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi and the Union Minister for Finance, Corporate Affairs and Information & Broadcasting, Shri Arun Jaitley at the inauguration of the 10th Annual Convention of Central Information Commission, in New Delhi on October 16, 2015.

चुनावी बॉन्ड: कानून मंत्रालय, मुख्य चुनाव आयुक्त ने 1% वोट शेयर की शर्त पर आपत्ति जताई थी

हालांकि वित्त मंत्रालय ने इन आपत्तियों को दरकिनार किया और ये प्रावधान रखा कि वो रजिस्टर्ड राजनीतिक दल ही चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा ले सकने योग्य होंगे जिन्होंने पिछले लोकसभा या राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान एक फीसदी वोट प्राप्त किया हो.

Media Bol

मीडिया बोल: जेएनयू का सच और इलेक्टोरल बॉन्ड का सरकारी फ्रॉड!

वीडियो: मीडिया बोल के इस अंक में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन एवं आरबीआई द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड के विरोध से जुड़ी खबर पर सीपीआई(एमएल) की पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन, लेखक सोहेल हाशमी और वरिष्ठ पत्रकार नितिन सेठी से वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की बातचीत.

Mumbai: Arun Jaitley, Union Minister of Finance and Corporate Affairs and Urjit Patel, RBI Deputy Governor during the launch of Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana, Atal Pension Yojana and Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana in Mumbai on Saturday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad(PTI5_9_2015_000161B)

मोदी सरकार ने चुनावी बॉन्ड पर आरबीआई की सभी आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया था: रिपोर्ट

आरबीआई ने कहा था कि चुनावी बॉन्ड और आरबीआई अधिनियम में संशोधन करने से एक गलत परंपरा शुरू हो जाएगी. इससे मनी लॉन्ड्रिंग को प्रोत्साहन मिलेगा और केंद्रीय बैंकिंग क़ानून के मूलभूत सिद्धांतों पर ही खतरा उत्पन्न हो जाएगा.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयुक्तों के खाली पद भरने के लिए केंद्र-राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 15 फरवरी 2019 के फैसले में कहा था कि पारदर्शिता बरतते हुए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति समय पर की जानी चाहिए. हालांकि अभी भी केंद्र और राज्यों में सूचना आयुक्तों के कई पद खाली हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

20 महीने में बेचे गए 6128 करोड़ के चुनावी बॉन्ड, आधे से अधिक आम चुनाव से दो महीने पहले बिके

चुनावी और राजनीतिक सुधार के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के विश्लेषण के अनुसार मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कम से कम 12,313 चुनावी बॉन्ड बेचे.

CIC1-1200x359

सीआईसी ने वित्त मंत्रालय से कहा, राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों के बारे में जानकारी दें

वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में आरटीआई दाखिल कर राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के दौरान पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के संबंध में दानकर्ताओं द्वारा लिखे गए पत्र और इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के ड्राफ्ट की प्रति के बारे में जानकारी मांगी गई थी.

CIC1-1200x359

केंद्रीय सूचना आयोग में करीब 32 हज़ार अपील और शिकायतें लंबित, पिछले दो सालों में सर्वाधिक

कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोदी सरकार को सूचना का अधिकार क़ानून में संशोधन करने के बजाय सूचना आयोगों में आयुक्तों की नियुक्ति करनी चाहिए ताकि आरटीआई क़ानून और मज़बूत बने.

(फोटो: पीटीआई)

आरटीआई से खुलासा, दिल्ली में भुनाए गए करीब 80 फीसदी चुनावी बॉन्ड

मार्च 2018 से मई 2019 के बीच कुल 5,851.41 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए और इसमें से 4,715.58 करोड़ रुपये के बॉन्ड नई दिल्ली में भुनाए गए.

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो साभार: फेसबुक)

पूर्व सूचना आयुक्त की सांसदों से अपील, आरटीआई को खत्म करने वाले संशोधन का साथ न दें

सांसदों को लिखे एक पत्र में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, ‘मैं संसद के प्रत्येक सदस्य से अनुरोध करता हूं कि वे आरटीआई को बचाएं और सरकार को सूचना आयोगों और इस मूल्यवान अधिकार को मारने की अनुमति न दें.’

