भारतीय मीडिया

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मीडिया बोल: रेडियो रवांडा के नक़्शेक़दम पर भारतीय न्यूज़ चैनल

वीडियो: ख़बरें देने के नाम पर भारतीय टीवी चैनलों पर कोई ‘यूपीएससी ज़िहाद’ दिखा रहा है, तो कोई पढ़े-लिखों को किसी झूठे केस में फंसाने की सियासी साज़िश में जुटा है. मीडिया बोल की इस कड़ी में इन्हीं मुद्दों पर सत्य हिंदी के संपादक शीतल सिंह और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता से चर्चा कर रहे हैं उर्मिलेश.

Media personnel surround Bollywood actor Rhea Chakraborty as she arrives at Narcotics Control Bureau (NCB) office for questioning, following the death of her boyfriend and actor Sushant Singh Rajput, in Mumbai, India, September 6, 2020. Picture taken September 6, 2020. REUTERS/Francis Mascarenhas

मीडिया ट्रायल पर वकीलों ने कहा- क़ानूनी सुनवाई की जगह शर्मिंदगी की सुनवाई ने ले ली है

राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर के पहले संस्करण में वकीलों ने आपराधिक मामलों और अदालतों में चल रहे मामलों की जांच को प्रभावित करने के लिए मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया का संयोजन एक ख़तरनाक कॉकटेल बन गया है, जो क़ानून के लिए ठीक नहीं है.

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मीडिया बोल: न्यूज़ चैनलों के पतन का कारण टीआरपी रेस या एजेंडा सेटिंग!

वीडियो: समाचार चैनलों के बीच गलाकाट टीआरपी की रेस, एजेंडा सेटिंग और वर्चस्व की शक्तियों के औज़ार बनने की कहानी का क्या सच है? इस मुद्दे पर सत्य हिंदी के संपादक आशुतोष, आज तक के पूर्व संपादक नवीन कुमार और द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की बातचीत.

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मीडिया बोल: मंडल सिफ़ारिशों के तीन दशक, सियासत और मीडिया

वीडियो: मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के लागू करने की घोषणा के तीन दशक हो रहे हैं. इस मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर लक्ष्मण यादव, लेखक एवं पत्रकार डॉ. सिद्धार्थ और वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह से वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की बातचीत.

Dainik Bhaskar Sana Marine Interview

फिनलैंड की पीएम का फ़र्ज़ी इंटरव्यू छापने पर दैनिक भास्कर को प्रेस काउंसिल ने भेजा नोटिस

द वायर से बातचीत में दैनिक भास्कर की ओर से कहा गया, ‘हम अपने फ्रीलांस पत्रकार सिद्धार्थ राजहंस के धोख़े का शिकार हुए हैं. उन्होंने हमसे जालसाज़ी की है. हम उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम उठा रहे हैं. साथ ही फिनलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय और दूतावास को माफ़ीनामा भी भेज रहे हैं.

फोटो: द वायर

जब पत्रकार सत्ता की भाषा बोलने लगें…

सरकार के हस्तक्षेप या प्रबंधन के दबाव का आरोप लगाना एक कमज़ोर बहाना है- मीडिया पेशेवरों ने स्वयं ही ख़ुद को अपने आदर्शों से दूर कर लिया है. वे बेआवाज़ को आवाज़ देने या सत्ताधारी वर्ग से जवाबदेही की मांग करने वाले के तौर पर अपनी भूमिका नहीं देखते हैं. अगर वे खुद व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, तो वे व्यवस्था से सवाल कैसे पूछेंगे?

(फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने तीन अख़बारों को सरकारी विज्ञापन देना बंद किया

सामूहिक रूप से 2.6 करोड़ मासिक पाठक वर्ग वाले तीनों बड़े अख़बार समूहों का कहना है कि मोदी के पिछले महीने लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से चुनकर सत्ता में आने से पहले ही उनके करोड़ों रुपये के विज्ञापनों को बंद कर दिया गया.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी. (फोटो: पीटीआई)

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मीडिया ने केवल विपक्ष से सवाल पूछा: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने कहा कि सामान्य तौर पर मीडिया की भूमिका सरकार से सवाल पूछने की होती है. लेकिन यहां पर मीडिया ने केवल विपक्ष से सवाल पूछा. विपक्षी पार्टियों से सवाल पूछा गया कि उन्होंने 50 साल पहले कुछ क्यों नहीं किया? क्या मीडिया को यही करना होता है?

The Wire Hindi

‘हम उस दौर में हैं, जहां मीडिया ख़ुद लोकतंत्र के लिए ख़तरा बन गया है’

द वायर हिंदी के दो साल पूरे होने पर हुए कार्यक्रम में दिए गए कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह के वक्तव्य का संपादित अंश.

पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामा प्रसाद प्रदीप.

जब संघ प्रमुख के कार्यक्रम को भाव न देने पर पत्रकार श्यामा प्रसाद को नौकरी गंवानी पड़ी

पुण्यतिथि विशेष: पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामा प्रसाद ‘प्रदीप’ का सिद्धांत था, ‘पत्रकार को नौकरी बचाने के फेर में पड़े बिना ही काम करना चाहिए वरना पत्रकारिता छोड़ कुछ और करना चाहिए.’

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सीएनएन ट्रंप के सामने खड़ा हो सकता है, तो भारतीय मीडिया सत्ता से सवाल क्यों नहीं कर सकता?

भारत के ज़्यादातर पत्रकार आज़ाद नहीं हैं बल्कि मालिक के अंगूठे के नीचे दबे हैं. वह मालिक, जो राजनेताओं के सामने दंडवत रहता है.

बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी पर भी लगा यौन उत्पीड़न का आरोप

#मीटू: बीसीसीआई के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) ने राहुल जौहरी से इस मामले पर एक हफ्ते में सफाई देने को कहा है.

People participate in a "MeToo" protest march for survivors of sexual assault and their supporters in Hollywood, California last Noember. Less than four months after the #MeToo movement inspired a national conversation about sexual misconduct and led to the downfall of dozens of powerful American men, a backlash seems to be underway. File/Lucy Nicholson, Reuters

#मीटू: दिल्ली में पत्रकारों का प्रदर्शन, कहा कार्यस्थल पर यौन शोषण स्वीकार्य नहीं

नई दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोपियों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

‘लड़कियों के लिए न्यूज़रूम तक पहुंचना जितना मुश्किल है, उससे ज़्यादा मुश्किल वहां टिके रहना है’

न्यूज़रूम की कहानियां: मेरे साथ किसी तरह की बदतमीज़ी नहीं की गई, खुले तौर पर कोई दुर्व्यवहार नहीं हुआ, पर संगठित होकर इस तरह का माहौल बनाया गया, जिसमें काम करना मुश्किल होता गया और आख़िरकार मैंने नौकरी छोड़ दी.

People participate in a "MeToo" protest march for survivors of sexual assault and their supporters in Hollywood, California last Noember. Less than four months after the #MeToo movement inspired a national conversation about sexual misconduct and led to the downfall of dozens of powerful American men, a backlash seems to be underway. File/Lucy Nicholson, Reuters

एडिटर्स गिल्ड ने मीडिया संस्थानों से यौन उत्पीड़न के मामलों में पूरी जांच कराने को कहा

‘मीटू’ अभियान को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए किसी भी शख़्स को क़ानून के हिसाब से दंडित किया जाना चाहिए. देश में प्रेस की आज़ादी के लिए निष्पक्ष, न्यायोचित और सुरक्षित कार्य वातावरण ज़रूरी है.