भारतीय समाज

New Delhi: Former vice president Hamid Ansari speaks during the release of his book titled 'Dare I Question?', in New Delhi on Tuesday, July 17, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI7_17_2018_000158B)

कोरोना से पहले ही धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद की महामारी का शिकार हुआ देश: अंसारी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की नई किताब के डिजिटल विमोचन पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि आज देश ऐसे ‘प्रकट या अप्रकट’ तौर पर ऐसे विचार और विचारधाराओं से ख़तरे में है जो उसे ‘हम और वो’ की काल्पनिक श्रेणी के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं.

प्रेमचंद. (जन्म: 31 जुलाई 1880 – अवसान: 08 अक्टूबर 1936) (फोटो साभार: रेख्ता डॉट ओआरजी/विकीमीडिया/John Hoyland, Lebanon, 2007)

राष्ट्रवाद और डंडावाद

प्रेमचंद महात्मा गांधी की आंदोलन पद्धति के मुरीद थे. सशस्त्र आतंक के ज़रिये क्रांति या मुक्ति के नारे प्रेमचंद का खून गर्म नहीं कर पाते क्योंकि वे हिंसा के इस गुण या अवगुण को पहचानते थे कि वह कभी भी शुभ परिणाम नहीं दे सकती.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

महिलाओं की शादी की उम्र बढ़ाने के लिए दिए जा रहे तर्क निराधार और विवेकहीन हैं

केंद्र सरकार द्वारा लड़कियों की शादी की क़ानूनन उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने के लिए कम उम्र की मांओं और उनके शिशु की सेहत से जुड़ी समस्याओं को वजह बताया जा रहा है. पर उनकी ख़राब सेहत की मूल वजह ग़रीबी और कुपोषण है. अगर वे ग़रीब और कुपोषित ही रहती हैं, तो शादी की उम्र बदलने पर भी ये समस्याएं बनी रहेंगी.

प्रेमचंद.

साहित्यिक कुपाठ के निशाने पर प्रेमचंद

जून महीने के आख़िरी हफ्ते में मासिक पत्रिका हंस के संपादक संजय सहाय ने कहा कि प्रेमचंद यथास्थितिवादी, प्रतिगामी थे और उनकी 25-30 कहानियों को छोड़कर अधिकतर कहानियां ‘कूड़ा’ हैं.

प्रेमचंद. (जन्म: 31 जुलाई 1880 – अवसान: 08 अक्टूबर 1936) (फोटो साभार: रेख्ता डॉट ओआरजी)

प्रेमचंद के विचारों को उनके जन्म के सौ साल बाद याद करने की ज़रूरत क्यों है…

विशेष: प्रेमचंद अगर आज के हालात, ख़ासकर तथाकथित संस्कृति बचाने वालों को देखते, तो शायद अवसाद में चले जाते. उन्हें संस्कृति राजनीतिक स्वार्थ-सिद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाला महज़ साधन लगती थी और उनके अनुसार यही तथाकथित संस्कृति, सांप्रदायिकता को भी स्वार्थ पूरे करने के अवसर देती थी.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks on the 2nd day at the event titled 'Future of Bharat: An RSS perspective', in New Delhi, Tuesday, Sept 18, 2018. (PTI Photo) (PTI9_18_2018_000190B)

शिक्षा, संपन्नता से बढ़ रहे तलाक के मामलेः मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू समाज का कोई विकल्प नहीं है और हिंदू समाज के पास एक परिवार की तरह व्यवहार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

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प्रेमचंद का ‘सूरदास’ आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है

1925 में आए प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि में किसान सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ खड़े हो जाते हैं. जो बात रंगभूमि में सूरदास ने कहने की कोशिश की थी, वही आज जब कोई किसान कह रहा है तो उसे निशाना साधकर गोली मारी जा रही है.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा. (फोटो साभार: फेसबुक)

इतिहासकारों का राजनीतिक विचारधारा या धर्म के प्रति झुकाव नहीं होना चाहिए: गुहा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, इतिहास सामाजिक विज्ञान और साहित्य का मिश्रण है और वह कभी एक आयामी नहीं हो सकता.

शायर और गीतकार जावेद अख़्तर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नेताओं को पता होना चाहिए कि उन्होंने देश नहीं बनाया, जनता ने बनाया है: जावेद अख़्तर

मशहूर शायर व गीतकार ने कहा, टीपू सुल्तान भारतीय नहीं थे और अगर मैं इससे सहमत नहीं, तो मैं राष्ट्रद्रोही बन जाऊंगा, तो मैं राष्ट्रद्रोही हूं.

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समाज में बढ़ती असहिष्णुता की घटनाएं बर्बर युग के लौटने की याद दिलाती हैं: अदालत

दिल्ली की एक अदालत ने कहा, राजनीतिक नज़रिये को लेकर बढ़ती असहिष्णुता पर अंकुश लगाने की ज़रूरत.