मज़दूरों की मौत

(प्रतीकात्मक फोटोः रॉयटर्स)

मेघालय और झारखंड में अवैध खदान दुर्घटनाओं में 10 लोगों की मौत

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में एक अवैध कोयला खदान में एक यांत्रिक ढांचा ढहने से छह खनिकों की मौत हो गई. वहीं, झारखंड के कोडरमा ज़िले में अवैध रूप से संचालित अभ्रक खदान के धंस जाने से छह मजदूर दब गए थे, जिसमें से चार की मौत हो गई.

(फोटो साभार: एएनआई)

ओडिशा: राउरकेला स्टील प्लांट में गैस रिसाव से चार श्रमिकों की मौत, जांच के आदेश

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित राउरकेला के इस प्लांट में यह हादसा बुधवार को हुआ, जिसके बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. अधिकारियों में बताया कि शुरुआती जांच के हिसाब से श्रमिकों की मौत इकाई में कार्बन मोनोक्साइड के रिसाव की वजह से हुई.

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दिल्लीः फैक्ट्री की छत ढहने से चार मज़दूरों की मौत, दो घायल

पश्चिमी दिल्ली के विष्णु गार्डन के ख्याला स्थित फैक्ट्री की छत ढही. फैक्ट्री में मोटर वाइंडिंग का काम होता था. बताया जा रहा है कि ज्यादा वजन की वजह से छत ढह गई. फैक्ट्री के मालिक को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

पहले इनकार करने के बाद अब सरकार ने माना, श्रमिक ट्रेनों में 97 लोगों की मौत हुई

बीते 14 सितंबर को शुरू हुई संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में कुल 10 सांसदों ने प्रवासी श्रमिकों की मौत से जुड़े सवाल पूछे थे, लेकिन सरकार ने ये जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया. श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय में राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि​ ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा जाता है.

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लॉकडाउन: श्रमिकों की मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

वीडियो: द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

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कश्मीर और प्रवासी मज़दूरों पर मोदी सरकार के दो सबसे बड़े झूठ

वीडियो: द वायर द्वारा दायर आरटीआई आवेदनों से पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले करीब 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र के पास ये जानकारी होने के बावजूद संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया गया. वहीं, सरकार का कहना है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की घटनाएं कम हुई हैं. इस मुद्दे पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

झारखंड के गढ़वा में सेप्टिक टैंक की ज़हरीली गैस से तीन मज़दूरों की मौत

घटना गढ़वा शहर के पिपराकला इलाके का है. घटना से आक्रोशित लोगों ने मुआवज़े की मांग को लेकर सदर अस्पताल के सामने तीनों मज़दूरों के शव के साथ एनएच-75 को लगभग एक घंटे तक जाम कर दिया था.

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गुजरातः दो दिनों में छह मज़दूरों की मौत के बाद दो कारखानों को बंद करने के आदेश

बीते दो दिनों में अहमदाबाद के विशाल फैब्रिक्स में चार और श्री शक्ति केमिकल फैक्ट्री में दो मज़दूरों की ज़हरीली गैस के संपर्क में आने से मौत हो गई थी, जिसके बाद श्रम एवं रोजगार विभाग ने इन दोनों को बंद करने के आदेश दिए हैं.

Ahmedabad

गुजरातः कपड़ा कारखाने में टैंक की सफाई के दौरान चार मज़दूरों की मौत

मामला अहमदाबाद का है, जहां एक फैब्रिक यूनिट में रासायनिक कचरे के टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से मज़दूरों की मौत हो गई. बताया गया है कि उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में भेजा गया था.

(फोटो: पीटीआई)

नेवेली बॉयलर विस्फोट: एनजीटी ने एनएलसी इंडिया पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

बीते एक जुलाई को तमिलनाडु के नेवेली स्थित एनएलसी इंडिया के थर्मल संयंत्र-2 में हुए विस्फोट में 13 कामगारों की मौत हुई थी और दस घायल हुए थे. एनजीटी का कहना है कि संपूर्ण जवाबदेही के सिद्धांत के तहत औद्योगिक इकाई को अंतरिम मुआवज़ा देना होगा.

(फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: एनएलसी इंडिया के बॉयलर में विस्फोट से मरने वाले श्रमिकों की संख्या 13 हुई

बीते एक जुलाई को तमिलनाडु के नेवेली स्थित एनएलसी इंडिया के थर्मल संयंत्र -2 की पांचवीं इकाई में परिचालन शुरू करने की प्रक्रिया में विस्फोट हुआ था, जिसमें छह श्रमिकों की मौके पर मौत हो गई थी और 17 लोग घायल हो गए थे.

(फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: एनएलसी इंडिया के थर्मल संयंत्र में विस्फोट से छह लोगों की मौत, 17 घायल

तमिलनाडु के नेवेली में स्थित एनएलसी इंडिया के थर्मल बिजली स्टेशन में पिछले दो महीने में यह दूसरा हादसा है. मृतकों की उम्र 25 से 42 साल के बीच है और सभी अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिक थे.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: हैदराबाद से पैदल ही पश्चिम बंगाल लौट रहे प्रवासी मज़दूर की ओडिशा में मौत

एक अन्य घटना में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ज़िले में दिल्ली से गांव लौटे एक प्रवासी मज़दूर की घर से कुछ दूरी पर मौत हो गई. गुजरात के राजकोट शहर में घर जाने के लिए बस का इंतज़ार कर रहे एक कृषि मज़दूर की मौत वाहन की चपेट में आ जाने से हो गई.

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उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में क्वारंटीन सेंटर से भागकर प्रवासी मज़दूर ने फांसी लगाई

पुलिस ने बताया कि 35 वर्षीय मज़दूर छह माह पहले गुजरात के सूरत में मज़दूरी करने चले गए थे. 20 मई को वापस आने पर उन्हें उनके गांव में बने सरकारी क्वारंटीन सेंटर में ठहराया गया था.

Chandigarh: Migrants from various districts of Uttar Pradesh ride bicycles to reach their native places, during the ongoing COVID-19 lockdown, in the outskirts of Chandigarh, Saturday, May 16, 2020. (PTI Photo)(PTI16-05-2020 000071B)

‘वे जल्द से जल्द लौटना चाहते थे कि बच्चों को देख सकें, पर ऐसे आएंगे ये नहीं सोचा था’

बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के एक गांव के रहने वाले सगीर अंसारी दिल्ली में सिलाई का काम करते थे. लॉकडाउन के दौरान काम न होने और जमापूंजी ख़त्म हो जाने के बाद वे अपने भाई और कुछ साथियों के साथ साइकिल से घर की ओर निकले थे, जब लखनऊ में एक गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.