पीडीपी

Indian policemen stand guard in a deserted street during restrictions in Jammu on August 6.	Photo : Reuters

कश्मीर का मन मरघट बन गया है…

कहा जा रहा है कि लोकतंत्र बहुमत से ही चलता है और बहुमत है, लेकिन ‘बहुमत’ मतलब बहु-मत हों, विभिन्न मत, लेकिन संसद में क्या मतों का आदान-प्रदान हुआ? एक आदमी चीख रहा था, तीन सौ से ज्यादा लोग मेजें पीट रहे थे. यह बहुमत नहीं, बहुसंख्या है. आपके पास मत नहीं, गिनने वाले सिर हैं.

Srinagar: A security personnel keeps vigil as a family rides on a scooter during restrictions in Srinagar, Thursday, Aug 8, 2019. Restrictions have been imposed in several districts of Jammu and Kashmir as a precautionary measure after the state lost its special status and was bifurcated on Tuesday as Parliament approved a resolution scrapping Article 370 of the Constitution and passed a bill to split the state into two Union Territories. (PTI Photo)(PTI8_9_2019_000020B)

जम्मू कश्मीर के हालात ‘बेहद संवेदनशील’, सरकार को समय मिलना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने संचार सेवाओं के साथ लगे अन्य प्रतिबंधों को हटाने के संबंध में केंद्र सरकार को तत्काल कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया. पीठ ने हालात में सुधार की उम्मीद करते हुए सुनवाई को 2 हफ्ते के लिए टाल दिया है.

Jammu: A Rapid Action Force (RAF) personnel stand guard during restrictions in Jammu, Friday, Aug 9, 2019. Restrictions have been imposed in several districts of Jammu and Kashmir as a precautionary measure after the state lost its special status and was bifurcated on Tuesday as Parliament approved a resolution scrapping Article 370 of the Constitution and passed a bill to split the state into two Union Territories. (PTI Photo)(PTI8_9_2019_000056A)(PTI8_9_2019_000161B)

जम्मू कश्मीर: सीआरपीएफ की हेल्पलाइन सेवा पर आए बड़ी संख्या में देश-विदेश से फोन

राज्य में फोन और इंटरनेट सेवा बंद होने के चलते रविवार को सीआरपीएफ द्वारा हेल्पलाइन सेवा ‘मददगार’ शुरू की गई है, जिस पर दो दिनों में 870 से ज़्यादा कॉल आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या घाटी में तैनात सुरक्षा बलों के परिजनों की भी है.

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फोटो: पीटीआई)

राहुल गांधी को कश्मीर दिखाने के लिए विमान भेजेंगे: राज्यपाल सत्यपाल मलिक

बीते हफ्ते कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि जम्मू कश्मीर से हिंसा की कुछ खबरें आई हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पारदर्शी तरीके से इस मामले पर चिंता व्यक्त करनी चाहिए.

Pellet Victims Mother SMHSH The Wire Photo

जम्मू कश्मीर: सरकार का ‘शांति’ का दावा, पर अस्पताल में पैलेट से घायलों की बढ़ती संख्या

वीडियो: अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार द्वारा घाटी में ‘शांति’ के दावे के बीच बीते कुछ दिनों में श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल में पैलेट गन से घायल हुए करीब दो दर्जन मरीज भर्ती हुए हैं

9 अगस्त, 2019 को श्रीनगर में एक अस्पताल के इमरजेंसी यूनिट के बाहर जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के खिलाफ नारे लगाते प्रदर्शनकारी (फोटो: रॉयटर्स)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीनगर की सड़कों पर उतरे हजारों लोग, गृह मंत्रालय ने नकारा

रॉयटर्स, बीबीसी, द वाशिंगटन पोस्ट और अल जजीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया. प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए सुरक्षा बलों ने पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

Residents cross a street during restrictions in Srinagar. (Photo:Reuters)

एडिटर्स गिल्ड ने जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदी पर जताई चिंता

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि जम्मू कश्मीर सहित पूरे देश की जनता के प्रति सरकार का यह कर्तव्य है कि वह प्रेस को स्वतंत्र तरीके से काम करने दे जो कि लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है.

