बाज़ार

Mumbai: A screen at the facade of the Bombay Stock Exchange (BSE) building shows the stock prices, in Mumbai, Monday, Sept 23, 2019. BSE Sensex on Monday soared over 1,300 points to reclaim the 39,000 mark. (PTI Photo)    (PTI9_23_2019_000145B)

पिछले साढ़े चार सालों में सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट, 1,942 अंक नीचे लुढ़का

कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के चलते शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला.

ख़य्याम. (फोटो: पीटीआई)

ख़य्याम की धुनें कहानी का मुकम्मल किरदार हैं…

ख़य्याम ने जितनी फिल्मों के लिए काम किया उससे कहीं ज़्यादा फिल्मों को मना किया. एक-एक गाने के लिए वो अपनी दुनिया में यूं डूबे कि जब ‘रज़िया सुल्तान’ की धुन बनाई तो समकालीन इतिहास में तुर्कों को ढूंढा और और ‘उमराव जान’ के लिए उसकी दुनिया में जाकर अपने साज़ को आवाज़ दी.

khayyam-PTI

भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार ख़य्याम का निधन

92 वर्ष के संगीतकार ख़य्याम ने सोमवार रात 9:30 बजे अंतिम सांस ली. फेफड़ों में संक्रमण के चलते उन्हें 10 दिन पहले मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

New Delhi: Reserve Bank of India Governor Shaktikanta Das interacts with the media at the RBI office, in New Delhi, Monday, Jan. 7, 2019.(PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI1_7_2019_000090B)

आर्थिक वृद्धि तो ठीक लेकिन महंगाई चिंता की बात: आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर का पद संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में शक्तिकांत दास ने कहा कि तेल, खाद्य-पदार्थ और तमाम वस्तुओं की कीमतों में अनिश्चितता की स्थिति महंगाई के मूल्यांकन में बाधक हैं. कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने विकास दर के आंकड़ों को बोगस बताया.

(फोटो: पीटीआई)

डॉलर के मुकाबले रुपया पहुंचा 75 के करीब, अब तक की सबसे बड़ी गिरावट

शुरुआती कारोबार में रुपया 24 पैसे गिरकर 74.45 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. वहीं सेंसेक्स 1,030 अंक गिरकर 34,000 अंक के स्तर से नीचे चला गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

कच्चे तेल और रुपये की चिंता में बाज़ार बेहाल, निवेशकों के पांच लाख करोड़ रुपये डूबे

गुरुवार को सेंसेक्स 806 अंक टूटकर 35,200 अंक से नीचे आ गया. यह इसका तीन महीने का निचला स्तर है. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 259 अंक के नुक़सान से 10,600 अंक से नीचे आ गया.

Nehru Wikimedia

हमें राजनीतिक आज़ादी तो मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक आज़ादी कब मिलेगी?

आज़ादी के 71 साल: सरकार यह महसूस नहीं करती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर किया गया सरकारी ख़र्च वास्तव में बट्टे-खाते का ख़र्च नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए किया गया निवेश है.

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी. (फोटो: रॉयटर्स)

जीएसटी-नोटबंदी से उबरने में दो साल और लगेंगे: रिज़र्व बैंक के पूर्व गर्वनर

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहा, इस समय आर्थिक वृद्धि को लेकर अनुमान लगाना काफ़ी मुश्किल है. उच्च वृद्धि के लिए दो साल की और ज़रूरत है.

(फोटो: रॉयटर्स)

देश में आर्थिक नरमी के कारण विलय और अधिग्रहण बाज़ार में भारी गिरावट: रिपोर्ट

वैश्विक फर्म मर्जरमार्केट ने कहा, भारत में विलय और अधिग्रहण सौदों में 63.4 प्रतिशत की गिरावट आई. एयरटेल के सुनील मित्तल बोले, देश में कारोबार आसान करना अब भी मुख्य चुनौती.

Boston: Indian Finance Minister Arun Jaitley speaks at a event organized by US-India Strategic Partnership Forum and FICCI in Boston on Wednesday. PTI Photo (PTI10_12_2017_000025B)

रिज़र्व बैंक देश की आर्थिक वृद्धि में बाधा उत्पन्न कर रहा है: फिक्की अध्यक्ष

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का तीन पक्षीय सुधारों का सुझाव. जेटली बोले- भारत के पास अगले एक-दो दशक में उच्च वृद्धि की क्षमता है.

Money Reuters

विश्व बैंक ने कहा, नोटबंदी और जीएसटी के कारण कम रह सकती है भारत की वृद्धि दर

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने भी वृद्धि दर अनुमान घटाया, ओपेक ने कहा भारत मज़बूत वृद्धि के रास्ते पर.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

‘औरतों की ज़िंदगी कोख के अंधेरे से क़ब्र के अंधेरे तक का सफ़र है’

‘किसी समाज व शासन की सफलता इस तथ्य से समझी जानी चाहिए कि वहां नारी व प्रकृति कितनी संरक्षित व पोषित है, उन्हें वहां कितना सम्मान मिलता है.’

farmer reuters

क्या भारत डब्ल्यूटीओ के जाल में फंस चुका है?

भारत सरकार अब इस बात से सहमत है कि खाद्य सब्सिडी को कम से कम किया जाना होगा, इस कारण से पूरी संभावना है कि भारत में रोज़गार, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक गैर-बराबरी का दर्द अब और ज़्यादा बढ़ेगा.

The Minister of State for Commerce & Industry (Independent Charge), Smt. Nirmala Sitharaman meeting the DG, WTO, Mr. Roberto Azevedo, in Geneva on July 18, 2017.

नीति बनाने वाले किसान और उपभोक्ता को एक-दूसरे का दुश्मन बना रहे हैं

जब कुछ ख़ास व्यापारिक प्रतिष्ठानों का एकाधिकार स्थापित हो जाएगा, तब क़ीमतें सरकार और किसान नहीं, बड़ी कंपनियां तय करेंगी.