भारत बंद

कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे बलदेव सिंह सिरसा (पीली पगड़ी में). (फोटो: फेसबुक)

कृषि क़ानून: एनआईए ने प्रदर्शनकारी नेता को समन भेजा, नेता बोले- आंदोलन पटरी से उतारने की साज़िश

कृषि क़ानूनों को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक संगठन के प्रमुख बलदेव सिंह सिरसा को एनआईए ने प्रतिबंधित सिख्स फॉर जस्टिस के एक नेता के ख़िलाफ़ दर्ज मामले में समन भेजा है. सिरसा ने कहा कि पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ज़रिये आंदोलन पटरी से उतारने की कोशिश की, अब वह एनआईए का उपयोग कर रही है.

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‘हमें नए कृषि क़ानून की ज़रूरत नहीं, पहले बुंदेलखंड पैकेज से बनीं मंडियों को शुरू कराए सरकार’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में बुंदेलखंड के सात ज़िलों में किसानों को कृषि बाज़ार मुहैया करवाने के उद्देश्य से 625.33 करोड़ रुपये ख़र्च कर ज़िला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कुल 138 मंडियां बनाई गई थीं. पर आज अधिकतर मंडियों में कोई ख़रीद-बिक्री नहीं होती, परिसरों में जंग लगे ताले लटक रहे हैं और स्थानीय किसान परेशान हैं.

द (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि क़ानूनों पर रोक लगाई, किसानों से बातचीत के लिए समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन कृषि क़ानूनों पर केंद्र और किसानों के बीच गतिरोध दूर करने के उद्देश्य से बनाई गई समिति में भाकियू के भूपेंद्र सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घानवत, प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं. इन चारों द्वारा नए कृषि क़ानूनों का समर्थन किया गया है.

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन संभालने में नाकाम केंद्र, कृषि क़ानूनों पर रोक लगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ कई याचिकाओं को सुनते हुए सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि सरकार जिस तरह से मामले को संभाल रही है उससे वे बेहद निराश हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार कहे कि क़ानूनों को लागू करने पर रोक लगाएगी, तो अदालत इसके लिए समिति गठित करने को तैयार है.

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला. (फोटो: पीटीआई)

भूमि अधिग्रहण बिल के बाद कृषि क़ानून प्रधानमंत्री की दूसरी हार का कारण बनेंगे: हन्नान मोल्ला

तीन कृषि क़ानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच अब तक हुई आठ दौर की वार्ता में भी गतिरोध ख़त्म नहीं होने को अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की की व्यक्तिगत असफलता बताया है.

New Delhi: Farmers at Singhu border during their ongoing protest march Delhi Chalo against Centres new farm laws, in New Delhi, Sunday, Nov. 29, 2020. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI29-11-2020 000032B)

आंदोलन स्थल पर एक किसान ने जान दी, अब तक चार लोग कर चुके हैं आत्महत्या

मृतक किसान की पहचान 39 वर्षीय किसान अमरिंदर सिंह के रूप में हुई. वह पंजाब में फतेहगढ़ साहिब के मचराई कलां गांव के रहने वाले थे. केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग पर किसान एक महीने से अधिक समय से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठे आंदोलनकारी किसान. (फोटो: द वायर)

किसान आंदोलन का एक महीना: ‘हम अपने बच्चों को कॉरपोरेट का लेबर नहीं बनने देंगे’

नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पिछले एक महीने से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर बैठे किसानों और सरकार के बीच पिछली बैठक में कुछ मांगों पर सहमति बनी है, लेकिन किसानों का कहना है कि मुख्य मांग नए क़ानूनों को वापस लेने और एमएसपी क़ानून बनाने की है, जब तक वो नहीं मानी जाएंगी, प्रदर्शन जारी रहेगा.

New Delhi: An ambulance goes past protestors' tents at Ghazipur border during the farmers' protest against the Centre's new farm laws, in New Delhi. (PTI)

किसान आंदोलन: किसान ने कथित रूप से ख़ुदकुशी की, प्रदर्शन स्थलों पर तीसरी आत्महत्या

ग़ाज़ीपुर में उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर बने प्रदर्शन स्थल की घटना. मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले में बिलासपुर निवासी किसान सरदार कश्मीर सिंह के रूप में हुई. अपने कथित सुसाइड नोट में उन्होंने कहा है कि आंदोलन के दौरान पंजाब के कई लोगों की मौत हुई, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से किसी ने भी बलिदान नहीं दिया.

Tikri Portest The Wire

किसान आंदोलन: ‘हमारा सरकार पर एक पैसे का भरोसा नहीं है’

वीडियो: तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध के बीच बीते एक महीने से किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर धरना दे रहे हैं. प्रदर्शन को एक महीने से अधिक समय होने पर किसानों से विशाल जायसवाल की बातचीत.

Tikri Protest Doctors

‘देश में डॉक्टरों से पूछे बिना मेडिकल नीति और किसानों से पूछे बिना कृषि नीतियां बन रही हैं’

वीडियो: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर हो रहे आंदोलन को वे डॉक्टर भी अपना समर्थन दे रहे हैं, जो कोविड-19 के दौरान पिछले कई महीनों में वेतन से लेकर विभिन्न सुविधाओं के संबंध में कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. उनसे बातचीत.

New Delhi: Farmers during their Delhi Chalo protest march against the new farm laws, at Singhu border in New Delhi, Sunday, Dec. 6, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI06-12-2020 000091B)

कृषि क़ानूनों के कथित विरोध में टिकरी बॉर्डर प्रदर्शन स्थल के पास वकील ने आत्महत्या की

दिल्ली स्थित टिकरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन उगराहां के आंदोलन में शामिल 65 वर्षीय मृतक वकील अमरजीत सिंह राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम लिखे पत्र में कहा है कि कृपया कुछ पूंजीपतियों के लिए किसानों, मज़दूरों और आम लोगों की रोटी न छीनें और उन्हें सल्फास खाने के लिए मजबूर न करें.

Gandhinagar: Former Gujarat chief minister and Congress veteran Shankersinh Vaghela address a public meeting on his 77th birthday in Gandhinagar on Friday. Vaghela on Friday said he was resigning from all posts in the party. PTI Photo (PTI7_21_2017_00224A)

किसान आंदोलन: दिल्ली आने की तैयारी कर रहे गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला नज़रबंद

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला और उनके समर्थकों ने केंद्र के तीन विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ अहमदाबाद के गांधी आश्रम से दिल्ली के राजघाट तक मार्च करने की योजना बनाई थी, हालांकि पुलिस ने उन्हें वहां से निकलने नहीं दिया.

राकेश टिकैट. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन में शामिल नेता राकेश टिकैत को मिली जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश की ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. कृषि क़ानूनों के लेकर दिल्ली की सीमाओं पर हो रहे प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच हो रही बातचीत में शामिल किसान नेताओं में से एक भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुजरात: नए कृषि क़ानूनों से नाख़ुश 100 भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल

भरूच कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अरुणसिंह राणा ने बताया कि ज़िले के नौ गांवों के सौ भाजपा कार्यकर्ता तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

हनुमान बेनीवाल. (फोटो: पीटीआई)

कृषि क़ानूनों के विरोध में एनडीए से अलग हुई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि तीनों कृषि क़ानून किसान-विरोधी हैं और देश के अन्नदाताओं के सम्मान में उनकी पार्टी ने एनडीए से अलग होने का निर्णय लिया है.