फेसबुक

(फोटोः रॉयटर्स)

53 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स का फेसबुक डेटा लीक, भारत के 60 लाख से अधिक लोग शामिल: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार, 106 देशों के लोगों के फोन नंबर, फेसबुक आईडी, पूरे नाम, स्थान, जन्मतिथि और ईमेल पते ऑनलाइन सार्वजनिक हो गए हैं. भारत में 10 दिनों के भीतर दूसरा ऐसा मौका है, जब किसी कंपनी के यूज़र्स का डेटाबेस के लीक होने का दावा किया गया है. बीते 30 मार्च को गुड़गांव स्थित मोबाइल भुगतान और डिजिटल वॉलेट कंपनी मोबिक्विक के 10 करोड़ यूज़र्स की जानकारी कथित रूप से लीक हो गई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

एडिटर्स गिल्ड ने प्रधानमंत्री से नए डिजिटल मीडिया नियमों को स्थगित करने की अपील की

सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए नियमों को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि ये नियम दमनकारी और प्रेस की आज़ादी के प्रतिकूल हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

विभिन्न हाईकोर्ट में ओटीटी मंचों के नियमन से जुड़ीं याचिकाओं की सुनवाई पर शीर्ष अदालत की रोक

ये याचिकाएं नेटफ्लिक्स, अमेज़ॉन प्राइम वीडियो, हॉटस्टार जैसे ओटीटी मंचों के नियमन और कामकाम को लेकर दाखिल की गई हैं. याचिकाओं में विभिन्न ओटीटी, स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया मंचों पर सामग्री की निगरानी और प्रबंधन के लिए एक उचित बोर्ड, संस्था और एसोसिएशन बनाने की मांग की गई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

केंद्र का दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह, वॉट्सऐप को नई प्राइवेसी नीति लागू करने से रोकें

फेसबुक के स्वामित्व वाले सोशल नेटवर्किंग मंच वॉट्सऐप ने जनवरी में अपनी नई निजता नीति को 8 फरवरी से लागू करने की घोषणा की थी, जिसे दुनियाभर में कड़ी आलोचना के बाद 15 मई तक टाल दिया गया था.

(फोटो साभार: पिक्साबे)

फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं: बाल अधिकार आयोग प्रमुख

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, वॉट्सऐप और यूट्यूब को भारत में व्यवसाय करना है तो बच्चों के अधिकार के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, अन्यथा इनको इस तरह से चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

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मीडिया बोल: सच लिखने-बोलने का छोटा कोना भी नहीं छोड़ना चाहती सरकार!

वीडियो: मंत्रियो के एक समूह और ‘सत्ता से सहमत’ कुछ मीडियाकर्मियों की बैठकों की एक रिपोर्ट पर बीते दिनों काफी चर्चा हुई. इस बीच सरकार डिजिटल मीडिया मंचों के नियमन के नाम पर कुछ कड़े नियम ले आई. इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार आलोक जोशी और द वायर के अजय आशीर्वाद से विस्तृत चर्चा कर रहे हैं उर्मिलेश.

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डिजिटल मीडिया नियमों को चुनौती देने वाली द वायर की याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

केंद्र के नए सोशल मीडिया नियमों के दायरे में ऑनलाइन समाचार प्रकाशक भी हैं. द वायर और द न्यूज़ मिनट की संस्थापक धन्या राजेंद्रन द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि ये नियम डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, जो इसके मूल सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 के विपरीत है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नए डिजिटल मीडिया नियमों से प्रेस की आज़ादी को धक्का लगेगा, सरकार वापस ले: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि ‘बेलगाम’ सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के नाम पर सरकार मीडिया को मिली संवैधानिक सुरक्षा को छीन नहीं सकती है. गिल्ड ने इस बात को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की है कि इन नियमों के तहत सरकार को असीमित शक्तियां दे दी गई हैं.

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जीओएम रिपोर्ट: ‘मित्र’ मीडिया ने दी हिंदुत्व प्रोपगेंडा व स्वतंत्र मीडिया को चुप कराने की सलाह

एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आए नौ मंत्रियों के समूह द्वारा तैयार 97 पन्नों के दस्तावेज़ का मक़सद मीडिया में मोदी सरकार की छवि को चमकाना और स्वतंत्र मीडिया को चुप कराना है. बताया गया है कि यह रिपोर्ट सरकार समर्थक कई संपादकों और मीडियाकर्मियों के सुझावों पर आधारित है.

(फोटो: द वायर)

संपादकीय: केंद्र के नए नियम स्वतंत्र मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास हैं

अनुचित तरीके से बनाए गए नए सोशल मीडिया नियम समाचार वेबसाइट्स को सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के साथ खड़ा करते हैं. इन्हें वापस लिया ही जाना चाहिए.

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स्वतंत्र मीडिया को बेअसर करने की मंत्रियों की मंत्रणा के बाद बनाए गए नए डिजिटल मीडिया नियम

कारवां पत्रिका ने नौ मंत्रियों के एक समूह की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि 2020 के मध्य में इन सभी ने स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को प्रभावहीन बनाने के लिए ख़ाका तैयार किया था. इसमें ऐसे लोगों को ख़ामोश करने की योजना बनाई गई थी, जो सरकार के ख़िलाफ़ ख़बरें लिख रहे हैं या उसका एजेंडा नहीं मान रहे हैं.

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मणिपुर: विवादित डिजिटल मीडिया नियम के तहत न्यूज़ पोर्टल को जारी नोटिस वापस लिया गया

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए नियमों के तहत सबसे पहली नोटिस मणिपुर के न्यूज पोर्टल द फ्रंटियर मणिपुर को उसके एक कार्यक्रम को लेकर जारी किया गया है. पोर्टल को सभी संबंधित दस्तावेज़ों की प्रति मुहैया कराने को कहा गया था, जो इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करते हों.

(फोटो: रॉयटर्स)

आईएनएस ने गूगल से भारतीय अख़बारों की सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने को कहा

गूगल इंडिया के देश में प्रबंधक संजय गुप्ता को लिखे पत्र में इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी की ओर से कहा गया है कि अख़बरों के छपी ख़बरों के लिए गूगल को भुगतान करना चाहिए. अख़बार हज़ारों पत्रकारों को नियुक्त करते हैं और उनके ज़रिये ख़बरें प्राप्त करते हैं. इसमें काफी ख़र्च होता है.’

(फोटो साभार: nominalize/Pixabay)

सोशल, डिजिटल मीडिया और ओटीटी मंचों पर बढ़ेगी निगरानी, मोदी सरकार लाई नए नियम

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग रोकने के लिए नए दिशा-निर्देशों की घोषणा की, जिनके तहत संबंधित कंपनियों के लिए एक पूरा शिकायत निवारण तंत्र बनाना होगा. साथ ही ख़बर प्रकाशकों, ओटीटी मंचों और डिजिटल मीडिया के लिए ‘आचार संहिता’ और त्रिस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली लागू होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)

ऑस्ट्रेलिया: न्यूज़ मीडिया क़ानून में संशोधन, गूगल व फेसबुक को समाचारों के लिए करना होगा भुगतान

ऑस्ट्रेलिया की संसद ने डिजिटल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों गूगल और फेसबुक को समाचार के लिए उचित भुगतान करने के संबंध में लाए जा रहे न्यूज़ मीडिया बारगेनिंग कोड में संशोधन किया है. पिछले सप्ताह इस क़ानून का प्रस्ताव आने के बाद फेसबुक ने देश में समाचार साझा करने पर पाबंदी लगा दी थी.