बाढ़

डुमरी गांव का चंचरी पुल. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘नेता चुनाव के समय आश्वासन देते हैं कि इस साल पुल बन जाएगा, अब तक तो वो दिन नहीं आया’

ग्राउंड रिपोर्ट: तीन नदियों से घिरे मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के औराई विधानसभा क्षेत्र के कई गांव आज भी आवागमन के लिए ग्रामीणों द्वारा चंदा इकठ्ठा करके बनाए गए बांस-बल्ली के अस्थायी पुलों पर निर्भर हैं. ग्रामीण बताते हैं कि कई बार इस बारे में नेताओं से मिले, पर आज तक उनके आश्वासन का कोई नतीजा नहीं निकला.

गंडक नदी के किनारे नाव का इंतजार करते धूमनगर गांव के लोग. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘नेता पुल बनवा देंगे कहकर वोट ले जाते हैं और हम वहीं के वहीं रह जाते हैं’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी-बिहार सीमा पर पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के गंडक नदी के किनारे बसे आखिरी धूमनगर गांव के कुछ टोले केवल नावों के सहारे जुड़े हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पुल बनाने की मांग उठने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं है.

कोसी की कटान रोकने के लिए लगाए गए पॉर्क्यूपाइन. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

बिहार: कोसी में बाढ़ से बचने को बनाए जा रहे तटबंध सभी रहवासियों के लिए ख़ुशी का सबब नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: आज़ादी के बाद कोसी की बाढ़ से राहत दिलाने के नाम पर इसे दो पाटों में क़ैद किया गया था और अब लगातार बनते तटबंधों ने नदी को कई पाटों में बंद कर दिया है. इस बीच सुपौल, सहरसा, मधुबनी ज़िलों के नदी के कटान में आने वाले गांव तटबंध के लाभार्थी और तटबंध के पीड़ितों की श्रेणी में बंट चुके हैं.

पिपराही गांव में नाव से आते-जाते लोग. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘घर बनवाने के लिए पैसे जुटाए थे लेकिन गांव का हाल देखकर नाव बनवा ली’

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के सुपौल ज़िले के निर्मली विधानसभा क्षेत्र में कोसी नदी के सिकरहट्टा-मंझारी तटबंध पर बसे पिपराही गांव से गुज़र रही धारा में कम पानी होता था, पर बीते कई सालों से बारह महीने इतना पानी रहता है कि बिना नाव के पार नहीं किया जा सकता है. इस साल मई से सितंबर के बीच यहां पांच बार बाढ़ आ चुकी है.

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में बारिश के बाद जलमग्न सड़क. (फोटो: पीटीआई)

बारिश के कारण तेलंगाना में मृतक संख्या बढ़कर 70 हुई, कर्नाटक के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति

तेलंगाना के शहरी विकास मंत्री कहा कि हैदराबाद शहर में 1908 के बाद दूसरी सबसे भारी बारिश हुई है, जिससे राज्य सरकार को निचले क्षेत्रों में रहने वाले करीब 37,000 लोगों को राहत शिविरों में भेजना पड़ा. वहीं, उत्तरी कर्नाटक के चार ज़िलों में बड़ी संख्या में गांव जलमग्न हैं और 36,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

बालू और गाद से भरी इस जगह पर महज तीन महीने पहले तक खेत और घर थे.

बिहार चुनाव: ‘हमरे दुख में केहू नाहीं आइल, वोट मांगे के मुंह केहू के ना बा’

ग्राउंड रिपोर्ट: पश्चिम चंपारण ज़िले के लक्ष्मीपुर रमपुरवा गांव के सीमाई पांच टोले के पांच सौ से अधिक ग्रामीण गंडक नदी की बाढ़ और कटान से हुई व्यापक तबाही के बाद फिर से ज़िंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में लगे हैं. अस्तित्व के संकट जूझ रहे इन टोलों में चुनावी कोलाहल की गूंज नहीं पहुंची है.

हैदराबाद में बारिश का पानी सड़कों पर. (फोटो: पीटीआई)

महाराष्ट्र में बारिश और बाढ़ से 48 लोगों की मौत, कर्नाटक में बाढ़ से गंभीर हालात

पश्चिमी महाराष्ट्र में भारी वर्षा और बाढ़ से 3,000 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गए जबकि 40,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. उत्तर कर्नाटक सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा, जहां पिछले तीन महीने में तीसरी बार बाढ़ आई है. तेलंगाना ने बारिश और बाढ़ के कारण छह हज़ार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है.

