प्रवासी मजदूर

(फाइल फोटो: पीटीआई)

बिहार चुनाव: ‘जिस सरकार ने हम लोगों के लिए कुछ नहीं किया, उसे बदलना चाहिए’

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में लॉकडाउन में जैसे-तैसे अपने गांव-घर पहुंचे मज़दूर अब आजीविका कमाने वापस लौट चुके हैं, जो बचे भी हैं उनका कहना है कि उनके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया. वे चाहते हैं कि अब बदलाव होना चाहिए और उन्हें उनके प्रदेश में ही काम-काज मिलना चाहिए.

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प्रवासी संकट: बिहार के मुजफ़्फ़रपुर स्टेशन पर पड़ी अपनी मृत मां को जगा रहा बच्चा अब कहां है?

वीडियो: कोरोना वायरस के चलते उपजे प्रवासी संकट के बीच बीते मई महीने में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें बिहार के मुजफ़्फ़रपुर रेलवे स्टेशन पर एक महिला बेसुध ज़मीन पर पड़ी हैं. उनके ऊपर एक चादर थी, जिसे खींचकर उनका छोटा-सा बच्चा उन्हें उठाने की कोशिश करता नज़र आया था.

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लॉकडाउन ख़त्म हो गया, मगर क्या प्रवासी मज़दूर और ग़रीबों की ज़िंदगी में कोई बदलाव आया?

वीडियो: कोरोना वायरस के मद्देनज़र लगाए गए लॉकडाउन के बाद अनलॉक फेज़ शुरू हो गया है, लेकिन कई दैनिक वेतनभोगी अभी भी लॉकडाउन की स्थिति में जी रहे हैं. लॉकडॉउन के दौरान हुए वित्तीय नुकसान से नहीं उबर पा रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

पहले इनकार करने के बाद अब सरकार ने माना, श्रमिक ट्रेनों में 97 लोगों की मौत हुई

बीते 14 सितंबर को शुरू हुई संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में कुल 10 सांसदों ने प्रवासी श्रमिकों की मौत से जुड़े सवाल पूछे थे, लेकिन सरकार ने ये जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया. श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय में राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि​ ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा जाता है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19 और लॉकडाउन के दौरान एक करोड़ से अधिक प्रवासी कामगार अपने राज्य लौटे: सरकार

लोकसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के चलते सबसे ज़्यादा प्रवासी मज़दूर उत्तर प्रदेश, उसके बाद बिहार फिर पश्चिम बंगाल लौटे हैं.

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लॉकडाउन: श्रमिकों की मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

वीडियो: द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

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कश्मीर और प्रवासी मज़दूरों पर मोदी सरकार के दो सबसे बड़े झूठ

वीडियो: द वायर द्वारा दायर आरटीआई आवेदनों से पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले करीब 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र के पास ये जानकारी होने के बावजूद संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया गया. वहीं, सरकार का कहना है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की घटनाएं कम हुई हैं. इस मुद्दे पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

Chennai: Migrants arrive at Central Railway Station to board a Shramik Special train for West Bengal, during ongoing COVID-19 lockdown, in Chennai, Wednesday, June 3, 2020. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI03-06-2020_000261B)

लॉकडाउन में श्रमिकों के मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

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अप्रैल से अगस्त के बीच क़रीब 2.1 करोड़ वेतनभोगी नौकरियां गईं: रिपोर्ट

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक़ जुलाई में लगभग 48 लाख और अगस्त में 33 लाख वेतनभोगी नौकरियां गई हैं. वहीं मासिक आंकड़ों के अनुसार देश की बेरोज़गारी दर अगस्त में बढ़कर 8.35 प्रतिशत हो गई, जो उससे पिछले महीने 7.40 प्रतिशत थी.

(फोटो साभार: indiarailinfo)

उत्तर प्रदेश: बांदा ज़िले में दो किसानों ने आत्महत्या की

एक मामला अतर्रा थाना इलाके का है, वहीं दूसरी घटना मरका थाना क्षेत्र का है. बताया जा रहा है कि दोनों किसानों पर क़र्ज़ था, जिसकी वजह से वे परेशान थे.

विशेष श्रमिक ट्रेन. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए रेलवे ने श्रमिकों से वसूला करोड़ों रुपये किराया

सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को दिए एक आदेश में कहा था कि ट्रेन या बस से यात्रा करने वाले किसी भी प्रवासी मज़दूर से किराया नहीं लिया जाएगा. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद रेलवे द्वारा श्रमिक ट्रेनों के यात्रियों से किराया लिया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

आत्मनिर्भर भारत: प्रवासी मज़दूरों के लिए आवंटित खाद्यान्न में से सिर्फ 33 फीसदी का वितरण हुआ

केंद्र द्वारा ‘सफल’ घोषित की गई इस योजना के तहत आठ लाख टन खाद्यान्न वितरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इसमें से सिर्फ 2.65 लाख टन राशन का वितरण हुआ है.

(फोटो: पीटीआई)

प्रवासी मज़दूर: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की ओर से हलफ़नामा दाख़िल नहीं होने पर नाराज़गी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मज़दूरों के लिए तीन अधिनियमों को लागू नहीं करने पर महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार द्वारा हलफ़नामा दायर नहीं करने को लेकर नाराज़गी जताई है. ये अधिनियम लॉकडाउन के कारण संकटग्रस्त प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए हैं.

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उत्तर प्रदेश: बांदा ज़िले में किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या की

मामला चिल्ला थाना क्षेत्र के पलरा गांव का है. चिल्ला थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक सात बीघे की कृषि भूमि गिरवी रखी थी, लेकिन जिस व्यक्ति ने भूमि गिरवी रखी, उसने बदले में उन्हें को पैसा नहीं दिया. संभवतः इसी से परेशान होकर उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की.

(फोटो साभार: indiarailinfo)

उत्तर प्रदेश: बांदा में कथित तौर पर आर्थिक तंगी से दो प्रवासी मज़दूरों ने फांसी लगाकर जान दी

पहली घटना बांदा ज़िले के अलिहा गांव और दूसरी घटना चिल्ला थाना क्षेत्र के दिघवट की है. एक मज़दूर हरियाणा में ईंट पथाई का काम करते थे, जबकि दूसरे दिल्ली में मज़दूरी करते थे. लॉकडाउन के बाद दोनों अपने अपने घर लौट आए थे.