भाजपा नेता निर्मल सिंह. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: जमीन और सरकारी नौकरियों में बाहरी लोगों पर कुछ प्रतिबंध चाहती है भाजपा

भाजपा के वरिष्ठ नेता निर्मल सिंह ने कहा कि उन्हें ‘स्थानीय’ प्रमाणपत्र जैसे किसी सुरक्षा की जरूरत है, जिससे राज्य में जमीन और नौकरियों के संबंध में स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा की जा सके.

Mohan Bhagwat-Amit Shah PTI

अनुच्छेद 370: संघ के सपने को पूरा करने के लिए संविधान को तार-तार कर दिया गया

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने न सिर्फ अनुच्छेद 370 की आत्मा को ख़त्म किया, बल्कि एक कदम आगे बढ़ते हुए पूरे राज्य के अस्तित्व को समाप्त करते हुए इसे दो हिस्सों में बांट दिया, जहां कानून-व्यवस्था और ज़मीन जैसे अहम मसलों पर फैसला नई दिल्ली में बैठे नौकरशाहों द्वारा लिया जाएगा.

Srinagar Police Reuters

कश्मीर के भूगोल पर तो कब्ज़ा किया जा सकता है, पर कश्मीरियत का क्या होगा?

असुरक्षा का भाव समाज के सैन्यकरण की स्वीकृति का अनिवार्य तत्व होता है. सांप्रदायिक राजनीति उसके भीतर भी असुरक्षा बोध खड़ा करती है जिसके पक्ष में वह दिखना चाहती है और उसके भीतर भी, जिसे वह शत्रु के रूप में चित्रित करती है. कश्मीर में असुरक्षा की भावना का इस्तेमाल कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीरी मुसलमानों दोनों के ख़िलाफ़ होता आ रहा है.

(फोटो: पीटीआई)

अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश के ख़िलाफ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस सुप्रीम कोर्ट पहुंची

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को असंवैधानिक, अमान्य एवं निष्प्रभावी घोषित करने का अनुरोध किया है.

Pellet Injured Kashmir Photo SV

कश्मीर में शांति के दावों के बीच पैलेट से घायल होने वालों की बढ़ती संख्या

ग्राउंड रिपोर्ट: अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार द्वारा घाटी में ‘शांति’ के दावे के बीच बीते कुछ दिनों में श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल में पैलेट गन से घायल हुए करीब दो दर्जन मरीज भर्ती हुए हैं.

भाकपा महासचिव डी राजा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी. (फोटो: पीटीआई)

कश्मीर में सब ठीक है, तो हमें जाने की इजाज़त क्यों नहीं दी गई: वाम नेता

शुक्रवार को जम्मू कश्मीर जा रहे माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा महासचिव डी. राजा को श्रीनगर हवाई अड्डे पर रोककर हिरासत में ले लिया गया था. इसके बाद उन्हें वापस दिल्ली लौटा दिया गया.

जम्मू कश्मीर के पूर्व निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद. (फोटो साभार: फोसबुक)

कश्मीर: नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बीच आतंकी फंडिंग मामले में राशिद इंजीनियर गिरफ़्तार

जम्मू-कश्मीर के पूर्व निर्दलीय विधायक राशिद इंजीनियर से बीते कुछ दिनों से कश्मीरी अलगाववादियों द्वारा लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद सहित पाकिस्तान से पैसे लेकर घाटी में तनाव फैलाने के संबंध में पूछताछ की जा रही थी.

Residents cross a street during restrictions in Srinagar. (Photo:Reuters)

आप कश्मीरियों को आंख दिखा सकते हैं, उनकी आंखों में देखकर बात करने का साहस नहीं रहा

जिन पर फैसले का असर होने वाला हो, उन्हें अंधेरे में रखकर लिया गया कोई भी निर्णय किसी भी तर्क से उनके हित में नहीं हो सकता. अपनी सैन्य शक्ति के बल पर अभिभावकत्व हासिल करना आपके दावे को किसी भी तरह जायज़ नहीं बना सकता.