बस्तर

बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा. (फाइल फोटो साभार: छत्तीसगढ़ टूरिज्म)

क्यों बस्तर के प्रसिद्ध दशहरे के रथ के लिए आदिवासी लकड़ी देने से इनकार कर रहे हैं

बस्तर में हर साल दशहरे के पर्व पर एक आठ पहियों का रथ निकलता है, जिसे ककालगुर गांव की लकड़ी से तैयार किया जाता है. इस बार यहां के ग्रामीणों ने सदियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन करने से इनकार कर दिया है.

नंदिनी सुंदर. (फोटो: Special arrangement)

झूठे आरोपों की मानसिक प्रताड़ना के लिए कार्यकर्ताओं को मुआवज़ा दे छत्तीसगढ़ सरकार: एनएचआरसी

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुकमा ज़िले के एक शख़्स की हत्या के आरोप में नवंबर 2016 में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नामजद किया था. फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने मामले की जांच की और हत्या में कार्यकर्ताओं की भूमिका न पाए जाने पर आरोप वापस लेते हुए एफआईआर से नाम हटा लिए.

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बोधघाट परियोजना: छत्तीसगढ़ सरकार के सवालों पर लेखक का जवाब

18 जून 2020 को द वायर द्वारा ‘बोधघाट पनबिजली परियोजना: जंगल उजाड़कर जंगल के कल्याण की बात’ शीर्षक से प्रकाशित लेख पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से सवाल उठाए गए थे. उनका जवाब.

इंद्रावती नदी. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स\CC-BY-2.0)

बोधघाट पनबिजली परियोजना: जंगल उजाड़कर जंगल के कल्याण की बात

बीते दिनों केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दंतेवाड़ा के पास इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित पनबिजली परियोजना को पर्यावरणीय मंज़ूरी दी है. हालांकि इसके लिए चिह्नित ज़मीन पर वन्य प्रदेश और आदिवासियों की रिहाइश होने के चलते इसके उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा के ज़रिये गोंडी भाषा को सहेजने का प्रयास

आदिवासी बहुल इलाकों में वृहद रूप से बोली जाने वाली गोंडी भाषा का कोई लिखित साहित्य न होने के चलते यह अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दो स्कूलों में इस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देकर इसे सहेजने की कोशिश की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल थाना क्षेत्र स्थित नेशनल मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी. (सभी फोटो: तामेश्वर सिन्हा)

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासी क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के तहत बैलाडीला की एक पहाड़ी को बचाने के लिए तकरीबन 20 हज़ार आदिवासी पिछले चार-पांच दिनों से प्रदर्शन कर रह हैं. सरकार ने इस पहाड़ी को लौह अयस्क के खनन के लिए अडाणी समूह को दे दिया है.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: एसआरपी कल्लूरी का तबादला, बनाया गया परिवहन आयुक्त

विवादित पुलिस अधिकारी आईजी कल्लूरी को बीते दिनों आर्थिक अपराध विभाग और भ्रष्टाचार विरोधी विभाग की ज़िम्मेदारी देने पर भूपेश बघेल सरकार को ख़ासी आलोचना झेलनी पड़ी थी. 15 सांसदों ने कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच के लिए लिखा था सीएम को पत्र.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की आईजी कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच की मांग

केरल, असम, तमिलनाडु और त्रिपुरा के 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि आईजी कल्लूरी के बीते पांच सालों के कार्यकाल की जांच करवाकर उनके किए ग़लत कामों की सज़ा दी जाए.

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कल तक कांग्रेस जिस कल्लूरी को ‘अपराधी’ बताती थी, वो आज उन्हें महत्वपूर्ण पद से क्यों नवाज़ रही है?

क्या सत्ता के चरित्र में ही कुछ ऐसा है कि वह आपको अधर्म की ओर ले जाती है? वो भूपेश बघेल जो एसआरपी कल्लूरी को जेल भेजना चाहते थे, वही उन्हें अब महत्वपूर्ण पद सौंप रहे हैं. बघेल कह सकते हैं कि तब वे विपक्ष में थे और उसका कर्तव्य निभा रहे थे और अब उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे यह काम करवा रही है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़ सरकार ने झीरम घाटी नक्सल हमले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया

राज्य में बस्तर क्षेत्र के झीरम घाटी में 25 मई, 2013 को विधानसभा चुनाव से पहले नक्सलियों ने कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था. इस हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी.

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए यह प्रायश्चित करने का मौका है

जहां एक ओर कांग्रेस के लिए यह नक्सल समस्या को सुलझाने का एक नया मौका है, वहीं राहुल गांधी के लिए यह साबित करने का अवसर है कि वे और उनकी पार्टी वास्तव में देश के आदिवासियों की चिंता करते हैं.

एक चुनावी सभा के दौरान जनता से मिलते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फोटो साभार: ट्विटर/@BhupeshBaghel9)

छत्तीसगढ़: टाटा संयंत्र के लिए अधिग्रहित की गई आदिवासियों की ज़मीन वापस होगी

बस्तर ज़िले के लोहांडीगुड़ा में टाटा के इस्पात संयंत्र के लिए साल 2008 में अधिग्रहित की गई थी आदिवासी किसानों की ज़मीन. कांग्रेस ने घोषणापत्र में किया था ज़मीन वापस दिलाने का वादा.

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जज लोया मामले से संबंधित कार्टून शेयर करने पर बस्तर के पत्रकार पर राजद्रोह का केस दर्ज

कमल शुक्ला बस्तर में फ़र्ज़ी मुठभेड़, पत्रकारों की सुरक्षा, मानवाधिकार और आदिवासियों के हितों के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

बस्तर के आम युवाओं को नक्सलियों से लड़ाने के लिए सरकार ने तैयार की ‘बस्तरिया ब्रिगेड’

सीआरपीएफ बस्तर जिले में नक्सलियों के खिलाफ आम आदिवासियों की एक बटालियन तैनात करने जा रही है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ब्रिगेड में स्थानीय युवाओं को शामिल करने से सूचना-तंत्र मजबूत होगा और नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में वे काफी कारगर साबित होंगे.