प्रेस की आज़ादी

(फोटो: द वायर)

संपादकीय: द वायर के पांच साल

पांच साल पहले हमने कहा था कि हम नये तरीके से ऐसे मीडिया का निर्माण करना चाहते हैं जो पत्रकारों, पाठकों और जिम्मेदार नागरिकों का संयुक्त प्रयास हो. हम अपने इस सिद्धांत पर टिके रहे हैं और यही आगे बढ़ने में हमारी मदद करेगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

प्रेस की आजादी के दमन के लिए दुनियाभर की सरकारें कोरोना वायरस का इस्तेमाल कर रहीं: रिपोर्ट

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि मिस्र में बीते चार साल से मीडिया घरानों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, असंतुष्ट आवाजों को इस हद तक दबाया जा रहा है कि वहां पत्रकार होना एक अपराध बन गया है.

DW Freedom of Speech award

द वायर के सिद्धार्थ वरदराजन समेत विश्व के 17 पत्रकारों को मिला डीडब्ल्यू फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड

साल 2015 से डॉयचे वेले द्वारा यह सालाना सम्मान मीडिया के क्षेत्र में मानवाधिकार और बोलने की आज़ादी के प्रति प्रतिबद्धता से काम करने के लिए दिया जाता रहा है. इस बार यह विश्व भर के उन पत्रकारों को दिया जा रहा है, जिन्होंने कोरोना संकट के दौरान उनके देशों में सत्ता द्वारा उत्पीड़न और कार्रवाई का सामना किया है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर. (फोटो: पीटीआई)

भारत में प्रेस फ्रीडम की बुरी तस्वीर दिखाने वाले सर्वेक्षणों का करेंगे भंडाफोड़: जावड़ेकर

कांग्रेस ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर अपने संदेश में आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को नष्ट करने पर आमादा है. हम सभी पत्रकारों से कहना चाहेंगे कि डरो मत.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: रॉयटर्स)

लॉकडाउन: मीडिया में छंटनी, वेतन कटौती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

पत्रकारों के संगठनों का आरोप है कि कई मीडिया संस्थानों ने कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को नौकरी से हटाने, वेतन में कटौती करने और उन्हें बिना वेतन के छुट्टी पर जाने के नोटिस दिए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 142वें नंबर पर, दो पायदान फिसला

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर में उत्पन्न हुई स्थिति की वजह से भारत की रैकिंग पर काफी प्रभाव पड़ा है. ये रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है जब हाल ही में कश्मीर के दो पत्रकारों पर यूएपीए कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना वायरस: तमिल समाचार चैनल के 25 लोग संक्रमित पाए गए

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अनेक पत्रकारों के संक्रमित लोगों के संपर्क में आने पर चिंता जताते हुए सरकार तथा अन्य लोगों से अपील की है कि लॉकडाउन समाप्त होने तक सभी संवाददाता सम्मेलन स्थगित कर दिये जाएं तथा राज्य सरकार सभी पत्रकारों की कोरोना जांच युद्धस्तर पर कराए.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना वायरस: मुंबई में 171 में से 53 मीडियाकर्मी से संक्रमित पाए गए

मुंबई के मामलों के सामने आने के बाद ही सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अखबार और मीडिया प्रतिष्ठानों को एक सलाह जारी की जा रही है. देश में कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र अब तक संक्रमण के 4,666 मामले सामने आ चुके हैं और 232 लोग जान गंवा चुके हैं.

New Delhi: A cyclist makes way through rain in the backdrop of the India Gate, during a nationwide lockdown as a preventive measure against the coronavirus pandemic, in New Delhi, Friday, April 17, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI17-04-2020 000253B)

एक डरावने दौर से गुज़र रहा है भारत का लोकतंत्र

देश में एक लंबी और मुश्किल लड़ाई के बाद हासिल किए गए लोकतांत्रिक अधिकार ख़तरे में हैं क्योंकि सत्ताधारी दल द्वारा उनका दुरूपयोग किया जा रहा है.

Bikaner: People watch Prime Minister Narendra Modi's address to the nation on coronavirus pandemic in Bikaner, Thursday, March 19, 2020. (PTI Photo)(PTI19-03-2020_000246B)

कोई भी लोकतंत्र मीडिया का मुंह बंद करके वैश्विक महामारी से नहीं लड़ रहा है: एडिटर्स गिल्ड

इस हफ़्ते की शुरुआत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि मीडिया कोरोना वायरस संबंधी कोई भी जानकारी छापने या दिखाने से पहले सरकार से इसकी पुष्टि कराए. इसके बाद अदालत ने मीडिया को निर्देश दिया कि वे ख़बरें चलाने से पहले उस घटना पर आधिकारिक बयान लें.

Australia-Newspapers-ANI

ऑस्ट्रेलिया के अख़बारों ने मीडिया पर प्रतिबंधों के विरोध में पहला पन्ना ख़ाली छोड़ा

जून महीने में ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के मुख्यालय और न्यूज़ कॉर्प के एक पत्रकार के घर पर छापेमारी के बाद ऑस्ट्रेलिया के ‘राइट टू नो कोएलिशन’ अभियान के तहत अख़बारों ने यह क़दम उठाया है.

फोटो: द वायर

जब पत्रकार सत्ता की भाषा बोलने लगें…

सरकार के हस्तक्षेप या प्रबंधन के दबाव का आरोप लगाना एक कमज़ोर बहाना है- मीडिया पेशेवरों ने स्वयं ही ख़ुद को अपने आदर्शों से दूर कर लिया है. वे बेआवाज़ को आवाज़ देने या सत्ताधारी वर्ग से जवाबदेही की मांग करने वाले के तौर पर अपनी भूमिका नहीं देखते हैं. अगर वे खुद व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, तो वे व्यवस्था से सवाल कैसे पूछेंगे?

(फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने तीन अख़बारों को सरकारी विज्ञापन देना बंद किया

सामूहिक रूप से 2.6 करोड़ मासिक पाठक वर्ग वाले तीनों बड़े अख़बार समूहों का कहना है कि मोदी के पिछले महीने लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से चुनकर सत्ता में आने से पहले ही उनके करोड़ों रुपये के विज्ञापनों को बंद कर दिया गया.

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आपातकाल: नसबंदी से मौत की ख़बरें न छापी जाएं

आपातकाल के 44 साल बाद इन सेंसर-आदेशों को पढ़ने पर उस डरावने माहौल का अंदाज़ा लगता है जिसमें पत्रकारों को काम करना पड़ा था, अख़बारों पर कैसा अंकुश था और कैसी-कैसी ख़बरें रोकी जाती थीं.

फोटो: द वायर

प्रेस की आज़ादी के मामले में भारत दो पायदान फिसला, चुनाव का समय पत्रकारों के लिए बेहद ख़तरनाक

रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स की ओर से जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में से 140वें स्थान पर है. 2018 में अपने काम की वजह से भारत में कम से कम छह पत्रकारों की मौत हुई थी.