मज़हब

Rahul Sankrityayan

‘राहुल सांकृत्यायन घुमक्कड़ लेखक भर नहीं, बल्कि शिक्षक थे’

वीडियो: 9 अप्रैल को लेखक और विचारक राहुल सांकृत्यायन का 125वां जन्मदिन था. दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में उनके जीवन और कृतित्व पर लगी प्रदर्शनी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश से बातचीत.

(फोटो साभार: फ़ेसबुक)

मैंने आज़ादी के बाद जैसा हिंदुस्तान देखा था, उसी हिंदुस्तान में मरना चाहता हूं: मुनव्वर राना

जन्मदिन विशेष: इस सियासी उथल-पुथल में एक बुजुर्ग की हैसियत से मुझे ख़ौफ़ लगता है कि कहीं हिंदुस्तान में ज़बान, तहज़ीब और मज़हब के आधार पर कई हिंदुस्तान बन जाएं. यह बहुत अफ़सोसनाक होगा.

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सरकारी अफ़सरान हों या मुंसिफ़, ख़ुद को सामाजिक नैतिकता का प्रहरी मान बैठते हैं

व्यक्ति कुछ मौलिक अधिकारों से संपन्न है. संविधान इन अधिकारों की निशानदेही कर राज्य को बताता है कि वह व्यक्ति के जीवन में कहां हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

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हिंदुस्तानियों की एकता मज़हबों के मेल पर नहीं, मज़हबों की चिता पर होगी: राहुल सांकृत्यायन

कहने के लिए इस्लाम शक्ति और विश्व-बंधुत्व का धर्म कहलाता है, हिंदू धर्म ब्रह्मज्ञान और सहिष्णुता का धर्म बतलाया जाता है, किंतु क्या इन दोनों धर्मों ने अपने इस दावे को कार्यरूप में परिणत करके दिखलाया?