भारतीय संविधान

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 74 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी क़ैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

कश्मीरी पत्रकार ने कहा- डिलीट ट्वीट को लेकर पुलिस ने पांच घंटे तक पूछताछ की

कश्मीरी पत्रकार इरफ़ान अमीन मलिक ने जम्मू कश्मीर की फिल्म नीति के बारे में सात अगस्त की शाम को एक ट्वीट पोस्ट किया था. हालांकि ट्वीट पोस्ट करने के दो मिनट के भीतर ही उन्होंने उसे डिलीट कर दिया था, लेकिन जम्मू कश्मीर पुलिस ने आठ अगस्त को मलिक को दक्षिण कश्मीर के त्राल पुलिस स्टेशन बुलाया, जहां उनसे इस संबंध में पांच घंटे तक पूछताछ की गई.

हमारा संविधान: अनुच्छेद-17 और 18, अस्पृश्यता और उपाधियों का उन्मूलन

वीडियो: संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत जातिवाद के आधार पर होने वाली छुआछूत या अस्पृश्यता के भेदभाव को गैर-संविधानिक माना गया है. वहीं, अनुच्छेद 18 के तहत सभी प्रकार की उपाधि देने की व्यवस्था को ख़त्म कर दिया गया. इनके बारे में विस्तार से बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अवनि बंसल.

हमारा संविधान: अनुच्छेद-16 और सरकारी नौकरियों में समान अवसर

वीडियो: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समानता की बात कहता है. इसके मुताबिक धर्म, जाति, लिंग आदि के नाम पर सरकारी नौकरियों में नियुक्ति और पदोन्नति में भेदभाव नहीं किया जा सकता. यदि सरकार को ये लगता है कि कुछ जाति या समुदाय के लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, तो उनके लिए आरक्षण किया जा सकता है.

खेती के लिए सिंचाई में किसी भी तरह की बाधा पैदा करना मौलिक अधिकार का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट

खेत में सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने यह टिप्पणी की. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि क्षेत्र के ट्यूबवेलों का रखरखाव के साथ-साथ लगातार बिजली मुहैया कराई जानी चाहिए.

हमारा संविधान: न्याय की देवी और मौलिक अधिकार

वीडियो: हमारा संविधान की इस कड़ी में अधिवक्ता अवनि बंसल न्याय की देवी के बारे में जानकारी दे रही हैं. उनके हाथ में तलवार, तराजू और आंख पर काली पट्टी बंधी होना क्या दर्शाता है? मौलिक अधिकार क्यों संविधान द्वारा लाई गई सामाजिक क्रांति का प्रतीक हैं और क्यों इनकी बहुत महत्ता है?

‘जब सभ कर दोउ हाथ पग दोउ नैन दोउ कान, रविदास पृथक कइसे भये हिंदू औ मूसलमान’

संत कवियों की लंबी परंपरा में एक रविदास ही ऐसे हैं जो श्रम को ईश्वर बताकर ऐसे राज्य की कल्पना करते हैं, जो भारतीय संविधान के समता, स्वतंत्रता, न्याय व बंधुत्व पर आधारित अवधारणा के अनुरूप है.

हमारा संविधान: दोहरी नागरिकता और नागरिकता पर क़ानून में संशोधन करने की शक्ति

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 9 दोहरी नागरिकता पर रोक लगाता है. अनुच्छेद 10 कहता है कि नागरिकता का अधिकार जो अनुच्छेद 5 से 8 में दिया गया है, वो बना रहेगा, जब तक संसद क़ानून द्वारा उसे बदलती नहीं है. नागरिकता संबंधी कानूनों के बारे में विस्तार से बता रही हैं अवनि बंसल.

भारत में संविधान की शुरुआत के बाद किसे नागरिक माना गया

वीडियो: हमारा संविधान कार्यक्रम के सातवें एपिसोड में जानिए भारतीय संविधान बनने के बाद किसे मिला नागरिकता का अधिकार. निवास और किसी अन्य देश से आए लोगों के लिए कैसे तय किया गया नागरिकता का अधिकार.

हमारा संविधान: अनुच्छेद 1 से 4 केंद्र और उसका क्षेत्र

वीडियो: संविधान के अनुच्छेद 1 से 4 में भारत का क्षेत्रफल, नए राज्य बनाने का अधिकार, राज्यों की सीमा घटाने, बढ़ाने और उनके नाम बदलने का अधिकार, नए क्षेत्र को अर्जित करने के अधिकार के बारे में बताया गया है. साथ ही राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में क्या अंतर है, क्या क़ानून हैं, विस्तार से बता रही हैं अवनि बंसल.

फ़ारूक़ अब्दुल्ला को नमाज़ अदा करने के लिए दरगाह जाने से रोका गयाः नेशनल कॉन्फ्रेंस

नेशनल कॉन्फ्रेंस का आरोप है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर फ़ारूक़ अब्दुल्ला को दरगाह हज़रतबल जाकर नमाज़ अदा करने के लिए घर से निकलने नहीं दिया गया. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने प्रशासन के इस क़दम की निंदा करते हुए इसे अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता से पाबंदी हटने के बाद पार्टी ने हाईकोर्ट से रिहाई की याचिका वापस ली

जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के बाद हिरासत में लिए गए नेशनल कॉन्फ्रेंस के 16 सदस्यों को रिहा करने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके जवाब में प्रशासन ने कहा था कि उनकी पार्टी का कोई नेता हिरासत में नहीं है.

संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने के लिए याचिका दायर

1976 में भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे. अब दो वकीलों ने इन्हें हटाने की मांग करते हुए कहा है कि यह संशोधन भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय-वस्तु के विपरीत था.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

क्या हिरासत की अवधि ख़त्म होने से पहले रिहा होंगे जम्मू कश्मीर बार अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मियां अब्दुल क़यूम बीते अगस्त से पीएसए के तहत आगरा की एक जेल में हिरासत में हैं. उनकी हिरासत बरक़रार रखने के प्रशासन के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए क़यूम ने कहा कि इस हिरासत का समर्थन करने के लिए सरकार के पास कोई सबूत नहीं हैं.

जब तक जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश रहेगा, विधानसभा चुनाव नहीं लडूंगा: उमर अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करते हुए दलील दी गई थी कि अनुच्छेद 370 के कारण राज्य में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. अगर ऐसा ही था तो एक साल बाद केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में ये क्यों कह रही है कि यहां हिंसा बढ़ी है.