फोटो: पीटीआई

दो सालों में राजनीतिक दलों को मिला 985 करोड़ रुपये चंदा, 915 करोड़ अकेले भाजपा को: रिपोर्ट

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बीते दो वित्त वर्षों में राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट से मिलने वाले चंदे में 160 फीसदी का वृद्धि हुई है. साथ ही चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा दानकर्ताओं के पैन कार्ड समेत कई अनिवार्य जानकारियां नहीं दी गईं.

पूर्व चुनाव आयुक्त ​टीएस कृष्णमूर्ति. (फोटो: पीटीआई)

सरकारी ख़र्चे से कराए जाएं चुनाव, कॉरपोरेट चंदे पर लगे पाबंदी: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में 2004 में आम चुनाव कराने वाले टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि कॉरपोरेट चंदे के माध्यम से धन जुटाने का अपारदर्शी तरीका चिंता पैदा करने वाला है.

BJP congress

चुनावी बॉन्ड: भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य दलों ने चुनाव आयोग को नहीं दिया चंदे का ब्योरा

चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक की याचिका की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राजनीतिक दलों से चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे और इसके दाताओं की सूची 30 मई तक सीलबंद लिफाफे में चुनाव आयोग को सौंपने को कहा था.

(फोटो: पीटीआई)

चार मई तक 5,029 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बॉन्ड जारी किए गए: आरटीआई

एसबीआई ने बताया कि जारी किए गए 10,494 बॉन्ड में से 10,388 बॉन्ड यानी कि 5,011 करोड़ रुपये के बॉन्ड को को भुनाया जा चुका है.

(फोटो: रॉयटर्स)

99.8 फीसदी चुनावी बॉन्ड 10 लाख और एक करोड़ रुपये के ख़रीदे गए: आरटीआई

एसबीआई ने बताया कि मार्च 2018 से 24 जनवरी 2019 के बीच कुल 1,407.09 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे गए थे, जिसमें से 1,403.90 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड 10 लाख और एक करोड़ रुपये के थे.

(फोटो: पीटीआई)

चुनावी बॉन्ड के ज़रिये मिले चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को दें सभी राजनीतिक दल: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों को निर्देश दिया है कि 30 मई तक वे चुनावी बॉन्ड की राशि और इसके दानकर्ताओं के नाम समेत सभी जानकारी सीलबंद लिफाफे में चुनाव आयोग को दें. अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद लिया जाएगा.

चुनाव आयोग. (फोटो: रॉयटर्स)

मतदाताओं को राजनीतिक दलों को मिल रहे पैसे का स्रोत जानने का हक़ नहीं: अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल

सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड के ख़िलाफ़ याचिका की सुनवाई पूरी, शुक्रवार को आएगा फ़ैसला. सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि चुनावी बॉन्ड काले धन पर रोक लगाने के लिए एक प्रयोग है और लोकसभा चुनाव तक अदालत को इसमें दख़ल नहीं देना चाहिए.

(फोटो: पीटीआई)

हम इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं, बल्कि इससे जुड़े नाम उजागर न करने ख़िलाफ़ हैं: चुनाव आयोग

सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड पर रोक लगाने की याचिका पर हो रही सुनवाई में मोदी सरकार ने बॉन्ड देने वालों की गोपनीयता को बनाए रखने की बात कही, वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि पारदर्शिता के लिए दानकर्ताओं के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी. (फोटो: पीटीआई)

इलेक्टोरल बॉन्ड ने ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म’ को वैध बना दिया: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि पहले चुनाव आयोग को ये पता चलता था कि 20,000 रुपये से ऊपर का चंदा किसने और किस पार्टी को दिया है. लेकिन, इलेक्टोरल बॉन्ड की वजह से अब ये जानकारी पूरी नहीं मिलती है.

