बंटवारा

New Delhi: People from various organisations stage a protest against Citizenship Amendment Bill (CAB) at Jantar Mantar, in New Delhi, Tuesday, Dec. 10, 2019. The Bill seeks to grant Indian citizenship to non-Muslim refugees, who escaped religious persecution in Pakistan, Bangladesh and Afghanistan. The legislation was passed in the Lower House of the Parliament. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI12_10_2019_000213B)

साल 2019 के लिए ऑक्सफोर्ड का हिंदी शब्द बना ‘संविधान’

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने कहा कि कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का सरकार का निर्णय एक ऐसा मुद्दा था जिसके कारण संविधान काफी चर्चा में रहा और इसने अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचा.

New Delhi: Members of various organizations stage a protest march from Mandi House to Jantar Mantar against the Citizenship Amendment Act (CAA), at Jantar Mantar in New Delhi, Tuesday, Dec. 24, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)  (PTI12_24_2019_000112B)

भारतीय संविधान की 70वीं वर्षगांठ और ‘हम भारत के लोग’

पिछले 40-45 वर्षों में संविधान की नींव कई बार हिली और ‘हम भारत के लोगों’ को तोड़ने के कई प्रयास किए गए, पर ‘हम लोग’ की परिभाषा अपरिवर्तित ही रही. कई सरकारें आईं-गईं पर एक समूचे समुदाय को देश की मुख्यधारा से काटने का प्रयास नहीं हुआ, लेकिन आज परिस्थितियां और हैं.

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‘गांधी और जिन्ना ने एक दूसरे को समझा होता तो देश का इतिहास कुछ और होता’

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका शीला रेड्डी से उनकी किताब ‘मिस्टर एंड मिसेज़ जिन्नाः द मैरिज दैट शूक इंडिया’ को लेकर रीतू तोमर से बातचीत.

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हिंदी साहित्य ने विभाजन को कैसे देखा

आज़ादी के 72 साल: जहां हिंदी लेखकों ने विभाजन पर बार-बार लिखा, हिंदी कवि इस पर तटस्थ बने रहे. कईयों ने आज़ादी मिलने के जश्न की कवितायें तो लिखीं, लेकिन देश बंटने के पीड़ादायी अनुभव पर उनकी चुप्पी बनी रही.

Pakistani Rangers and Indian Border Security Force personnel (obscured) lower the flags of the two countries during a daily flag lowering ceremony at the India-Pakistan joint border at Wagah, December 14, 2006. REUTERS/Mian Khursheed/Files

आज़ादी या बंटवारा?

आज़ादी के 72 साल: विभाजन का भय धीरे-धीरे आज़ादी के विचार को विस्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ये हालात अपने भीतर काफी बड़े ख़तरे की आहट थामे हुए हैं.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा, ताजमहल की ख़ूबसूरती को बहाल करो या फिर इसे गिरा दो

पीठ ने ताजमहल और पेरिस में एफिल टावर के बीच तुलना करते हुए कहा कि यह स्मारक संभवत: ज़्यादा ख़ूबसूरत है, लेकिन भारत वहां के ताजमहल के मौजूदा हालातों की वजह से लगातार पर्यटक और विदेशी मुद्रा गंवा रहा है.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

ताजमहल से नफ़रत ऐसे बर्बर युग में ले जाएगी जहां से हम बहुत पहले निकल चुके हैं

ताजमहल को कलंक बताने वालों को समझ नहीं आता कि इतिहास के 800 साल हटाने पर हिंदुस्तान में जो बचेगा, वह अखंड नहीं बल्कि खंडित भारत होगा.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

आजकल भारत में जो हो रहा है, वह ढर्रा पाकिस्तान का है

ऐसी पीढ़ी तैयार करने की कोशिश हो रही है जो नफ़रत पर आधारित हो. पहले इतिहास में दुश्मन पैदा करें फिर उससे लड़ें. ऐसे इतिहास का असर हम पाकिस्तान को देखकर समझ सकते हैं.

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सरोजिनी नायडू के इमाम हुसैन को राजनीति ने शिया मुसलमान बना दिया

हमारी बदनसीबी ही है कि जिस सोच ने देश को तीन टुकड़ों में बांट दिया, आज भी हमारे दिमागों में काई की तरह जमी हुई है और सड़ांध फैला रही है.

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हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1947 में हुआ बंटवारा आज भी जारी है

निदा किरमानी मूल रूप से हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों से हैं. वे सोचती थीं कि क्यों कभी उन्हें इनमें से किसी एक को चुनना होगा? पर बीते दिनों उन्हें एक देश चुनने पर मजबूर होना पड़ा.

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सभ्य समाज में मूल अधिकारों के लिए बंदूकों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए: गांधी

इतिहासकार सुधीर चंद्र ने अपनी किताब ‘गांधी: एक असंभव संभावना ‘में गांधी के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला है.

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कृष्णा सोबती: स्त्री मन की गांठ खोलने वाली कथाकार

‘मित्रो मरजानी’ के बाद सोबती पर पाठक फ़िदा हो उठे थे. ये इसलिए नहीं हुआ कि वे साहित्य और देह के वर्जित प्रदेश की यात्रा पर निकल पड़ी थीं. ऐसा हुआ क्योंकि उनकी महिलाएं समाज में तो थीं, लेकिन उनका ज़िक्र करने से लोग डरते थे.