भारत में निवेश

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टोयोटा और हार्ले: क्या भारत में टैक्स और संस्थागत मांग को लेकर समस्याएं हैं?

वर्तमान आर्थिक स्थिति में भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक कम आकर्षक बाज़ार बन रहा है, जिसके संरचनात्मक रूप से ठीक होने में समय लग सकता है. कई वैश्विक ब्रांड भारत में या तो बड़े पैमाने पर निवेश घटाना चाहते हैं या अर्थव्यवस्था को देखते हुए आगे विस्तार के लिए निवेश नहीं कर रहे हैं.

An employee wearing a face mask works on a production line manufacturing socks for export at a factory in Huzhou's Deqing county, Zhejiang province, China February 19, 2020. China Daily via REUTERS

क्या चीन में काम कर रहीं कंपनियों को देश में लाने में सफल होगा भारत?

चीन में कामगारों के बढ़ते वेतन और अमेरिका के साथ इसके ट्रेड वॉर के बाद कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने वहां से अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस शिफ्ट करने शुरू कर दिए थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद अप्रैल 2018 से लेकर अगस्त 2019 के बीच ऐसी कंपनियों में से सिर्फ तीन ही भारत आईं.

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‘अर्थव्यवस्था डूब रही है और सरकार सिर्फ प्रचार का तमाशा कर रही है’

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि अर्थव्यवस्था डूब रही है और हर मामले में गरीब भारतीयों की सामान्य गुजर-बसर मुश्किल हुई है. वहीं, कांग्रेस ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि दर कम रहने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

देश में एफडीआई की वृद्धि दर 2017-18 में पांच साल के निचले स्तर पर

औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के अनुसार, 2017-18 में देश में एफडीआई प्रवाह तीन प्रतिशत बढ़ा. जबकि 2016-17 में वृद्धि दर 8.67, 2015-16 में 29, 2014-15 में 27 और 2013-14 में 8 प्रतिशत रही थी.