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘सूचना आयुक्तों के ख़िलाफ़ जांच के लिए प्रस्तावित समिति सूचना आयोग को ख़त्म करने का षड्यंत्र’

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि यह एक हास्यास्पद प्रस्ताव है, जिन अधिकारियों को सूचना आयुक्तों के निर्देशों का पालन करना होता है, उन्हें सीआईसी के ख़िलाफ़ शिकायतों की जांच करने वाला उच्च प्राधिकार बना दिया गया है. यह उस संस्था को खत्म करने का एक और षड्यंत्रकारी प्रयास है.

New Delhi: Monsoon clouds hover over the Parliament House, in New Delhi on Monday, July 23, 2018.(PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_23_2018_000111B)

चुनावी साल में इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री में 62 फीसदी की वृद्धि: आरटीआई

इस साल जनवरी और मार्च में बैंक ने 1,716.05 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड बेचे. वहीं, साल 2018 में मार्च, अप्रैल, मई, जुलाई, अक्टूबर और नवंबर के माह में 1,056.73 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे गए थे.

फोटो: पीटीआई

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, इलेक्टोरल बॉन्ड से राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता पर खतरा है

आयोग ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना और कॉरपोरेट फंडिंग को असीमित करने से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के पारदर्शिता पहलू पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. राजनीतिक दलों को अनियंत्रित विदेशी फंडिंग की अनुमति मिलेगी और इससे भारतीय नीतियां विदेशी कंपनियों से प्रभावित हो सकती हैं.

**FILE** New Delhi: File photo dated Nov 10, 2018, Interim director of the CBI M Nageshwara Rao speaks during the 'Synergy' programme in New Delhi. The Supreme Court on Tuesday, Feb. 12, 2019, held then acting CBI director Rao and the Director of Prosecution (DoP) of the agency S Bhasu Ram guilty of its contempt and asked them to remain seated in the courtroom till it rises as punishment. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI2_12_2019_000010B)

नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाने के मामले में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि नए सीबीआई निदेशक की नियुक्त हो जाने के कारण वे इस मामले में कोई दखल नहीं देंगे. इसके अलावा पीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के लिए दिशानिर्देश जारी करने से भी इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सूचना आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शिता हो, सिर्फ रिटायर्ड नौकरशाह न भरे जाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र एवं राज्य के सूचना आयोगों में खाली पदों पर छह महीने के भीतर भर्तियां की जानी चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और केंद्रीय सूचना आयुक्त का दर्जा केंद्रीय चुनाव आयुक्त के बराबर होना चाहिए.

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

चीफ जस्टिस, जस्टिस सीकरी के बाद जस्टिस रमना ने नागेश्वर राव मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया

जस्टिस एनवी रमना ने ये कहते हुए सुनवाई करने से मना कर दिया कि वे नागेश्वर राव के बेटी की शादी में गए थे. राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, सूचना आयुक्त के पद पर सिर्फ नौकरशाहों की ही नियुक्ति क्यों हुई

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई गई कमेटी ने 14 नामों को शॉर्टलिस्ट किया था जिसमें से 13 नौकरशाह थे. जिस पर जस्टिस सीकरी ने कहा कि हम नियुक्तियों को दोष नहीं दे रहे हैं. लेकिन गैर-नौकरशाह नाम भी थे, पर उनमें से किसी को भी नियुक्त नहीं किया गया.

जस्टिस एके सीकरी. (फोटो: पीटीआई)

चीफ जस्टिस के बाद अब जस्टिस सीकरी ने भी नागेश्वर राव मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया

एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दुष्यंत दवे से जस्टिस एके सीकरी ने कहा, ‘कृपया मेरी स्थिति को समझें. मैं ये मामला नहीं सुन सकता हूं.’

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

क्यों मोदी सरकार सूचना आयुक्त पद के लिए नौकरशाहों को तरजीह दे रही है

केंद्रीय सूचना आयोग में हाल ही में नियुक्त चार सूचना आयुक्त पूर्व नौकरशाह हैं. हालांकि आरटीआई क़ानून की धारा 12 (5) बताती है कि सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, संचार मीडिया, प्रशासन या शासन के क्षेत्र से नियुक्त किए जाने चाहिए.