बलात्कार

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम सरकार ने समूचे राज्य को छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

Partners of law in development Rape survivors

‘बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच में दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाता’

बलात्कार के मामलों में 2013 के संशोधन के बाद होने वाली कार्यवाही में बहुत हद तक सुधार हुआ है लेकिन अब भी पीड़ित को उत्पीड़न सहना पड़ता है.

Indian Women Reuters

‘औरतों की ज़िंदगी कोख के अंधेरे से क़ब्र के अंधेरे तक का सफ़र है’

‘किसी समाज व शासन की सफलता इस तथ्य से समझी जानी चाहिए कि वहां नारी व प्रकृति कितनी संरक्षित व पोषित है, उन्हें वहां कितना सम्मान मिलता है.’

Ram Rahim Letter

जब शोषण का शिकार हुई साध्वी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी थी चिट्ठी

गुरमीत राम रहीम के डेरे में रहने वाली साध्वी का यह अनाम पत्र सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने 2002 में अपने अख़बार ‘पूरा सच’ में प्रकाशित किया था, जिसके बाद यह मामला सामने आया.

भाजपा सांसद साक्षी महाराज (फोटो: पीटीआई)

हिंसा बढ़ी तो सिर्फ डेरा नहीं, अदालत भी ज़िम्मेदार होगा: साक्षी महाराज

डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद भाजपा सांसद साक्षी महाराज उनके समर्थन में उतर आए हैं.

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‘उसे देखकर ऐसा लगता नहीं कि उसके साथ बलात्कार हुआ है’

दिल्ली हाईकोर्ट की वरिष्ठ वक़ील रेबेका जॉन ने वो बातें साझा की हैं, जो उन्होंने बलात्कार के मामलों की अदालती कार्यवाही के दौरान सुनीं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रायटर्स)

बलात्कार के मामलों की सुनवाई दो महीने में पूरी करना संभव नहीं: रिपोर्ट

कानून मंत्रालय द्वारा कराए एक अध्ययन में कहा गया है कि पीड़िता का ही बयान आने में औसतन आठ महीने का वक्त लग जाता है.

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‘तृणमूल समर्थक अपनी बहू-बेटियों को बंगाल भेजकर देखें, 15 दिन में बलात्कार हो जाएगा’

रूपा गांगुली ने कहा, ‘अगर बंगाल के बाहर के टीएमसी समर्थक अपनी बहू-बेटियों-बीवियों और मांओं को ममता बनर्जी का मेहमान बनाये बिना बंगाल भेज दें और 15 दिन में उनका बलात्कार न हो जाए, तब आकर मुझे बताना.’

फोटो साभार: Domi/ Flickr (CC BY-NC 2.0)

यूपी: बलात्कारियों को पकड़ने के एवज में पुलिसकर्मी ने पीड़िता से की संबंध बनाने की मांग

सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई इस महिला का कहना है कि पुलिसकर्मी की अनुचित मांगें न मानने पर उसने मामले को बंद करने के लिए क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है.

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स्त्री योनि पर हिंसा को लालायित बीमार मर्दवादी बाज़ार

एक ऐशट्रे है, जिस पर एक निर्वस्त्र स्त्री की आकृति बनी हुई है, इस पर जलती हुई सिगरेट बुझाई जाएगी. क्या यह मानसिकता किसी भी तरीक़े से उस मानसिकता से कम है, जब बलात्कार करके, बलात्कारी उस लड़की की योनि में कांच, पत्थर डाल देते हैं?

Indresh Kumar PTI

संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा, जो लोग गोमांस खाते हैं उनका कोई मानवाधिकार नहीं होता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने जयपुर में आयोजित संघ के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में गाय, गोमांस और अन्य मुद्दों पर बयान दिए.

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हरियाणा: गैंगरेप के बाद महिला की बर्बरतापूर्ण हत्या, शव को कुत्तों ने नोचा

एक तरफ़ महिला सुरक्षा के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चल रहे हैं, दूसरी तरफ़, महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन अपराध और हिंसा में कमी नहीं आ रही है.

The Union Home Minister, Shri Rajnath Singh paying tributes to the martyred CRPF personnel, in Raipur, Chhattisgarh on April 25, 2017.
The Chief Minister of Chhattisgarh, Dr. Raman Singh and the Minister of State for Home Affairs, Shri Hansraj Gangaram Ahir are also seen.

माओवादियों की 50 साल की हिंसक राजनीति से क्या हासिल हुआ?

बस्तर में चलने वाले नक्सल राज की खूनी कहानी हर गांव में आपको सुनने को मिलेगी. बंदूक और हिंसा की राजनीति का नतीजा यह हुआ है कि शांतिपूर्ण जीवन के आदी आदिवासियों का जीवन बिखर चुका है.

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बीएचयू में लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ छात्राओं ने खोला मोर्चा

बीएचयू के महिला महाविद्यालय की एक छात्रा ने कैंपस में होने वाले लैंगिक भेदभाव और पितृसत्तात्मक सोच के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय महिला आयोग से मदद की अपील की है.

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बलात्कार पीड़िताओं से जन्मे बच्चों का ध्यान रखे महाराष्ट्र सरकार, वे भी पीड़ित हैं: अदालत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, बलात्कार पीड़िताओं के बच्चों का अच्छे से ख़्याल रखा जाना चाहिए, उन्हें अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए.

Soni Sori

बस्तर के आईने में भारतीय लोकतंत्र का चेहरा बेहद डरावना नज़र आता है

क्या बस्तर में भी भारतीय संविधान लागू है? क्या माओवाद से लड़ाई के नाम पर ग्रामीणों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर, महिलाओं के बलात्कार, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले और जेल आदि सब जायज़ हैं, जबकि माओवाद तो ख़त्म होने की जगह बढ़ रहा है?