बिहार में बाढ़

बाढ़ के दौरान बिहार में गंगा नदी. (फोटो: पीटीआई)

इस बार मानसूनी बारिश और बाढ़जनित घटनाओं में दो हज़ार से अधिक लोगों की मौत: गृह मंत्रालय

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं के कारण महाराष्ट्र में सबसे अधिक 430 लोगों की मौत हो हुई, जबकि पश्चिम बंगाल में मरने वालों की संख्या 227 है.

Patna: An elderly person being rescued from a flood-affected colony at Rajendra Nagar in Patna, Monday, Sept. 30, 2019. (PTI Photo)   (PTI9_30_2019_000086B)

देशभर में इस साल मानसूनी बारिश और बाढ़ से क़रीब 1,900 लोगों की मौत: सरकार

बिहार में इस साल 161 लोगों की मौत बाढ़ और बारिश से हो मौत हो चुकी है. बीते 27 से 30 सितंबर की बारिश के बाद राज्य में मरने वालों की संख्या 73 हुई. राजधानी पटना के कंकड़बाग, राजेंद्रनगर और पाटलिपुत्र में बैंक, दुकानें, निजी अस्पताल और कोचिंग संस्थान एक हफ्ते से बंद हैं.

Patna: Locals transport their belongings on a makeshift boat to a safer place from flood-affected Bahadurpur area following heavy monsoon rainfall, in Patna, Tuesday, Oct. 01, 2019. (PTI Photo) (PTI10_1_2019_000069B)

देशभर में वर्षाजनित हादसों में 148 लोगों की मौत, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाके डूबे

भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि देश में 1994 के बाद इस मानसून में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई. केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार में बाढ़ के लिए हथिया नक्षत्र को ज़िम्मेदार ठहराया.

पटना में बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालती नगर पालिका की टीम (फोटो: पीटीआई)

‘हमने भारी बारिश की चेतावनी दी थी, ताकि बिहार सरकार स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे’

विशेष रिपोर्ट: बिहार की राजधानी पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक ने बताया कि 26 सितंबर से ही हम लोग वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के ज़रिये राज्य की एजेंसियों को बता रहे थे कि भीषण बारिश होगी. हमने राज्य सरकार को भी इसकी सूचना भेजी थी.

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बिहार में ​फिर बाढ़ की आहट, पिछले साल के प्रभावितों को अब तक नहीं मिला मुआवज़ा

बिहार में एक बार फिर कई नदियां उफान पर हैं. पिछले साल राज्य के 17 जिलों में बाढ़ आई थी. इससे करीब 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. 8.5 लाख लोगों के घर टूट गए थे और करीब 8 लाख एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी.

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विकास योजनाओं में अदूरदर्शिता का विनाशकारी मॉडल है फरक्का बैराज

विशेषज्ञों का मानना है कि फरक्का बैराज परियोजना से जितना फायदा हुआ उससे कई गुना ज़्यादा नुकसान हो चुका है. इसका कोई समाधान न निकाला गया तो व्यापक तबाही के लिए तैयार रहना होगा.