बॉम्बे हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

बॉम्बे हाईकोर्ट का जेईई-मेन पर रोक लगाने से इनकार

इंजीनियरिंग के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मेन मंगलवार को देशभर में शुरू हो गई. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाकों में रहने वाले छात्र, जो परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकते, वे दोबारा परीक्षा के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को आवेदन कर सकते हैं.

गुजरात के सूरत शहर में भारी बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी. (फोटो: पीटीआई)

गुजरात में बारिश से जुड़ी घटनाओं में नौ लोगों की मौत, बिहार में बाढ़ से हालात गंभीर

गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण नदियां उफ़ान पर हैं. शनिवार और रविवार को मिलाकर राज्य में 21 लोगों की मौत की सूचना है. बिहार के 16 ज़िलों में 83.62 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. उत्तर प्रदेश के एक हज़ार से ज़्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं और राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है.

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मीडिया बोल: सुशांत प्रकरण, दंगे में फंसाए जाते प्रोफ़ेसर, लेखक और मीडिया

वीडियो: कोरोना वायरस, बाढ़ की विभीषिका, बेकारी-बेहाली के दौर में भी मीडिया, खासकर न्यूज़ चैनल अभिनेता सुशांत सिंह प्रकरण में बड़े मसलों से ध्यान हटाने और एक तरह का ‘मीडिया ट्रायल’ चलाते नज़र आ रहे हैं. कुछ चैनल प्रोफेसरों-लेखकों को फंसाने में क्यों जुटे हैं? मीडिया बोल के नए एपिसोड में इन्हीं मुद्दों पर चर्चा.

(फोटो: पीटीआई)

यूपी: कई ज़िलों में बाढ़ के हालात, बहराइच में नेपाल से छोड़े गए पानी से क़रीब 60 गांव बाढ़ से घिरे

उत्तर प्रदेश में 12 ज़िलों के क़रीब 293 गांव बाढ़ प्रभावित हैं, जिनमें 67 पूरी तरह बाढ़ से घिरे हुए हैं. वहीं बहराइच के अपर जिलाधिकारी ने बताया कि नेपाल से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण ज़िले के क़रीब 60 गांवों में बाढ़ अथवा जलभराव के हालात हैं.

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राम, रफाल और राष्ट्रवाद की अफीम

वीडियो: रफाल विमान की भारत में लैंडिंग हो चुकी है. हर अख़बार और न्यूज़ चैनल पर यही छाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर देश में कोरोना और बाढ़ से हालात नाज़ुक बने हुए हैं. इस बारे में द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु, वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ अजय शुक्ला और द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की चर्चा.

बिहार के गोपालगंज में बाढ़ का नजारा (फोटो: पीटीआई)

असम-बिहार में बाढ़ से 55 लाख से अधिक लोग प्रभावित, अब तक क़रीब डेढ़ सौ मौतें

असम में बाढ़ से 21 ज़िलों के 17 लाख लोग और 1,536 गांव प्रभावित हैं, साथ ही प्रदेश में 92 हज़ार हेक्टेयर से अधिक ज़मीन पर लगी फसलें बर्बाद हो गई हैं. वहीं बिहार में 12 ज़िलों के क़रीब 40 लाख लोग बाढ़ का ख़तरा झेल रहे हैं. राज्य में बागमती, महानंदा व कोसी जैसी कई नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

हसुआहां गांव में एक घर.

‘नेता लोग हवाई जहाज से बैठ के देखता है, उ लोग को नाव में आके देखना चाहिए कि हम किस हाल में हैं’

ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना वायरस का केंद्र बनकर उभर रहे बिहार के कई इलाके बाढ़ के ख़तरे से भी जूझ रहे हैं. उत्तर बिहार के लगभग सभी ज़िले बाढ़ की चपेट में हैं और लाखों की आबादी प्रभावित है. लेकिन पानी में डूबे गांव-घरों में जैसे-तैसे गुज़ारा कर रहे लोगों को मदद देना तो दूर, सरकार उनकी सुध ही नहीं ले रही है.

Muzaffarpur: Residents move to a safer place on a boat from a flood affected area, following heavy monsoon rain, in Muzaffarpur district, Tuesday, July 21, 2020. (PTI Photo)(PTI21-07-2020_000161B)

बिहार: दस ज़िलों की छह लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित

बिहार में बाढ़ के खतरे के मद्देनज़र एनडीआरएफ की 21 टीमों को राज्य के विभिन्न संवेदनशील ज़िलों में तैनात किया गया है. इसी बीच मुज़फ़्फ़रपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से दो बच्चियों की जान चली गई.