प्रेस की स्वतंत्रता

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

जम्मू कश्मीर की नई मीडिया नीति प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाली है: प्रेस काउंसिल

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने बीते दिनों राज्य की नई मीडिया नीति को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत प्रशासन प्रकाशित-प्रसारित सामग्री की निगरानी करेगा और यह तय करेगा कि कौन-सी ख़बर ‘फेक, एंटी सोशल या एंटी-नेशनल रिपोर्टिंग’ है. प्रेस काउंसिल ने इस बारे में प्रशासन से जवाब मांगा है.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए राज्य आपराधिक मानहानि का इस्तेमाल नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट

मीडिया संगठनों के ख़िलाफ़ तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिका को मद्रास हाईकोर्ट ने ख़ारिज करते हुए कहा कि राज्य को आपराधिक मानहानि के मुकदमे दायर करने में बेहद संयम और परिपक्वता दिखानी चाहिए.

समाचार पोर्टल के संस्थापक एंड्रयू सैम राजा पांडियन.

कोरोना: झूठी और उकसावे वाली ख़बरों के आरोप में अंग्रेज़ी समाचार पोर्टल के संस्थापक गिरफ़्तार

कोयंबटूर के माकपा सांसद ने समाचार पोर्टल के संस्थापक की गिरफ़्तारी की निंदा की है. पत्रकार संघों ने गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कहा कि यह प्रेस की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ है.

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ऑस्ट्रेलिया के अख़बारों ने मीडिया पर प्रतिबंधों के विरोध में पहला पन्ना ख़ाली छोड़ा

जून महीने में ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के मुख्यालय और न्यूज़ कॉर्प के एक पत्रकार के घर पर छापेमारी के बाद ऑस्ट्रेलिया के ‘राइट टू नो कोएलिशन’ अभियान के तहत अख़बारों ने यह क़दम उठाया है.

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मोदी सरकार ने तीन अख़बारों को सरकारी विज्ञापन देना बंद किया

सामूहिक रूप से 2.6 करोड़ मासिक पाठक वर्ग वाले तीनों बड़े अख़बार समूहों का कहना है कि मोदी के पिछले महीने लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से चुनकर सत्ता में आने से पहले ही उनके करोड़ों रुपये के विज्ञापनों को बंद कर दिया गया.

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आपातकाल: नसबंदी से मौत की ख़बरें न छापी जाएं

आपातकाल के 44 साल बाद इन सेंसर-आदेशों को पढ़ने पर उस डरावने माहौल का अंदाज़ा लगता है जिसमें पत्रकारों को काम करना पड़ा था, अख़बारों पर कैसा अंकुश था और कैसी-कैसी ख़बरें रोकी जाती थीं.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with BJP President Amit Shah during a press conference at the party headquarter in New Delhi, Friday, May 17, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI5_17_2019_000094B)

पांच साल में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए मोदी, लेकिन किसी सवाल का जवाब नहीं दिया

जब एक पत्रकार ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, ‘हम तो डिसिप्लिन्ड सोल्जर हैं. पार्टी अध्यक्ष हमारे लिए सब कुछ होते हैं.’ शाह ने भी कहा कि प्रधानमंत्री को सवालों का जवाब देने की ज़रूरत नहीं है.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

प्रेस पर प्रतिबंध लगाने से भारत एक तानाशाह देश बन जाएगा: मद्रास उच्च न्यायालय

मानहानि के एक मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रेस द्वारा कुछ अवसरों पर गड़बड़ियां हो सकती हैं लेकिन लोकतंत्र के व्यापक हित को देखते हुए इन्हें नज़रअंदाज़ करने की ज़रूरत होती है.

फोटो साभार: cobrapost.com

दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया कोबरापोस्ट की डॉक्यूमेंट्री सार्वजनिक करने से रोकने वाला आदेश

बीते मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कोबरापोस्ट के ऑपरेशन- 136 पर दैनिक भास्कर समूह की याचिका के बाद रोक लगा दी थी. शुक्रवार को इस आदेश को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि कथित अपमानजनक सामग्री दुर्भावनापूर्ण या झूठी है, तब तक एकतरफा रोक का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए.

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क्या भारत के बड़े अख़बार प्रेस की आज़ादी पर छोटे अख़बारों के हक़ में संपादकीय लिख सकते हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार प्रेस पर हमला करते रहते हैं. अमेरिकी प्रेस ने इसके ख़िलाफ जम कर लोहा लिया है. अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अधिक अख़बारों ने एक ही दिन प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi visiting the Terracota Warriors Museum, in Xi'an, Shaanxi, China on May 14, 2015.

क्या आपातकाल को दोहराने का ख़तरा अब भी बना हुआ है?

आपातकाल कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि सत्ता के अतिकेंद्रीकरण, निरंकुशता, व्यक्ति-पूजा और चाटुकारिता की निरंतर बढ़ती गई प्रवृत्ति का ही परिणाम थी. आज फिर वैसा ही नज़ारा दिख रहा है. सारे अहम फ़ैसले संसदीय दल तो क्या, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की भी आम राय से नहीं किए जाते, सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री की चलती है.

फोटो साभार: cobrapost.com

कोबरापोस्ट के स्टिंग में पत्रकारिता का सौदा करने को तैयार दिखे तमाम मीडिया संस्थान

कोबरापोस्ट के स्टिंग ‘ऑपरेशन 136’ की दूसरी कड़ी में देश के कई नामचीन मीडिया संस्थान सत्ताधारी दल के लिए चुनावी हवा तैयार करने के लिए आध्यात्मिकता और धार्मिक प्रवचन के ज़रिये हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए सहमत होते नज़र आए.

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पेड न्यूज़ को लेकर कोबरापोस्ट के खुलासे से पहले दैनिक भास्कर पहुंचा हाईकोर्ट, मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने वेब पोर्टल कोबरापोस्ट के उस खुलासे पर रोक लगा दी है, जिसमें वह पेड न्यूज़ से जुड़ी अपनी खोजी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने वाला था.

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भारत में सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया संस्थानों को परेशान किया गया: अमेरिकी विदेश मंत्रालय

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने की ऐसी कोशिश हाल के वर्षों में पहले अनुभव नहीं की गई.

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कोबरापोस्ट का ख़ुलासा, पैसे के एवज़ में ख़बरें छापने को राज़ी दिखे देश के कई मीडिया हाउस

ख़ुफ़िया कैमरे की मदद से किए गए कोबरापोस्ट के ‘ऑपरेशन 136’ में देश के कई नामचीन मीडिया संस्थान सत्ताधारी दल के लिए चुनावी हवा तैयार करने को राज़ी होते नज़र आ रहे हैं.