प्रदर्शन

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

ट्रैक्टर रैली रोकने की याचिका पर कोर्ट ने कहा- पुलिस अपनी शक्तियां प्रयोग करने को स्वतंत्र

किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली या गणतंत्र दिवस समारोहों को बाधित करने की कोशिश करने के अन्य प्रदर्शनों पर रोक लगाने की केंद्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह क़ानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और फ़ैसला लेने का पहला हक़ पुलिस को है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसे प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए.

Amritsar: Farmers raise slogans during a protest in support of the nationwide strike, called by farmer unions to press for repeal of the Centres Agri laws, in Amritsar, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo)(PTI08-12-2020 000197B)

पंजाब: कृषि क़ानूनों के विरोध में भाजपा के दस वरिष्ठ नेता अकाली दल में शामिल

शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए नेताओं ने कहा कि उन्होंने पहले ही भाजपा को चेतावनी दी थी कि वे किसान विरोधी कृषि क़ानून वापस लें, लेकिन ऐसा करने के बजाय उल्टा क़ानूनों का समर्थन करने को कहा गया.

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन: किसान नेता के बाद कार्यकर्ता और टीवी पत्रकार को मिला एनआईए का समन

पिछले कुछ दिनों में एनआईए द्वारा कम से कम 13 लोगों को नोटिस भेजा गया है. इनमें किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, पंजाबी अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिंधू, पंजाब के एक टीवी पत्रकार जसबीर सिंह और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह शामिल हैं.

(फोटो: पीटीआई)

सरकार के साथ किसानों की नौवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा, अगली बैठक 19 जनवरी को

किसान संगठनों ने कहा कि वे गतिरोध को दूर करने के लिए सीधी वार्ता जारी रखने को प्रतिबद्ध हैं. दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नौवें दौर की वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. उन्होंने उम्मीद जताई कि 19 जनवरी को होने वाली बैठक में किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है.

बलबीर सिंह राजेवाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

आंदोलन को बदनाम करने के लिए फ़ैलाई जा रहीं अफ़वाहों पर विश्वास न करें किसान: बीकेयू नेता

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू राजेवाल) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों को खुला पत्र लिखकर कहा है कि किसानों की 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के बारे में अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं. कुछ किसान विरोधी ताकतें उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को नाकाम करने में शिद्दत से जुटी हैं.

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‘हमें नए कृषि क़ानून की ज़रूरत नहीं, पहले बुंदेलखंड पैकेज से बनीं मंडियों को शुरू कराए सरकार’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में बुंदेलखंड के सात ज़िलों में किसानों को कृषि बाज़ार मुहैया करवाने के उद्देश्य से 625.33 करोड़ रुपये ख़र्च कर ज़िला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कुल 138 मंडियां बनाई गई थीं. पर आज अधिकतर मंडियों में कोई ख़रीद-बिक्री नहीं होती, परिसरों में जंग लगे ताले लटक रहे हैं और स्थानीय किसान परेशान हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर किसान: क़ानून पर रोक नहीं, पूरा क़ानून वापस चाहिए

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए कृषि क़ानून पर रोक लगाए जाने के साथ चार सदस्यीय टीम गठित की गई है. इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारी किसानों से द वायर की बातचीत.

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किसान आंदोलन: टिकरी बॉर्डर पर किसानों के साथ कलाकारों ने एकजुटता दिखाई

वीडियो: हाल ही में प्रदर्शनकारी किसानों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए कई कलाकार टिकरी बॉर्डर पहुंचे. गीतकार गुरप्रीत सैनी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, अभिनेता आर्य बब्बर, टीवी एंकर जो बाथ, गायक रब्बी शेरगिल और अन्य कलाकारों ने किसानों का समर्थन किया है.

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कृषि क़ानूनों पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या संसद के काम में दख़ल दिया?

वीडियो: विवादित तीन कृषि क़ानूनों की संवैधानिकता जांचे बिना सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाने के क़दम की आलोचना हो रही है. विशेषज्ञों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का ये काम नहीं है. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

New Delhi: Farmers burn copies of the new farm laws as they celebrate Lohri festival during their ongoing protest against the central government, at Singhu border in New Delhi, Wednesday, Jan. 13, 2021. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI01 13 2021 000275B)

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि क़ानूनों की प्रतियां जलाईं

दिल्ली की विभिन्न ​सीमाओं पर लकड़ियां एकत्र कर जलाई गईं और उसके चारों तरफ घूमते हुए किसानों ने नए कृषि क़ानूनों की प्रतियां जलाईं. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने नारे लगाए, गीत गाए और अपने आंदोलन की जीत की प्रार्थना की. किसान एक महीने से ज्यादा समय से इन क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

कृषि क़ानूनों के विपरीत सुप्रीम कोर्ट कई विवादित क़ानूनों पर रोक लगाने से कर चुका है इनकार

विवादित तीन कृषि क़ानूनों की संवैधानिकता जांचे बिना सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाने के क़दम की आलोचना हो रही है. विशेषज्ञों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का ये काम नहीं है. इससे पहले ऐसे कई केस- जैसे कि आधार, चुनावी बॉन्ड, सीएए को लेकर मांग की गई थी कि इस पर रोक लगे, लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसा करने से मना कर दिया था.

Mumbai: People belonging to Sikh community block traffic at Sion -Panvel highway during the nationwide strike, called by agitating farmers to press for repeal of the Centres agri-laws, in Mumbai, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo/Shashank Parade)(PTI08-12-2020 000175B)

भाजपा नेताओं की तरह सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा- किसान आंदोलन में हुई खालिस्तानी घुसपैठ

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की इस स्वीकारोक्ति से पहले पिछले कुछ महीनों में कई भाजपा नेता किसान आंदोलन में खालिस्तानियों के शामिल होने का आरोप लगा चुके हैं. यहां तक कैबिनेट मंत्री रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और कृषि नरेंद्र तोमर ने भी इस संबंध में माओवादी और टुकड़-टुकड़े गैंग जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

सिंघु बॉर्डर पर किसानों की पेंटिंग बनाता कलाकार. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट की समिति के सदस्य सरकार समर्थक, उसके समक्ष पेश नहीं होंगे: किसान संगठन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए कृषि क़ानूनों पर रोक लगाते हुए किसानों से बात करने के लिए समिति बनाने के निर्णय पर किसान संगठनों ने कहा कि वे इस समिति को मान्यता नहीं देते. जब तक क़ानून वापस नहीं लिए जाते तब तक वे अपना आंदोलन ख़त्म नहीं करेंगे.

द (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि क़ानूनों पर रोक लगाई, किसानों से बातचीत के लिए समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन कृषि क़ानूनों पर केंद्र और किसानों के बीच गतिरोध दूर करने के उद्देश्य से बनाई गई समिति में भाकियू के भूपेंद्र सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घानवत, प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं. इन चारों द्वारा नए कृषि क़ानूनों का समर्थन किया गया है.

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन संभालने में नाकाम केंद्र, कृषि क़ानूनों पर रोक लगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ कई याचिकाओं को सुनते हुए सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि सरकार जिस तरह से मामले को संभाल रही है उससे वे बेहद निराश हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार कहे कि क़ानूनों को लागू करने पर रोक लगाएगी, तो अदालत इसके लिए समिति गठित करने को तैयार है.