भारतीय पत्रकारिता

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन

आपातकाल के दौरान इसका विरोध करने की वजह से जेल गए. तकरीबन 15 किताबें लिखने वाले कुलदीप नैयर तमाम प्रतिष्ठित अख़बारों के संपादक रह चुके थे.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 237: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस और भारतीय पत्रकारिता

जन गण मन की बात की 237वीं कड़ी में विनोद दुआ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय पत्रकारिता के हालात पर चर्चा कर रहे हैं.

(जन्म 26 अक्टूबर 1890- अवसान: 25 मार्च 1931)

गोदी मीडिया के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता को याद किया जाना चाहिए

गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता के ज़रिये ब्रिटिश शासन के साथ-साथ देसी सामंतों को भी निशाने पर लेते थे. उनका दफ़्तर क्रांतिकारियों की शरणस्थली था तो युवाओं के लिए पत्रकारिता का प्रशिक्षण केंद्र.

Episode 41

मीडिया बोल, एपिसोड 41: फेक न्यूज़ और डिजिटल मीडिया पर अंकुश की तैयारी

मीडिया बोल की 41वीं कड़ी में उर्मिलेश सोशल मीडिया पर वायरल हुए अररिया के वीडियो, उपचुनाव परिणाम की मीडिया कवरेज और डिजिटल मीडिया पर अंकुश को लेकर दिए स्मृति ईरानी के हालिया बयान पर चर्चा कर रहे हैं.

Episode 40

मीडिया बोल, एपिसोड 40: किसान का दर्द और टीवी में पार्टी-एंकर

मीडिया बोल की 40वीं कड़ी में उर्मिलेश मुंबई में किसान रैली और समाचार चैनल आज तक पर एंकरिंग करने वाले भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा पर नेशनल हेराल्ड समूह की सीनियर एडिटर भाषा सिंह और आज तक के पूर्व एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर अमिताभ श्रीवास्तव से चर्चा कर रहे हैं.

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मीडिया को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण-वाम सब साथ हैं

साल दर साल भारत में मीडिया पर नियंत्रण और सेंसरशिप ख़त्म होने के बजाय बढ़ रही है. इस मामले में सभी राजनीतिक दल एक जैसे हैं. वे आज़ाद मीडिया की जगह नियंत्रित मीडिया को प्यार करते हैं.

Episode 39

मीडिया बोल, एपिसोड 39: पूर्वोत्तर के चुनावी नतीजे और बाथटब पत्रकारिता

मीडिया बोल की 39वीं कड़ी में उर्मिलेश पूर्वोत्तर के चुनावी नतीजों और श्रीदेवी की मौत से जुड़ी रिपोर्टिंग पर पत्रकार संदीप भूषण और द वायर की डिप्टी एडिटर संगीता बरूआ पिशारोती से चर्चा कर रहे हैं.

Episode 38

मीडिया बोल, एपिसोड 38: सेनाध्यक्ष बिपिन रावत का विवादित बयान

मीडिया बोल की 38वीं कड़ी में उर्मिलेश सेनाध्यक्ष बिपिन रावत के विवादित बयान पर फोर्स मैगज़ीन की कार्यकारी संपादक ग़ज़ाला वहाब और आॅब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के डिस्टींगुइश फेलो मनोज जोशी से चर्चा कर रहे हैं.

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मीडिया बोल, एपिसोड 35: सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का सच

मीडिया बोल की 35वीं कड़ी में उर्मिलेश बजट में स्वास्थ्य को लेकर किए गए वादों पर एनडीटीवी के पत्रकार हृदेश जोशी और अंबेडकर ​विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर दीपा सिन्हा से चर्चा कर रहे हैं.

Media Bol Episode 34

मीडिया बोल, एपिसोड 34: करणी सेना का उत्पात और कासगंज सांप्रदायिक हिंसा

मीडिया बोल की 34वीं कड़ी में उर्मिलेश फिल्म पद्मावत के विरोध में करणी सेना के उत्पात और कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर द हिंदू सेंटर फॉर पॉलीटिक्स एंड पब्लिक पॉलिसी की सीनियर फेलो​ स्मिता गुप्ता और अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अ​ग्निहोत्री से चर्चा कर रहे हैं.

Media Bol Episode 33

मीडिया बोल, एपिसोड 33: दलितों पर अत्याचार और बलात्कार

मीडिया बोल की 33वीं कड़ी में उर्मिलेश देशभर में दलितों पर हो रहे अत्याचार और बलात्कार की मीडिया कवरेज पर दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर कौशल पंवार और वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा जोशी से चर्चा कर रहे हैं.

Episode 32

मीडिया बोल, एपिसोड 32: न्यायतंत्र की ख़ामियों पर चार शीर्ष जजों के बयान से उठते सवाल

मीडिया बोल की 32वीं कड़ी में उर्मिलेश सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और हिंदुस्तान टाइम्स के सीनियर असिस्टेंट एडिटर भद्रा सिन्हा से चर्चा कर रहे हैं.

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मीडिया बोल, एपिसोड 31: भीमा-कोरेगांव हिंसा का कसूरवार कौन?

मीडिया बोल की 31वीं कड़ी में उर्मिलेश महाराष्ट्र में हुई भीमा-कोरेगांव हिंसा पर साकाल ग्रुप के ब्यूरो चीफ अनंत बागाईतकर और नेशनल दस्तक के संपादक शंभू कुमार से चर्चा कर रहे हैं.

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मीडिया बोल, एपिसोड 30: मुठभेड़ हत्याओं का नया दौर और मीडिया  

मीडिया बोल की 30वीं कड़ी में उर्मिलेश मुठभेड़ में हत्या करने के दौर और उसके मीडिया कवरेज पर मा​नवाधिकार कार्यकर्ता रवि नायर व वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा जोशी से चर्चा कर रहे हैं.

Episode 29

मीडिया बोल, एपिसोड 29: मीडिया के लिए साल 2017 कैसा रहा?

मीडिया बोल की 29वीं कड़ी में उर्मिलेश साल 2017 में मीडिया से जुड़े मसलों और मुश्किलों पर वरिष्ठ पत्रकार प्रंजॉय गुहा ठाकुरता और स्मिता शर्मा से चर्चा कर रहे हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

गौरी लंकेश बनीं पत्रकारों के संघर्ष की प्रतीक, भारत में इस साल नौ पत्रकारों को गंवानी पड़ी जान

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने भारत में पत्रकारों की हत्या की निंदा करते हुए ऐसी घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की है.

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‘भारत में हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों के कारण मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ी’

अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि 2015 से अब तक सरकार की आलोचना करने वाले नौ पत्रकारों की हत्या कर दी गई.

Modi and Media 1 PTI

मोदी के राष्ट्रवाद से भारतीय पत्रकारिता ख़तरे में: रिपोर्ट

प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की ओर से किए गए एक अध्ययन में 180 देशों की सूची में भारत 136वें स्थान पर है.

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‘एंटी रोमियो दस्ते के लोगों को किसी से प्रेम हो गया तो क्या होगा’

एंटी रोमियो दस्ते के किसी को प्रेम हो जाए तो प्रेम की तड़प में वे किसी पुराने कुर्ते की तरह चराचरा कर फट जाएंगे. दुआ करूंगा कि इस दस्ते को कभी किसी से प्यार न हो. प्रार्थना करूंगा कि उन्हें कम से कम किशोर कुमार के गाने सुनने की सहनशक्ति मिले.