फांसी की सजा

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे. (फोटो: रॉयटर्स)

श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान आठ लोगों की हत्या के दोषी सैनिक की मौत की सज़ा माफ़

वर्ष 2000 में तमिल बहुल उत्तरी प्रांत में तैनाती के दौरान श्रीलंकाई सैनिक सुनील रत्नायके एक बच्चे समेत आठ नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया गया था. 2015 में उच्च न्यायालय ने उन्हें हत्या का दोषी ठहराया था. राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने सैनिक की सज़ा माफ़ कर दी है.

(फोटो: रॉयटर्स)

साल 2018 में विश्वभर में 690 लोगों को दी गई मौत की सज़ा: मानवाधिकार संगठन

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से कहा गया है कि साल 2018 के अंत तक 142 देशों ने मौत की सज़ा को ख़त्म कर दिया है.

जुलाई 2016 में आतंकी हमले का शिकार होने वाला बांग्लादेश का होली आर्टिशन कैफे. (फोटो: रॉयटर्स)

बांग्लादेश: 2016 के कैफे आतंकी हमला मामले में सात दोषियों को फांसी की सजा

एक जुलाई, 2016 को ढाका के गुलशन इलाके में स्थित होली आर्टिशन कैफे में इस्लामिक स्टेट के हमले में एक भारतीय लड़की समेत 20 लोग मारे गए थे. हमले में मारे गये 16 अन्य विदेशी नागरिकों में नौ इतालवी, सात जापानी नागरिक शामिल थे.

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राजोआना को फांसी से राहत और राजकीय क्षमा पर कुछ विचार

वीडियो: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना को मिली फांसी की सज़ा उम्रक़ैद में बदल दी गई है. इस मुद्दे पर प्रो. अपूर्वानंद का नज़रिया.

बलवंत सिं​ह राजोआना और बेअंत सिंह. (फोटो: विकिपीडिया/पीटीआई)

पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी की मौत की सज़ा उम्रक़ैद में बदली गई: गृह मंत्रालय

चंडीगढ़ में 31 अगस्त 1995 को सिविल सचिवालय के बाहर एक विस्फोट में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की मौत हो गई थी. बलवंत सिंह राजोआना ने इस हमले की साज़िश रची थी. बेअंत​ सिंह के पोते और कांग्रेस सांसद ने रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्र के फैसले पर उठाया सवाल.

आसिया बीबी. (फोटो साभार: www.thenational.ae)

पाकिस्तान: ईशनिंदा के आरोप से ईसाई महिला को बरी किए जाने पर हिंसा और प्रदर्शन

ईशनिंदा के आरोप से पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी की गईं ईसाई महिला आसिया बीबी मौत की धमकियों के चलते पाकिस्तान छोड़ सकती हैं. आसिया के पति ब्रिटेन से पाकिस्तान पहुंचे.

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12 साल से छोटी बच्चियों से बलात्कार पर फांसी तक की सज़ा दिलाने वाला विधेयक मंजूर

12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए दंड को सात वर्ष के न्यूनतम कारावास से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है. 16 वर्ष से कम की लड़की से बलात्कार में सज़ा 20 वर्ष से कम नहीं होगी और इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा.

जस्टिस मदन बी. लोकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/National Commission for Protection of Child Rights)

जघन्य अपराधों के हर मामले में किशोर मुजरिमों को सज़ा-ए-मौत उचित नहीं: जस्टिस लोकुर

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर ने बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों को संवेदनशील बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा हम इस देश में यूं बर्बर नहीं हो सकते.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 233: आधार और फांसी की सज़ा

जन गण मन की बात की 233वीं कड़ी में विनोद दुआ आधार को फोन से लिंक न करने के सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण और फांसी की सज़ा पर चर्चा कर रहे हैं.